सोनभद्र। लोक सभा चुनाव के अंतिम चरण में सभी दलो ने अपनी ताकत झोक दी है। सात दशक बीत जाने के बाद आज भी सोनभद्र में अपेक्षाकृत विकास नहीं हुआ है। रैलियों के दौरान नेताओं द्वारा किये गये वायदे धरातल पर नहीं दिखाई देने से नाराजगी दिखाई दे रही है।
आज जिले के सबसे पिछडे इलाके दुद्धी में सूबे में मुख्यमंत्री आम सभा करने जा रहे है, लोगों को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से दुद्धी को जिला बनाने की उम्मीद लगाए हुए है। दुद्धी को जिला बनाने के लिये काफी समय से आंदोलन भी विभिन्न संगठनों द्वारा चलाया जा रहा है। यह भी बतादें कि पिछले विधान सभा चुनाव में नेताओं द्वारा दुद्धी को जिला बनाने का वायदा किया था परन्तु आज तक वादा पुरा नहीं होने से लोगो में आक्रोश है। इस आक्रोश को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कैसे शान्त करेगे यह तो उनके द्वारा आयोजित सभा में ही पता चल पायेगा। राबर्ट्सगंज संसदीय क्षेत्र भौगोलिक रूप से सबसे बड़ा माना जाता है। प्राकृतिक खूबसूरती के कारण प्रथम प्रधानमंत्री ने स्वज़वाहर लाल नेहरू ने इसे मिनी स्विटजरलैंड बताया था। इसके बावजूद आज भी विकास की किरणं यहां से कोसों दूर है। 18 लाख से अधिक आबादी वाला सोनभद्र आदिवासी बाहुल्य जिला है। प्रदेश के अति
पिछड़े जिलों में सुमार इस जिले में हमेशा से ही विकास की दरकार रही है। हालांकि यहां हर
मिनी स्विटजरलैंड में गुम है विकास का मुद्दा
बार लोकसभा का चुनाव विकास के मुद्दे पर लड़ा जाता था, लेकिन अब तक यह जिला अति पिछड़े की सूची से बाहर नहीं निकल सका है। अभी भी यहां के लोग शुद्ध पेयजल के लिए तरस रहे हैं, वहीं सिंचाई की सुविधा नहीं है। जिले में कई बिजली परियोजनाएं होने के बाद भी बिजली की समस्या बनी रहती है। सड़कें तो हैं लेकिन कई जगह चलने लायक नहीं है। स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह से बेहाल हैं। औद्योगिक इकाइयों में स्थानीय लोगों के लिए रोजगार नहीं है, जिससे आयेदिन आज भी औद्योगिक अषांति होती रहती है। जिले के जुगैल सहित कई जगह आज भी संचार व्यवस्था उपलब्ध नहीं है। हम अगर बात करे जिले के सबसे बडी कोटा ग्राम पंचायत की तो वहा विकास की तो बाद छोडिए सड़कों का तो बुरा हाल हैं। कोटा के हरिहरी से बभनी, अबाडी से कोटा, सकला आदि टोलो में जीर्णषीर्ण सडके विकास की पोल खोल रही है। बता दें कि सोनभद्र में विकास को गति देने के लिए सन् 1965 के आसपास रिहंद बांध बना था, उसके बाद बिजली परियोजनाएं लगी। मौजूदा समय में यहां ओबरा, अनपरा, शक्तिनगर बीजपुर परियोजनाओं से सूबे के
कौन कब जीता
1962 रामस्वरूप, कांग्रेस, 1967 रामस्वरूप, कांग्रेस, 1971 रामस्वरूप, कांग्रेस, 1977 शिवसंपत राम, जनता पाटी, 1980 रामप्यारे पनिका, कांग्रेस, 1984 रामप्यारे पनिका, कांग्रेस, 1989 सूबेदार नि प्रसाद, भाजपा, 1991 रामनिहोर राय, जनता दल, 1996 रामसकल, भाजपा, 1998 रामसकल, भाजपा, 1999 रामसकल, भाजपा, 2004 लालचंद कोल, बसपा, 2007 ‘भाईलाल कोन, बसपा उपचुनाव, 2009 पकौड़ीलाल कोल सपा, 2014 छोटेलाल खरवार, भाजपा, 2019 पकौड़ीलाल कोल, अपना दल
अलावा देश को रौशन कर रहा है। 5 7 बालू और पत्थर खनन के लिए विषे जाना जाता है। जिले में उद्योग की शुरूआत करने आए तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू पहाड़ों, जंगलों और नदियों से घिरे यहां के प्राकृतिक सुंदरता से काफी प्रभावित होकर विकास का वादा किया था। यहां के लोगों ने विकास और बेहतर जीवनषैली की आस में शुरूआत में लगातार तीन बार सन् 1962, 1967 एवं 1971 में कांग्रेस के प्रत्याशी रामस्वरूप को सांसद बनाया था, परंतु मिर्जापुर जिले में ही शामिल होने के कारण सोनभद्र का समुचित विकास नहीं हो पाया।
Author: Pramod Gupta
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