सोनभद्र। राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत आज मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय के सभागार में शिक्षकों के लिए एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता मुख्य चिकित्साधिकारी CMO ने की। इस अवसर पर उन्होंने शिक्षकों को संबोधित करते हुए कहा कि छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को समझना और उनकी आवश्यकताओं की पहचान करना आज की शिक्षा व्यवस्था का अहम हिस्सा है। मुख्य चिकित्साधिकारी ने कहा कि अभिभावकों के बाद शिक्षक ही बच्चों की सबसे बेहतर समझ रखते हैं, और स्कूलों में छात्रों के स्वास्थ्य एवं कल्याण को बढ़ावा देने में उनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। शिक्षक न केवल मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित शिक्षा दे सकते हैं, बल्कि समय पर समस्या की पहचान कर आवश्यक सहायता भी उपलब्ध करा सकते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि शिक्षक स्कूलों में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए विभिन्न गतिविधियों जैसे कि संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, स्वच्छता, यौन स्वास्थ्य और तनाव प्रबंधन से जुड़ी शैक्षिक पहल कर सकते हैं, जिससे बच्चों की क्षमतावर्धन और कौशल विकास सुनिश्चित हो सके। इस दौरान उन्होंने केंद्र सरकार द्वारा संचालित टेली-मानस हेल्पलाइन नंबर 14416 (टोल-फ्री, 24×7) की जानकारी भी दी। यह सेवा मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं जैसे- निराशा, नींद न आना, आत्मघाती विचार, नशे की लत, तनाव, एकाग्रता की कमी, चिड़चिड़ापन आदि के लिए प्रशिक्षित परामर्शदाताओं द्वारा नि:शुल्क सहायता प्रदान करती है। कार्यक्रम में अपर मुख्य चिकित्साधिकारी एवं नोडल अधिकारी डॉ. गुलाब शंकर यादव ने शिक्षकों को मानसिक स्वास्थ्य के महत्व, तनाव प्रबंधन और छात्रों से प्रभावी संवाद की तकनीकों पर विशेष रूप से मार्गदर्शन दिया। उन्होंने शिक्षकों को छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए व्यवहारिक रणनीतियाँ भी सिखाईं। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में जनपद के विभिन्न माध्यमिक विद्यालयों से आए कुल 24 शिक्षकों ने सहभागिता की और मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता की दिशा में एक नई समझ विकसित की।

Author: Pramod Gupta
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