सोनभद्र। बभनी (नरेश गुप्ता) सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) बभनी एक बार फिर विवादों के घेरे में है। गरीबों को सस्ती दवाएं उपलब्ध कराने के संकल्प के साथ शुरू किया गया प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि केंद्र अब भ्रष्टाचार और निजी स्वार्थ की भेंट चढ़ता नजर आ रहा है। स्थानीय ग्रामीणों और मरीजों ने स्वास्थ्य विभाग पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि यहाँ जन औषधि की आड़ में धड़ल्ले से प्राइवेट दवाएं बेची जा रही हैं। ताजा आरोपों के अनुसार, इस केंद्र पर न केवल काउंटर के पीछे, बल्कि दोपहिया वाहनों की डिग्गी में प्राइवेट दवाएं छिपाकर रखी जा रही हैं। जैसे ही कोई गरीब मरीज डॉक्टर का पर्चा लेकर पहुँचता है, उसे सस्ती जेनेरिक दवाओं के बजाय महंगे ब्रांड की प्राइवेट दवाएं थमा दी जाती हैं। हैरान करने वाली बातें यह है की नियमों को ताक पर रखकर यह केंद्र बिना किसी अधिकृत फार्मासिस्ट के चलाया जा रहा है, जिससे गलत दवा मिलने का खतरा बना रहता है। चर्चा है कि केंद्र का लाइसेंस किसी और के नाम पर है, जबकि इसका संचालन पर्दे के पीछे से कोई और सिंडिकेट कर रहा है। क्षेत्रीय जनता का मानना है कि यह सब स्वास्थ्य विभाग की नाक के नीचे और उनकी मौन सहमति से हो रहा है। जब इस संबंध में CHC अधीक्षक डॉ. रंजन सिंह से बात की गई, तो उन्होंने बताया की इससे पहले भी जन औषधि केंद्र की शिकायत मिली थी, जिसकी जांच की गई लेकिन कोई बाहरी दवा बरामद नहीं हुई। वर्तमान शिकायतों को संज्ञान में लेते हुए फिर से औचक निरीक्षण किया जाएगा। हालांकि, स्थानीय लोग इस आश्वासन से संतुष्ट नहीं हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि जांच की सूचना पहले ही लीक कर दी जाती है, जिससे रसूखदार संचालक बच निकलते हैं और कार्रवाई के नाम पर केवल ‘खानापूर्ति’ की जाती है। बिना विशेषज्ञ (फार्मासिस्ट) के दवाओं का वितरण और अवैध तरीके से निजी दवाओं की बिक्री किसी बड़े हादसे को न्योता दे रही है। यदि एक्सपायरी या गलत दवा किसी मरीज को दी गई, तो इसका जिम्मेदार कौन होगा?
Author: Pramod Gupta
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