April 3, 2025 2:06 pm

शिक्षा विभाग में आडिट के जिन्न से अध्यापक खिन्न

सोनभद्र। शिक्षा विभाग में बीएसए का वैधानिक आडिट के नाम से जारी एक नया फरमान जिले में अब चर्चा का विषय बना हुआ है बार बार आडिट के जिन्न से अध्यापक खिन्न और क्रुद्ध हैं।हालांकि उक्त आदेश को हर बार की तरह उच्चाधिकारियों का आदेश बता कर प्रधानाध्यापकों पर थोपा गया है।आडिट के नाम पर होने वाले तमाम खर्चे और परेशानियों को ले कर शिक्षकों में चर्चा परिचर्चा और काना फुसी भी होने लगी है।बीते नवंबर माह से मार्च तक में बीएसए द्वारा किए गए तीसरे आडिट से शिक्षकों में रोज रोज आडिट कराने के कारण आक्रोश भी देखा जा रहा है।गौरतलब हो कि विद्यालयों में शासन द्वारा एसएमसी और एमडीएम इन दो मदो में हर साल सरकार द्वारा लाखों रुपए भेजा जाता है जिसे शासन के दिशा निर्देश के अनुसार खर्च कर आडिट कराना होता है।आडिट का खर्च सरकार को वहन करना होता है लेकिन आडिट कराने में शिक्षकों को एबीएसए के बीआरसी कार्यालय का चक्कर लगाने में बार बार अनावश्यक खर्च और परेशानियों का सामना करना पड़ता है इससे बच्चों की पढ़ाई और शिक्षण कार्य भी बाधित होता है।बीएसए सोनभद्र के आडिट आदेशों पर गौर करे तो उनके द्वारा इस साल पहला ऑडिट 4 नवंबर को दूसरा आडिट 10 फरवरी को और तीसरा ऑडिट 3 मार्च को दिया गया तीन महीने में तीन आडिट मतलब अब साफ है काम कम आडिट ज्यादा कराना होगा इससे अब यह समझ में आने लगा है कि स्कूलों में मानक के अनुरूप बर्तन और खेलकूद के सामान क्यों नहीं उपलब्ध हो पा रहे हैं जब जीएसटी 28% लगता ही है ऊपर से तीन तीन बार आडिट के बेवजह खर्चे से स्कूलों में काम कराने के लिए जब धन बच ही नहीं रहा है तो स्कूलों में काम न होने पर कारवाई की तलवार निर्दोष प्रधानाध्यापकों के गर्दन पर हमेशा लटकी ही रहेगी और बीईओ संकुल शिक्षकों के माध्यम से रौब गांठते ही रहेगें।

Pramod Gupta
Author: Pramod Gupta

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