– विवेचक और आरोपी पर हो सकती है कार्यवाही
पुलिस ने लगा दी फाइनल रिपोर्ट अधिवक्ता ने कहा विवेचना त्रुटियों से भरी हुई
सोनभद्र- 15 अगस्त 2022 को धनरौल बांध में रामानुज की संदिग्ध परिस्थितियों में डूबने से हुई मौत मामले में पुलिस ने फाइनल रिपोर्ट लगाकर मामले को खारिज करते हुए अदालत में रिपोर्ट प्रस्तुत कर दी थी।मृतक के पिता बनारसी पांडे इस मामले को लेकर न्यायालय में प्रोटेस्ट दाखिल कर चुके हैं। जनपद के जाने-माने चर्चित अधिवक्ता विकास शाक्य अब उनके मामले की पैरवी कर रहे हैं। शाक्य के द्वारा अदालत में दिए गये तर्कों को न्यायाधीश ने काफ़ी गंभीरता से लेते हुए पुनः विवेचना का आदेश जारी कर दिया है शाक्य से हुई बातचीत के आधार पर जो तथ्य सामने आए हैं वह काफी चौंकाने वाले हैं शाक्य का कहना है कि जिस तरह रन टोला फर्जी मुठभेड़ मामले में सोनभद्र के 15 पुलिसकर्मी जेल की सजा काट रहे हैं हो सकता है इस तरह इस मामले में भी सबूत नष्ट करने और आरोपी को बचाने के जुर्म में रामपुर बरकोनिया थाने के लगभग आधे दर्जन पुलिसकर्मी भविष्य में सजा से नवाजे जा सकते हैं। अधिवक्ता विकास शाक्य ने बताया कि पुलिस की फाइनल रिपोर्ट हर बिंदु पर त्रुटियों से भरी हुई है । शव को निकल जाने से लेकर पाली ग्राफ टेस्ट तक हर जगह पुलिस ने आरोपी को बचाने का कार्य किया है।उन्होंने बताया कि रामपुर बर कोरिया थाने के कंप्यूटर ऑपरेटर तत्कालीन थाना अध्यक्ष कॉन्स्टेबल अखिलेश कुमार पंचनामा तैयार करने वाले दरोगा उमाशंकर गिरी समेत कुछ अन्य की भूमिका पूरी तरह शंका उत्पन्न करने वाली है। पुलिस ने हर बिंदु पर लापरवाही बरतने का काम किया है। पुलिस ने तकनीकी बिंदुओं का परीक्षण विवेचना के दौरान कतई गंभीरता नहीं किया है। आरोपी के मोबाइल डाटा से लेकर के मृतक के मोबाइल और अंतिम परीक्षण रिपोर्ट की कमियों में भी जो तकनीकी बिंदु है उन्हें पूरी तरह नकार दिया गया है।

अधिवक्ता विकास शाक्य ने बताया कि जिस तरह रन टोला फर्जी मुठभेड़ कांड में पुलिस ने लीपा पोती करके अपने पैर में कुल्हाड़ी मारी थी उसी तरह इस विवेचना में भी पुलिस एक हत्या आरोपी को बचाने का भर सक प्रयास किया है।
मृतक के पिता बनारसी पांडेय अदालत पर पूरा भरोसा जताते है पुनः विवेचना का आदेश मिलते ही उन्होंने कहा की हमें न्याय व्यवस्था पर पूरी तरह भरोसा है।
ज्ञात हो की अधिवक्ता विकास शाक्य की ही पैरवी से रन टोला कांड के आरोपी 15 पुलिस कर्मी आज भी जेल की सलाखों के पीछे हैं और अभी हाल ही में विधायक रामदुलार गौड़ को दुराचार मामले में अब तक की सबसे बड़ी सजा इसी अधिवक्ता पैरवी के कारण संभव हुआ है।
Author: Pramod Gupta
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