सोनभद्र/ आज एकदिवसीय प्रवास कार्यक्रम पर पहुंचे धर्माचार्य आध्यात्मिक एवं दार्शनिक विचारक सिद्ध पीठ श्री हनुमन्निवास अयोध्या धाम के परम पूज्य संत श्री मिथिलेशनन्दिनीशरण जी महाराज ने कहा कि सोनभद्र धर्म और आध्यात्मिक सांस्कृतिक नगरी है। सोनभद्र के बिना धर्म की कल्पना अधूरी है। मानव जीवन के आध्यात्म क्षेत्र में धर्म का केंद्र है तो वही जीविकोपार्जन के लिए अर्थ नगरी है यह वही है जहां अंत्योदय की कल्पना से लेकर ऋषियों एवं मुनियों के तपोस्थलीय तक के लिए विश्व के मानस पटल पर सूर्य के समान रोशनी और चंद्र के समान शीतलता प्रदान करता है। सेवा और समर्पण का केंद्र है। यहां यदि बालू रेतीले वाले मैदान है तो पहाड़ियां भी है वहीं दूसरी तरफ कृषि योग्य भूमि यही कारण रहा है कि यह संत भूमि कहलाई है।
जिसका सीमांकन सोन नद करता है यह जिला 11 वीं से 13 वीं शताब्दी के दौरान दूसरी काशी के रूप में प्रसिद्ध था भारत का एकमात्र जिला है जो मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ झारखंड और बिहार के चार राज्यों से घिरा है. कौन बनेगा करोड़पति के टीवी शो में पूछा जाने वाला जिला सोनभद्र के पावन पवित्र धरा पर अनेकों भित्ति चित्र, शिव/ बड़ा देव उपासकों के द्वारा स्थापित प्राचीन शिव मंदिर, मां आदि शक्ति उपासकों के द्वारा स्थापित प्राचीन देवी मंदिर, प्राकृतिक झरने,सोन- रेणु- बिजुल- घाघरा- कर्मनासा- रिहंद- कनहर- बेलन नदियों के किनारे अत्यधिक सुंदर पर्यटन स्थल,बड़े-बड़े बाँध जैसे गोविंद बल्लभ पंत सागर उर्फ रिहंद बाँध-कनहर बाँध-नगवा बाँध -धंधरौल बाँध- ओबरा बाँध , वनों में स्थित छोटे-छोटे चुआँड, घनघोर वनों में स्थित बड़ी-बड़ी चट्टानें- गुफाएं, फॉसिल्स पार्क, बॉक्साइट- चूना पत्थर-डोलोमाइंस पत्थर-कोयला- सोना आदि जैसे बहुत सारे खनिज सम्पदाओ से परिपूर्ण ऊंची ऊंची पहाड़ियां,नदियों के रेतीले मैदान, किले जैसे अगोरी किला- विजयगढ़ किला- सोढरीगढ़ किला, कैमूर वन्यजीव अभयारण्य जहां आज भी काले हिरण विचरण करते हैं,बड़े-बड़े औद्योगिक घराने जैसे विंध्याचल थर्मल पावर स्टेशन- रिहंद थर्मल पावर स्टेशन- बिजलीघर अनपरा -बिजलीघर ओबरा – हिंडाल्को हाइड्रो- पिपरी हाइड्रो- एनसीएल कई कोयला खदानें- हिंडाल्को प्रमुख एल्युमीनियम संयंत्र- डाला सीमेंट फैक्ट्री- चुर्क सीमेंट फैक्ट्री- आदित्य बिड़ला केमिकल्स- हाई-टेक कार्बन- कनोरिया केमिकल्स पावर प्लांट- लैंको अनपरा पावर लिमिटेड है भारत के एकमात्र इसी जनपद में इस प्रकार का समुच्चय स्थित है।
काशी कथा न्यास के संस्थापक डॉ अवधेश दीक्षित ने कहा कि सोनभद्र के बिना काशी ही नहीं बल्कि विश्व के किसी देव भूमि की कल्पना अधूरी रह जाती है इसलिए जिसने सोनभद्र नहीं देखा उसने संपूर्ण भारत को नहीं देखा क्योंकि संपूर्ण भारत के मानव जीवन आधारित हर प्रकार के प्रतिबिंब यहां दिखाई पड़ते हैं। यही कारण राय की संतों मुनियों ऋषियों ने यहां अपना जप तप किया और सिद्धि प्राप्त करते हुए सोनभद्र को तपोस्थली के रूप में भारत के मानस पटेल पर विकसित किया।
अखिल भारतीय दुर्गा भूषण फाउंडेशन के अध्यक्ष पंडित आलोक कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि यहाँ समाज का कितना अच्छा समन्वय था कि यहां के हर राज्यों के राजा आदिवासी थे किंतु उन्होंने मंदिर स्थापना के साथ हर मंदिरों के पुजारी ब्राह्मणों को रख और ब्राह्मणों ने अपने इस कर्तव्य को निभाते होते हुए भी सर्व समाज की सहभागिता हर कार्यक्रमों में रहती है यहाँ जातिवाद और वैमनस्यता की कोई जगह नहीं है यहाँ हैं तो भाई चारा यहीं कारण रहा की कभी भी किसी प्रकार शांति भंग यहाँ नहीं हुआ।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विभाग बौद्धिक प्रमुख धनंजय पाठक ने कहा कि जिसने सोनभद्र को देख लिया उसने अध्यात्म को देख लिया उसने मानवता को देख लिया उसने राष्ट्रवाद को देख लिया इसलिए सोनभद्र अवश्य देखें।
परम पूज्य महाराज जी ने सोनभद्र पहुंचकर पंचमुखी महादेव, वीर लोरिक पत्थर, शिव मंदिर गोठनी,भूतेश्वर महादेव ओबरा,अमर गुफा डाला सुमित सोनभद्र के कई धार्मिक स्थलों का दृश्या अवलोकन किया.
परम पूज्य स्वामी जी का हिंदूवारी मोड, चोपन, वह गुरु कृपा आश्रम में स्वागत समारोह भी संपन्न हुआ. सर्किट हाउस रावटसगंज में स्वागत विंध्य कन्या पीजी कॉलेज की प्रबंधक डॉ अंजलि विक्रम सिंह ने किया. संपूर्ण यात्रा के दौरान सुनील सिंह मंडल अध्यक्ष भारतीय जनता पार्टी चोपन, मनोज चौबे, बादल पांडे, रामभरोस यादव, धनंजय पाठक, पंडित आलोक कुमार चतुर्वेदी, विजय कुमार, अभय कुमार,शिखर कुमार, प्रवीण चन्द्र पाण्डेय समेत सैकड़ो लोग शामिल रहे।
Author: Pramod Gupta
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