February 15, 2026 3:39 am

सोनभद्र की खदानों में नियम दफन? परमिट की परछाई, सुरक्षा पर सवाल और प्रशासन की खामोशी

सोनभद्र। खनिज संपदा से भरपूर यह जनपद एक बार फिर विवादों के केंद्र में है। अवैध खनन और कथित प्रशासनिक शिथिलता के आरोपों ने पूरे इलाके में चर्चा तेज कर दी है। ग्रामीणों की शिकायतें और सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो कई गंभीर संकेत दे रहे हैं। आरोप है कि निर्धारित लीज सीमा से बाहर उत्खनन हो रहा है और बेंचिंग (सीढ़ीनुमा कटान) जैसे अनिवार्य सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया जा रहा।

परमिट का पेच
स्थानीय स्तर पर यह चर्चा है कि बोल्डर खनन की मात्रा कम दर्शाकर अधिक परमिट जारी कराने और उनके कथित दुरुपयोग का खेल चल रहा है। कहा जा रहा है कि परमिट बर्दिया क्षेत्र के नाम पर जारी होते हैं, जबकि उपयोग कथित रूप से बिल्ली मारकुंडी क्षेत्र में किया जा रहा है। यदि जांच में यह तथ्य सही पाए जाते हैं, तो यह न केवल खनन नियमों बल्कि राजस्व व्यवस्था पर भी गंभीर प्रश्न खड़े करेगा।
बताया जा रहा है कि मामला मे.- पार्टनर अकबर अली पुत्र मजनू भाई, आरजी संख्या 941ख, बर्दिया स्थित खदान से संबंधित है। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है।

सुरक्षा बनाम उत्पादन
खनन क्षेत्र में काम करने वाले मजदूरों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। क्या बेंचिंग के मानक लागू हैं?
क्या ब्लास्टिंग से पहले निर्धारित सुरक्षा घेरा बनाया जाता है?
क्या मजदूरों को हेलमेट, मास्क और अन्य सुरक्षात्मक उपकरण दिए जाते हैं? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना वैज्ञानिक पद्धति के खनन से धंसान और हादसों का जोखिम बढ़ जाता है। ग्रामीणों ने ब्लास्टिंग के दौरान कंपन और धूल के गुबार की शिकायत की है, जिससे भय का वातावरण बना हुआ है। बेतरतीब खनन से धूल प्रदूषण, भू-क्षरण और जलस्रोतों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। पर्यावरण संरक्षण के नियमों के तहत नियंत्रित खनन, नियमित मॉनिटरिंग और पुनर्वनीकरण जैसे कदम अनिवार्य होते हैं। सवाल है- क्या इनका पालन हो रहा है?
जवाब मांगते सवाल
क्या लीज क्षेत्र की सीमाओं का डिजिटल सत्यापन कराया गया है? क्या परमिट और वास्तविक खनन स्थल का मिलान हुआ है? क्या विभागीय निरीक्षण रिपोर्ट सार्वजनिक की जाएगी? मजदूरों की सुरक्षा ऑडिट कब हुई थी?
स्थानीय मांगें
ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि:
✔ संयुक्त टीम द्वारा स्थलीय निरीक्षण कराया जाए
✔ ड्रोन सर्वे से वास्तविक सीमा की जांच हो
✔ परमिट रिकॉर्ड सार्वजनिक किए जाएं
✔ सुरक्षा और पर्यावरण मानकों की स्वतंत्र जांच कराई जाए
प्रशासन की अग्नि-परीक्षा
अब निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं।
क्या आरोपों की निष्पक्ष जांच होगी?
क्या पारदर्शिता के साथ तथ्य सामने रखे जाएंगे?
सोनभद्र की धरती खनिज संपदा से समृद्ध है- लेकिन विकास और नियमों के संतुलन के बिना यह संपदा अभिशाप भी बन सकती है।
सवाल कायम हैं, जवाब का इंतजार है।

Pramod Gupta
Author: Pramod Gupta

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