सोनभद्र। कविता गीत गजल मुक्तक और शायरी की सुमधुर प्रस्तुतियों से रॉबर्ट्सगंज का आरटीएस क्लब मैदान गुलजार रहा मंगलवार की गुनगुनाती सर्द शाम तालियों की गड़गड़ाहट के साथ आह आह और वाह वाह के बीच निशा को अपने आगोश में लेकर कोकिल कण्ठ से गाते जन मन नव चेतना का संचार कर आयोजन को नयी ऊंचाई प्रदान की।
मधुरिमा साहित्य गोष्ठी द्वारा आयोजित 61 वें अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में जमकर लगे ठहाके और खूब बजी तालियां देश के जाने- माने कवि गीतकार और शायरों ने श्रोताओं को अपने प्रस्तुतियों से हंसाने गुदगुदाने के साथ काव्य रस में गोते लगाने को मजबूर कर दिया।
मधुरिमा साहित्य गोष्ठी के निदेशक लब्ध प्रतिष्ठ साहित्यकार व चिन्तक पं० अजय शेखर के संयोजन व मार्गदर्शन तथा जाने माने गीतकार मनमोहन मिश्र के अध्यक्षता एवं शंकर कैमरी के संचालन में आयोजित अखिल भरतीय कवि सम्मेलन में बतौर मुख्य अतिथि सदर विधायक भूपेश चौबे की गरिमामयी उपस्थिति में मंचासीन कवियों के सारस्वत सम्मान के साथ कार्यक्रम का आगाज बाल कवियित्री कुमारी श्रीजा द्वारा वाणी वन्दना से किया गया।
तपश्चात गीतकार ईश्वर विरागी ने काव्यपाठ करते हुए आ गये चांद तारों का संसार ले, रात को रात अपनी बना लीजिए सुनाकर माहौल बनाया तो वहीं हास्य कवि दिवाकर द्विवेदी मेघ विजयगढ़ी ने अपनी रचना कितना अच्छा होता जब गाय बेहया चरती सुनाकर श्रोताओं को गुदगुदाया तो नव गीतकार दिलीप सिंह ‘दीपक’ ने तुम सब कुछ बेंच दो मगर हिन्दुस्तान मत बेंचो सुनाकर व्यवस्था पर करारा प्रहार किया इसके बाद कवियित्री कौशल्या कुमारी चौहान ने अपनी रचना मुझको अबला मत समझो मैं झांसी वाली रानी हूँ कि प्रस्तुति से नारी सशक्तिकरण का अलख जगाया साथ ही साथ मिमिक्री स्टार अभय शर्मा ने काव्य पाठ करते हुए अपने कला कौशल का जलवा बिखेरते हुए देश की तमाम राजनीतिक हस्तियों की मिमिक्री करते हुए श्रोताओं को हंसाकर गुदगुदाकर लोटपोट कर दिया वहीं वाराणसी से आये कवि धर्म प्रकाश मिश्र ने अपनी रचना भारत मे अँखियों से गोली मारी जाती है सुनाकर सामाजिक व्यवस्था पर चोट किया।
ओज के कवि प्रभात सिंह चन्देल ने काव्यपाठ करते हुए लिखे हैं लहू से अमरत्व की गाथा, हम लोकहित में अस्थियों का दान करते हैं तथा मौन साध बैठे दरबारी सिर बोल रहा सत्ता का मद है, हम कैसे कहें सुरक्षित खुद को जब खतरे में संसद है सुनाकर देश के अमर क्रांतिकारियों और शहीदों को नमन करते श्रोताओं को भावविभोर कर दिया तो वहीं चंदौली से आये गीतकार मनोज द्विवेदी ‘मधुर’ ने प्रतिपल पलक बिछाई राह में प्रेम बस, सबरी के हांथों राम जूठे बेर खाते हैं सुनाकर शमां बांध दिया तो कमल नयन तिवारी ने चार दिन के इश्क में बदल गया लड़का, हांथ से निकल गया लड़का सुनाकर प्यार मोहब्बत की बात की। कवियित्री अनुपमा वाणी ने हमेशा झील और झरने की बात करता था, हदों से भी वो गुजरने की बात करता था सुनाकर माहौल को खुशनुमा बना दिया।
