August 31, 2025 4:27 pm

मेगा चौपाल बना मज़ाक! डीएम साहब नहीं आए, लेकिन चमक उठा गांव

जानिए जनता क्यों दे रही है धन्यवाद 

DM के दौरे की आहट से रातों रात सज-धज गया बोदलपुर गांव, लेकिन फरियादी रह गए खाली हाथ

नौगढ़ चन्दौली
तहसील के बोदलपुर गांव में मेगा चौपाल केनाम पर जो हुआ, वह व्यवस्थाओं की पोल खोलने के लिए काफी है। जिलाधिकारी चंद्र मोहन गर्ग के आगमन की भनक भर से अफसरों में इतनी खलबली मची कि रातभर रंगाई-पुताई, बिजली वायरिंग, बोर्ड लगाने, शौचालयों की सफाई तक चलती रही। स्कूल, पंचायत भवन, सामुदायिक शौचालय—सब कुछ चमकाया गया। लेकिन चौपाल के दिन साहब का आगमन ही रद्द हो गया। सबसे बड़ा सवाल ये है कि क्या विकास सिर्फ साहबों की आंखों का दिखावा बनकर रह गया है?

*कागज़ी कामों में सब कुछ दुरुस्त, ज़मीन पर हकीकत उलट*

आपको बता दें कि मनरेगा योजना के तहत कराए गए कामों में पहले सीआईबी बोर्ड तक नहीं लगे थे। लेकिन जिलाधिकारी के आने की सूचना के बाद आनन-फानन में बोर्ड टांग दिए गए। साफ-सफाई के लिए एक दर्जन सफाईकर्मी तैनात कर दिए गए, मानो गांव में पहली बार कोई बड़ा आयोजन हो रहा हो।

*जिलाधिकारी को लोग दे रहे हैं धन्यवाद*
जिलाधिकारी साहब का कार्यक्रम निरस्त हुआ तो, लोगों को थोड़ी निराशा जरूर हुई। खासकर उन फरियादियों को जो अपनी समस्याएं लेकर आए थे। दिलचस्प बात यह रही कि जिलाधिकारी के नहीं आने के बावजूद गांव के लोगों में रोष नहीं था, बल्कि वह उन्हें धन्यवाद दे रहे थे। वजह याद थी कि उनके संभावित दौरे ही ग्राम पंचायत में विकास कार्यों की झलक देखने को मिली।

बताया जा रहा है कि सटे गांव मरवटिया में भी हड़कंप मचा रहा। साहब वहां नहीं गए, फिर भी सामुदायिक शौचालय की सफाई से लेकर दीवारों की मरम्मत तक कर दी गई। सवाल ये उठता है कि क्या अधिकारी सिर्फ अपने आकाओं को दिखाने के लिए काम करते हैं? क्या जनता की समस्याओं की कोई अहमियत नहीं?

*अंत में औपचारिकता निभाकर लौट गए कुछ अधिकारी*

शाम 4 बजने के बाद भी जब जिलाधिकारी नहीं आए, तो बाकी अफसरों ने भी चौपाल से किनारा कर लिया। कुछ देर बाद एसडीएम आलोक कुमार, डीपीआरओ, डीसी मनरेगा और खंड विकास अधिकारी पहुंचे जरूर, लेकिन तब तक अधिकतर ग्रामीण लौट चुके थे। ऐसे में यह पूरी चौपाल एक मज़ाक से ज्यादा कुछ नहीं रह गई। गांव वालों का कहना था कि यदि इसी तरह जिलाधिकारी का ऐसा दौरा तय हो जाए, तो विकास के काम अपने आप होते रहेंगे। एक ग्रामीण में हंसते हुए कहा, सब तो नहीं आए, लेकिन उनकी आहट ने गांव को नहा- धुलवा दिया।

*ग्रामीणों की पीड़ा, कटाक्ष में छलकता गुस्सा*
गांववालों ने तंज कसते हुए कहा, “साहब तो नहीं आए, लेकिन उनके डर से गांव जरूर चमक गया। अगर रोज़ ऐसा डर बना रहे तो अफसर शायद काम करने लगें।”

Pramod Gupta
Author: Pramod Gupta

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