– रेणुका सूख गई उदास है खेबन्दा घाट
सोनभद्र। मानव सभ्यता का नदियों के तट पर विकास हुआ। सिंधु घाटी की सभ्यता और जीव जंतुओं के जीवन का आधार भी यह नदियां ही हैं। प्राचीन ग्रन्थों में नदियों का सदैव गौरवगान किया गया है।
यूपी सरकार में मत्स्य विभाग के मंत्री डॉ संजय कुमार निषाद के आवाह्न पर निषाद समाज रेणुका नदी में मछलियों का बीज डालकर इको लॉजिकल सिस्टम को मजबूत करने हेतु भगीरथ यत्न कर रहा है। वहीं एस के बॉयो रेणु नदी से जलीय जीव जंतुओं का सफाया कर रहा है। जहाँ एक ओर मंत्री संजय निषाद मत्स्य उत्पादन में प्रदेश को देश में नम्बर वन बनाने हेतु कृत संकल्पित हैं। वहीं दूसरी ओर एस के बॉयो कम्पनी रेणुका नदी को मछली विहीन बनाने पर आमादा है। मत्स्य उत्पादन को बढ़ावा देने एवं मछुआरा समाज के उत्थान हेतु सूबे की योगी सरकार ने मंत्रिमंडल में मत्स्य विभाग को अलग विभाग बना दिया।
इसके बाद भी योगी सरकार के मंसूबे को पलीता लगा रही है एसके बॉयो कम्पनी। खनिज विभाग योगीजी के पास है और यही विभाग धरातल पर मत्स्य विभाग की तेरहिं करने पर आमादा है। खेबन्दा बालू साइड पर एस के बॉयो कम्पनी को रेणुका नदी के तट पर मौरंग खनन का पट्टा शासन से आवंटित हुआ है। कम्पनी ने बाकायदा हलफनामा देकर निर्धारित नियमों का पालन करने की शपथ ली थी। परंतु पट्टा आवंटित होते ही कम्पनी ने नियमों की बखिया उधेडनी शुरू कर दी। नदी से बालू निकालने के लिए कम्पनी ने नौकाबोट पंपिंग सेट लगाकर पानी खींचने का काम किया। दर्जनों हिउम पाईप लगाकर नदी के बीच में रास्ता बना दिया गया। पूरी तरह से नदी की जलधारा को रोक दिया गया। इसके चलते जलीय जीव जंतुओं पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। अवैध खनन के चलते रेणु नदी तिल तिल मर रही है। इस पर भी खनिज विभाग मूकदर्शक बना हुआ है। दिन रात पोकलेन मशीनें नदी का सीना चाक कर रही हैं। अवैध खनन के चलते बार बार एसके बॉयो कंपनी पर सम्बंधित विभाग के द्वारा पेनाल्टी अधिरोपन के पश्चात निर्धारित शर्तो के साथ खनन करने की छूट दी जाती है। परन्तु इसके बाद भी कंपनी के द्वारा नियमों को ताक पर रखकर खनन किया जा रहा है। कंपनी का हौसला इतना बुलन्द है कि बलपूर्वक पत्रकारों को बालू साइड पर मीडिया कवरेज से रोका जाता है। यही नहीं सत्तारूढ़ पार्टी का भय दिखाकर साइड पर मनबढ़ लोगों द्वारा खबर छापने पर फर्जी मुकदमों में फ़साने की भी धमकी दी गई। अवैध खनन के खेल में सिस्टम पूरी तरह फेल है। समय की शिला पर खड़ी जनता सोच रही है कि अब कैसे चलेगा कानून का राज़। एसके बॉयो कंपनी की इन करतूतों के विरुद्ध नेताओं ने शासन प्रशासन से शिकायत भी की। परन्तु लगाम विहीन कंपनी खनन के नाम पर नदी के अस्तित्व को धरा से मिटाने पर आतुर है। राज्य से लेकर केंद्र में भारतीय जनता पार्टी सत्तारूढ़ है। वह भारतीय जनता पार्टी जो अपने आपको सनातन धर्म एवं संस्कृति का संरक्षक मानती है। आज उसी भारतीय जनता पार्टी की सरकार में देवी रेणुका को मौत के घाट उतारा जा रहा है।
