सोनभद्र। शिकायकर्ता निर्भय चौधरी सामाजिक कार्यकर्ता ने बताया कि ग्राम ब्रह्मोरी परगना अगोरी तहसील ओबरा में तीन बालू/मोरम खनन पट्टा जो मेसर्स वर्धमान, इण्डो फार्मा एवं मास्टर जेनी के नाम से खनन पट्टा स्वीकृत है। उक्त खनन पट्टा स्थल जो पट्टेधारकों द्वारा ग्राम हर्रा के वनभूमि के क्षेत्र में अवैध रूप से ट्रकों के आवागमन हेतु बगैर परमिट हजारों ट्रक बोल्डर पत्थर ले जाकर अवैध निर्माण कर रहे है जिससे राज्य सरकर की छवि धूमिल हो रही है। जिस निर्माण को भौतिक रूप से देखा जा सकता है। बताते चले कि उक्त खनन पट्टा स्वीकृत स्थल पर जाने के लिए ग्राम पटक्ध से सड़क है लेकिन स्थानीय कर्मचारियों को अवैध धन देकर (एन०जी०टी०) के नियमों के विरूद्ध विपरीत दिशा से नदी तल के मध्य तक नदी की धारा को रोकते हुए वाहनों को आवागमन हेतु अवैध निर्माण कर रहे है। आम जनमानस द्वारा शिकायत करने पर उक्त खनन पट्टों के संचालन प्रतिनिधि द्वारा आम जनमानस को फर्जी मुकदमों में फंसाने की धमकी देते हैं। खनन पट्टेधारक प्रतिनिधियों द्वारा कहा जाता है कि उच्चाधिकारियों द्वारा उक्त पटटों के संचालन हेतु अवैध धन लाखों रूपये प्रतिमाह के रूप में दिया जाता है जिसको जहां शिकायत करना है वो करता रहे। उक्त खनन पट्टाधारकों द्वारा अवैध खनन का ट्रकों पर तय मानक घन फीट/टन से अधिक बालू लोड कर परिवहन कराया जा रहा है। जिससे राज्य सरकार को भी करोडों रूपये की क्षति हो रही है।
जिससे उक्त खनन पट्टों पर एन०जी०टी० के नियमों को ताक पर रखकर अवैध रूप से पोकलेन के द्वारा नदी तल के मध्य से लगभग 30-40 फीट नीचे गहराई खनन किया जा रहा है। जिससे कछुआ व घडियाल और मगरमच्छ इत्यादि जलीय जन्तु को जान की क्षति हो रही है। बताते चले कि नदी के मध्य में व ग्राम हर्रा की वन भूमि में अवैध रास्ते का निर्माण कर रहे है। जो कैमूर वन्य जीव बिहार सेन्चुरी क्षेत्र के नियम व कायदों का खुल्लम खुल्ला उल्लंघन है। ऐसी स्थिति में बताए तथ्यों को दृष्टिगत रखते हुए उक्त तीनों खनन क्षेत्रों का भौतिक रूप से जांच कर कार्यवाही जनहित में व आम जनमानस के स्वास्थ्य हित व पर्यावरणीय संरक्षण के लिए कार्यवाही किया जाना आवश्यक है। अब देखना यह है कि जिला प्रशासन इस पर क्या कार्रवाई करता है।

Author: Pramod Gupta
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