आजमगढ़ से आये अहमद आजमी ने मां बाप जिस मसक्कत से घर बनाते हैं, बेटे उसी पर दीवार बनाते हैं सुनाया तो हास्य कवि जयराम सोनी ने अपनी प्रस्तुति से खूब हँसाया तो आँचल ने मातृभूमि और भाषा के महत्ता को बताया हस्य-व्यंग के कवि अजय चतुर्वेदी कक्का ने भूत को प्रणाम प्रेत को प्रणाम सुनाकर खूब वाहवाही बटोरी तो वाराणसी से आये मुनि जी तिवारी ने जिन्दगी ने जमाने मे चोट हजारों दी, लेकिन हमने मरहम लगाए क्यों नही सुनाकर अन्नदाता का दर्द बयां किया तो ओज के कवि प्रदुम्न त्रिपाठी ने अपनी रचना झांसी के रानी का पानी हिंदुस्तानी बोला, भागो फिरंगी हिंदुस्तान ये हमारा है सुनाकर देशभक्ति का भाव जगाया।
वाराणसी से आये सलीम शिवालवी ने अलम नफरत के गाड़े जा रहे हैं, गड़े मूर्दे उखाड़े जा रहे हैं सुनाकर खूब वाहवाही बटोरी तो प्रतापगढ़ से आयी प्रीति पाण्डेय ने वतन के वास्ते जो रखवाली करने नही जाता, मन के सरहद में घूम लेती हूं इन हवाओं को चूम लेती हूं सुनाकर सर्द रात तालियों से माहौल गर्म कर दिया। शायर अब्दुल हई ने जब मुसलसल दुश्मनी का सिलसिला बढ़ता गया सुनाया। कवि अशोक तिवारी ने दिल मे हिंदुस्तान रखता था , जमी पर पांव सिर पर आसमान रखता था सुनाकर माहौल दिया तथा नजर मोहम्मद नजर ने जिन्दगी का मजा जिन्दगी पा गयी सुनाकर तालियां बटोरी।
जाने माने कवि गीतकार जगदीश पंथी ने सोनवा क बलिया सिवनवा में लटकल , देखई चंदनिया सिहाइ सुनाकर ऊंचाई प्रदान किया ततपश्चात कवि सम्मेलन का संचालन कर रहे पटना से आये शंकर कैमरी ने देखकर है खफा आईना, जाने क्या कह गया आईना से कोहरे और धुंध की सर्द रात में चमक बिखेर दिया तथा आयोजन की अध्यक्षता कर रहे देवरिया से आये मनमोहन मिश्र ने अध्यक्षीय काव्यपाठ करते हुए जो मेरे गीतों का एक एक पेज है , दर्द का मेरे दस्तावेज है सुनाकर आयोजन को शिखर पर पहुंचा दिया।
इस अवशर पर समानित वनवासी सेवा आश्रम की सचिव शुभा प्रेम, प्रत्रकार राहुल श्रीवास्तव, राजेश द्विवेदी, डा. कुसुमाकर, प्रमोद श्रीवास्तव पम्मू, अनिल द्विवेदी, धीरज पांडेय ‘धीरू’, गोपाल स्वरूप पाठक, मुस्तफा जमाल सुन्ना, इमरान बख्सी, देवनाथ भाई, विमल भाई, जगत भाई, शिवसरन भाई, प्रेम प्रकाश राय, गौरव शुक्ला समेत सम्मानित पत्रप्रतिनिधि, समाजसेवी, अधिवक्ता, व्यापारी तथा नगर के गणमान्य लोग मौजूद रहे।

Author: Pramod Gupta
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