August 31, 2025 6:40 am

गोस्वामी तुलसीदास जयंती पर हुआ राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन

– तीन विभूतियों को किया गया सम्मानित
रामकथा के लोकमंगलकारी स्वरूप पर वक्ताओं ने डाली रोशनी

सोनभद्र। पूज्य गोस्वामी तुलसीदास जी महाराज की जयंती के उपलक्ष्य में गुरुवार को रामलीला मैदान स्थित सभागार में भव्य राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन हुआ। यह कार्यक्रम राष्ट्रीय संचेतना समिति और गुप्त काशी विकास परिषद के संयुक्त तत्वावधान में संपन्न हुआ, जिसमें देश के विभिन्न भागों से आए विद्वानों, साहित्यकारों व सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। कार्यक्रम की शुरुआत स्वागत भाषण से हुई जिसे काशी कथा न्यास के संस्थापक डॉ. अवधेश दीक्षित ने प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि सोनभद्र की गुप्तकाशी धरा से तुलसी जयंती की अविरल गंगा प्रवाहित हो रही है, जो सामाजिक चेतना और सांस्कृतिक समरसता को नया आयाम देगी। मुख्य अतिथि प्रो. प्रभाकर सिंह, समन्वयक, भोजपुरी अध्ययन केंद्र एवं प्रोफेसर, हिंदी विभाग, काशी हिंदू विश्वविद्यालय ने अपने वक्तव्य में कहा कि अहंकार रहित जीवन ही वास्तविक सुख की कुंजी है। तुलसीदास ने अपनी रचना ‘कवितावली’ में मुगल शासन की त्रासदी, अकाल और जनता की पीड़ा को गहराई से उकेरा है। डॉ. अभिजीत कुमार, निदेशक, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र ने कहा, तुलसीदास ने समाज के सभी वर्गों के कल्याण की बात की और रामकथा को लोकमंगल का माध्यम बनाया। डॉ. अमित कुमार पांडे, विजिटिंग फेलो, भारत अध्ययन केंद्र, बीएचयू ने कहा, तुलसीदास ने समन्वय की भावना से राम और शिव को परस्पर उपासक बताया, जिससे ज्ञान और भक्ति मार्ग में एकता का संदेश मिला। पं. आलोक चतुर्वेदी, अध्यक्ष, गुप्त काशी विकास परिषद ने तुलसीदास जी की सामाजिक समरसता पर प्रकाश डालते हुए कहा, रामचरितमानस में तुलसीदास ने छुआछूत, भेदभाव और जातिगत विषमता को तोड़ते हुए निषादराज, शबरी, भरत आदि पात्रों के माध्यम से समरसता का चित्रण किया। मुख्य वक्ता पं. पारसनाथ मिश्र, वरिष्ठ साहित्यकार व परिषद संरक्षक ने तुलसी साहित्य को लोकमंगल का विधान बताते हुए कहा, तुलसीदास की काव्यधारा में मंगल की व्यापक अवधारणा है, जिसमें शुभ, सौभाग्य, आनंद और लोककल्याण का समावेश है। उनकी रचना ‘रामचरितमानस’ वास्तव में जनजीवन की मर्यादा और मूल्यों की अभिव्यक्ति है। कार्यक्रम अध्यक्ष सत्यपाल जैन ने कहा, तुलसीदास भक्तिकाल के प्रतिनिधि कवि हैं, जिनका साहित्य लोककल्याण और सामाजिक समरसता का प्रेरणास्रोत है। कार्यक्रम का संचालन राष्ट्रीय कवि एवं भोजपुरी साहित्यकार जगदीश पंथी ने किया। उन्होंने कहा, तुलसी साहित्य जहाँ भक्ति भावना को जागृत करता है, वहीं सामाजिक चेतना का भी प्रसार करता है। संगोष्ठी के अंत में तीन विशिष्ट जनों को उनके क्षेत्रीय योगदान के लिए सम्मानित किया गया। राष्ट्रीय भोजपुरी कवि सिपाही पांडे ‘मनमौजी’ को विक्रम संवत 2082 तुलसी सम्मान, श्रीमती विमला देवी (सेवानिवृत्त शिक्षिका) को सरस्वती श्री सम्मान, अजय कुमार चतुर्वेदी ‘कक्का’ को दयाराम पांडे स्मृति सम्मान। गुप्त काशी विकास परिषद, राष्ट्रीय संचेतना समिति और काशी कथा न्यास ने संयुक्त रूप से घोषणा की कि पूरे वर्ष भर जिले में गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित ‘रामचरितमानस’ की प्रतियां वितरित की जाएंगी, ताकि लोकमंगल और सामाजिक चेतना का प्रसार हो। इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विभाग बौद्धिक प्रमुख धनंजय पाठक, नागेंद्र पाठक, सत्येंद्र तिवारी, दयाशंकर पांडे, अनूप मिश्रा, आशुतोष पांडेय, ललितेश मिश्रा, कृष्ण मुरारी गुप्ता, सतीश सिंह, विनोद चौबे, किशोरी लाल, विनय सिंह, ओमप्रकाश मिश्रा, बलराम सोनी समेत अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

Pramod Gupta
Author: Pramod Gupta

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