अवैध खनन के चलते नदियों का अमृत जल प्राण हरित विष बन गया है। रेणुका की किवदंतियों को महाभारत, हरिवंश और भागवत पुराण में निहित किया गया है। रेणुका अथवा रेणु को येल्लम्मा भी कहा जाता है। येल्लम्मा देवी मंदिर कर्नाटक में प्रमुख शक्ति पीठों में से एक है। विष्णु के छठे अवतार परशुराम की माता देवी रेणु का विवाह जमदाग्नि ऋषि के साथ हुआ था। देवी रेणुका ने मानव कल्याण के लिए पति के हाथों अपने जीवन का बलिदान कर दिया था। आज वही मानव आर्थिक लोभ के चलते सनातन धर्म एवं संस्कृति की अधिष्ठात्री देवी रेणुका को दुनिया के नक्शे से मिटाने पर आमादा है। भारत के सबसे अमीर मुकेश अंबानी परिवार हर साल हैदराबाद में स्थित सुप्रसिद्ध रेणुका येलम्मा थल्ली मंदिर में देवी का आशीर्वाद हासिल करने आता है। एक ओर अम्बानी परिवार देवी पर अपना सबकुछ कुर्बान करने के लिए तैयार है। तो वहीं दूसरी ओर कुछ लोग अम्बानी बनने की चाह में खनन के नाम पर देवी रेणुका की हस्ती को दुनिया से मिटा देना चाहते हैं। हैदराबाद के बालकम्पेट येलम्मा मंदिर परिसर में एक कुआं है जिसका पानी पीने से हर साल लाखों श्रद्धालुओं को मानसिक रोग,चर्म और उदर रोग से मुक्ति मिल जाती है। पौराणिक कथाओं के मुताबिक रेणुका नदी का जल भी पहले लोगों को शिफा प्रदान करता था। परंतु पापियों का पाप धोते धोते जीवनदायिनी रेणुका नदी प्रदूषित होकर अमृतरूपा नहीं रह गई। महाराष्ट्र के माहुर में देवी रेणुका का मंदिर शक्ति पीठों में से एक है। उत्तरांचल, हिमाचल और तमिलनाडु में भी देवी रेणुका का मंदिर शक्ति पीठ के रूप में स्थापित मानव जीवन में नव चेतना का संचार कर रहा है। इसके बाद भी तरक्की के नाम पर सिस्टम के द्वारा रेणुका नदी के अस्तित्व से खिलवाड़ किया जा रहा है। मार्कण्डेय ऋषि के तप से प्रवाहित होने वाली रेणुका नदी बिजुल के साथ गोठानी नामक स्थान पर स्वंय को सोन नदी में समाहित कर लेती है। आज भी रेणुका नदी के किनारे अनेक प्राचीन मंदिरों के भग्नावशेष महान सनातन धर्म एवं सभ्यता का जीता जागता दस्तावेज है। जिसे सिस्टम तरक्की के नाम पर मिटाने पर आमादा है। खनन के ठेकेदारों की कारस्तानी के चलते सनातन धर्म एवं संस्कृति के अस्तित्व पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। ऐसे में तमाम सामाजिक संगठनों ने अब विरोध जताना शुरू कर दिया है। भारतीय जनता युवा मोर्चा के जिला महामंत्री एवं नामचीन समाजसेवी विनय श्रीवास्तव ने कहा कि रेणुका नदी में बेतरतीब अवैध खनन को किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। जीवनदायिनी देवी रेणुका सनातन धर्म एवं संस्कृति का आधार स्तंभ हैं। सनातन धर्म एवं संस्कृति से खिलवाड़ करने की इजाज़त किसी को भी नहीं दी जा सकती। विनय श्रीवास्तव ने इसके लिए लिखा पढ़ी करने और आवश्यकता पड़ने पर विधि सम्मत धरना प्रदर्शन करने की बात कही। एसके बॉयो कम्पनी द्वारा किये जा रहे अवैध खनन पर जिला खनिज प्रभारी सोनभद्र ने कहा कि जांच की जा रही है जांचोपरांत उचित कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। अब देखना यह है कि खनन परमिट के नाम पर नदी के इकोलॉजिकल सिस्टम को यूं ही ब्रेक किया जाता रहेगा या इस पर ज़िम्मेदार विभागों द्वारा अंकुश भी लगाया जायेगा। मंत्री से लेकर संतरी तक व नीचे से लेकर ऊपर तक सभी गाँधीजी की भक्ति में रमे हुए हैं। खैर मुफ़्त का चंदन घिस मेरे लल्लू। प्रकृति का बेतरतीब अंधाधुंध दोहन करता इंसान तरक़्क़ी की चाह में विनाशलीला को आमंत्रित कर रहा है।
अंत में एक शेर बस बात ख़त्म, एक ही उल्लू काफी है बर्बाद गुलिस्तां करने को। हर शाख पे उल्लू बैठे हैं, अंजाम ए गुलिस्तां क्या होगा।

Author: Pramod Gupta
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