August 31, 2025 5:55 am

किसानों के लिए परेशानियों का सबब बना रियल टाइम खतौनी,प्रति गाटे 15 से 20 रूपये का शुल्क

दुद्धी:सोनभद्र(राकेश गुप्ता)सरकार द्वारा किसानों की सुविधा के लिए अपलोड की जा रही रियल टाइम खतौनी अब किसानों पर ही भारी पड़ने लगी हैं। इस रियल टाइम खतौनी में किसानों की भूमि का गाटा वाइज ऑनलाइन दर्ज किया जा रहा हैं ताकि किसानों की सुविधा हो लेकिन दुद्धी तहसील क्षेत्र के किसानों के लिए रियल टाइम खतौनी अभिशाप बन गई, क्योंकि दुद्धी क्षेत्र आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र हैं और यहां पर छोटे -छोटे गाटों की भरमार हैं। दुद्धी क्षेत्र में एक -एक किसानों के 100,150 से लेकर 200 से 250 तक गाटें हैं।ज़ब रियल टाइम खतौनी लागू हुई हैं तब से किसानों को प्रति गाटे 15 से 20 रूपये शुल्क का भुगतान करना पड़ रहा हैं और जिसके 200 गाटें हैं उसे 3000-4000 रूपये तक रियल टाइम खतौनी के लिए खर्च करने पड़ रहें हैं। इसलिए एक तरफ जहाँ सरकार किसानों को सुविधा देकर उनकी आय दुगुनी करने का प्रयास कर रही हैं तो वहीं सोनभद्र जिले के दुद्धी तहसील सहित अन्य पिछड़े जिलों के लिए यह बरदान की जगह अभिशाप साबित हो गई।इसलिए ज़ब किसान रियल टाइम खतौनी निकालने जा रहा हैं तो उसे जमकर जेबें ढीली करनी पड़ रही हैं।वरिष्ठ अधिवक्ता सत्यनारायण यादव का कहना हैं कि रियल टाइम खतौनी से प्रदेश के कई जिलों को फायदा हैं तो वहीं सोनभद्र के किसानों के लिए नुकसान दायक हैं, क्योंकि यह जिला पहाड़ी पथरीली तथा आदिवासियों का जिला हैं,जहाँ का परिवार संयुक्त रूप से एक साथ रहता हैं और इनकी भूमि भी संयुक्त रूप में ही खतौनी में दर्ज हैं और एक -एक खाते में 50-60 गाटें से लेकर 200-250 तक गाटें दर्ज हैं। ऐसी स्थिति में जहाँ पहले एक खतौनी के लिए 15-20 रूपये खर्च कर एक खाते की पूरी खतौनी मिल जाती थी अब उसी खतौनी के लिए किसानों को हजारों रुपए तक चुकाने पड़ रहें हैं, जिससे किसानों पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा हैं। उन्होंने राजस्व परिषद से मांग की हैं कि दुद्धी क्षेत्र में लागू रियल टाइम खतौनी की समीक्षा कर उसे वापस लिया जाना चाहिए।

बिना चकबंदी रियल टाइम खतौनी लागू करना बना मुसीबत का कारण

सोनभद्र जिले में बिना चकबंदी के ही रियल टाइम खतौनी लागू करना किसानों सहित लेखपालों के लिए भी मुसीबत का कारण बन गई हैं, क्योंकि 100-200 गाटों में अंश निर्धारण करने में लेखपाल परेशान हैं तो वहीं किसान भी परेशान हैं। किसानों को भी रियल टाइम खतौनी निकालने में मोटी रकम चुकानी पड़ रहीं हैं। वहीं दुद्धी तहसील के कई गावों में रियल टाइम खतौनी लागू नहीं हुई हैं जिससे उनका बैनामा सहित अन्य कार्य प्रभावित हो रहीं हैं

दुद्धी स्टेट को पूर्व की भांति मिले छूट

ब्रिटिश काल में दुद्धी स्टेट को अलग दर्जा दिया गया था और यहां का शासन सीधे महारानी विकटोरिया के यहां से संचालित होती थी और दुद्धी स्टेट को कई तरह से छूट दिया गया था। उसी तर्ज पर यहां के किसानों की भूमि की अंतरण, खसरा, खतौनी सहित सहित भूमि खरीद फरोख्त के लिए भी अलग क़ानून थी ताकि आदिवासियों की जमीन का संरक्षण हो सकी। रियल टाइम खतौनी को लेकर भी दुद्धी तहसील क्षेत्र के किसानों का कहना हैं कि यहां किसानों को भी मुख्यमंत्री जी को पूर्व की तरह छूट देना चाहिए ताकि दुद्धी तहसील क्षेत्र के आदिवासी किसान अपनी खेती बाड़ी को लेकर पूर्व की तरह जीवन निर्वाह कर सकें।

Pramod Gupta
Author: Pramod Gupta

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