August 30, 2025 12:33 pm

राम कथा का छठवां दिन: श्रीराम के आदर्शों की गूंज से गूंजा पंडाल

नौगढ़, चंदौली कोइलरवां हनुमान मंदिर परिसर में, शुक्रवार को– श्रीराम कथा के पांचवें दिन का शुभारंभ भक्तिमय वातावरण में हुआ, जहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। कथा व्यास मानस किंकर मुनि जी ने आज के प्रवचन में सीता स्वयंवर और राजा दशरथ द्वारा अयोध्या से बारात लेकर जनकपुर पहुंचने के प्रसंगों का मार्मिक वर्णन किया, जिससे समूचा पंडाल भक्तिरस से सराबोर हो गया।

सीता स्वयंवर का दिव्य प्रसंग:

मानस किंकर मुनि जी ने बताया कि राजा जनक ने अपनी पुत्री सीता के लिए शिवधनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाने की कठिन परीक्षा रखी थी। अनेक राजकुमार इस चुनौती में असफल रहे। तब गुरु विश्वामित्र की आज्ञा से श्रीराम ने सहजता से धनुष उठाकर उसे तोड़ दिया, जिससे समूचा जनकपुर श्रीराम के जयकारों से गूंज उठा। इस अद्भुत घटना के पश्चात माता सीता ने श्रीराम को वरमाला पहनाई, और समस्त देवताओं ने पुष्पवर्षा कर इस पावन मिलन का उत्सव मनाया।

राजा दशरथ की जनकपुर आगमन:

इसके बाद, मानस किंकर मुनि जी ने वर्णन किया कि कैसे राजा दशरथ अपने पुत्रों की बारात लेकर अयोध्या से जनकपुर पहुंचे। जनकपुर में उनका भव्य स्वागत किया गया। राजा जनक और महाराज दशरथ के बीच आत्मीय संवाद हुआ, जिसमें दोनों राजाओं ने अपने-अपने हर्ष और संतोष को व्यक्त किया। इस मिलन से दोनों राजवंशों के बीच घनिष्ठ संबंध स्थापित हुए।

भव्य झांकियां और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां:

कथा के दौरान, सीता स्वयंवर और राम-सीता विवाह की जीवंत झांकियां प्रस्तुत की गईं, जिन्हें देखकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे। कलाकारों ने अपने उत्कृष्ट अभिनय से उन दिव्य पलों को सजीव कर दिया, जिससे उपस्थित भक्तों ने अपने को त्रेतायुग में उपस्थित पाया। इसके अतिरिक्त, स्थानीय कलाकारों द्वारा भक्ति संगीत और नृत्य प्रस्तुतियां भी दी गईं, जिन्होंने वातावरण को और भी भक्तिमय बना दिया।

श्रद्धालुओं की सहभागिता:

कथा स्थल पर सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे, जिन्होंने गहरी श्रद्धा और भक्ति के साथ प्रवचनों का श्रवण किया। भक्तों ने मानस किंकर मुनि जी के प्रवचनों की सराहना करते हुए कहा कि उनके शब्द सीधे हृदय में उतरते हैं और जीवन को नई दिशा प्रदान करते हैं। कई भक्तों ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि कैसे इस कथा से उन्हें अपने जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने की प्रेरणा मिली है।

आयोजन समिति की तैयारियां और विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति:

आयोजन समिति के सदस्यों ने बताया कि कथा के सफल संचालन के लिए व्यापक तैयारियां की गई हैं। सुरक्षा, स्वच्छता और व्यवस्था का विशेष ध्यान रखा गया है ताकि सभी श्रद्धालु बिना किसी असुविधा के कथा का आनंद ले सकें। समिति ने यह भी घोषणा की कि आगामी दिनों में राम-भरत मिलाप, वनगमन, और लंका विजय जैसे महत्वपूर्ण प्रसंगों का वर्णन किया जाएगा।

इस अवसर पर पूर्व विधायक शिव तपस्या पासवान, ग्राम प्रधान यशवंत सिंह यादव, तथा समिति के सदस्य राम प्रकाश यादव, गोविंद कृष्ण मुरारी, नगीना केसरी, नितेश यादव, और मिथिलेश की गरिमामयी उपस्थिति रही। इन सभी ने आयोजन की सफलता में महत्वपूर्ण योगदान दिया और श्रद्धालुओं के साथ मिलकर कथा का श्रवण किया।

मानस किंकर मुनि जी का संदेश:

अपने प्रवचन के अंत में मानस किंकर मुनि जी ने कहा, “श्रीराम का जीवन हमें सिखाता है कि सत्य, धर्म और कर्तव्य के मार्ग पर चलना ही सच्ची मानवता है। हमें उनके आदर्शों को अपने जीवन में अपनाकर समाज में प्रेम, सद्भाव और न्याय की स्थापना करनी चाहिए।”

समापन:

कथा के समापन पर सभी श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया। भक्तों ने इस आध्यात्मिक अनुष्ठान के लिए आयोजन समिति, मानस किंकर मुनि जी, और विशिष्ट अतिथियों का आभार व्यक्त किया। समूचा वातावरण भक्तिरस से ओत-प्रोत रहा, और श्रद्धालु अगले दिन की कथा का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।

Pramod Gupta
Author: Pramod Gupta

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