बीजपुर(विनोद गुप्त)थाना अंतर्गत रविवार को मोहर्रम के अवसर पर जगह जगह जुलूस के साथ ताजिए निकाले गए।इस अवसर पर बीजपुर राजों खम्हरिया जरहा में ताजिया जुलूस निकाला गया।जुलूस के दौरान मुस्लिम समुदाय के लोगों ने लाठी डंडे से हैरतअंगेज करब दिखाए तथा मातम मनाते हुए ताजिया को एनटीपीसी स्वागत द्वार तक लेगए।इस अवसर पर हिन्दू मुस्लिम समुदाय के काफी लोग तजियादारो के साथ मौजूद थे। इस दौरान लोगों ने दुआएं मांगी
और ताजिया नूरिया मोहल्ले से होते श्रीराम चौक से मोटर गैराज व स्वागत द्वार के बाद कर्बला में समापन हुआ। मुस्लिम समुदाय के लोगों ने बताया कि हजरत इमाम हुसैन को शहीद करने के बाद उनकी लाश के सिर को एक नेजे पर रखकर कर्बला के मैदान से दमिश्क की तरफ यजीद को भेजा गया था। पैगंबर मोहम्मद साहब के नवासे इमाम हुसैन को भूखा व प्यासा रख कर शहीद किया गया था।यजीद ने विरासत पाने की खातिर इस्लाम के उसूलों को मिटाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। इमाम हुसैन ने अपनी शहादत देकर इस्लाम के उसूलों को जिंदा रखा।कर्बला की लड़ाई हकीकत में सच और झूठ की लड़ाई थी।इस्लाम को मानने वाले बहुसंख्यक लोग मोहम्मद साहब के नवासे अली के बेटे और फातिमा के जिगर के टुकड़े इमाम हुसैन के साथ थे। अय्याश और जालिम बादशाह यजीद ने कबिले फाजी व माली ताकत के बल पर बादशाहत हासिल की थी
। इमाम हुसैन की शहादत हुई यह शहादत केवल इस्लाम की नहीं बल्कि पूरी इंसानियत के लिए थी।उस अवसर पर सुरक्षा के मद्देनजर प्रभारी निरीक्षक अखिलेश मिश्रा भारी संख्या में पुलिस बल के साथ मौजूद थे।इस मौके पर गुलशने रजा कमेटी के सदर हाजी खलील,सेक्टरी मुख्तार अंसारी,मिरहसन,मुमताज,मंसूर आलम,रियाजउद्दीन,बबलु,
रहमत,इरशाद,अलाउद्दीन अंसारी,मुस्तकीम,नसीम अख्तर,गोल्डन,मंजुर,अफसरा मास्टर,आलम,जुनैद,इजहार ग्यासुद्दीन,शगीर,अफताब, इस्तियाक कुरैशी,के साथ काफी संख्या में लोग मौजूद थे।
