सोनभद्र (समर सैम) रॉबर्ट्सगंज लोकसभा सीट अनुसूचित जाति के लिए रिज़र्व है। इसी सुरक्षित सीट से सपा उम्मीदवार कुँवर छोटेलाल खरवार ने भाजपा समर्थित अपना दल एस के प्रत्याशी रिंकी कोल को पराजित कर विजय श्री हासिल की थी। रिंकी कोल मिर्जापुर छानबे विधानसभा सीट से विधायक हैं। उनके ससुर पकौड़ी लाल कोल रॉबर्ट्सगंज लोकसभा सीट से सांसद थे। पकौड़ी कोल का टिकट काटकर रिंकी कोल को चुनाव मैदान में उतार दिया गया था। जिसके चलते परिवार में ही रिंकी कोल को भितरघात का सामना करना पड़ा। वहीं इस चुनाव में भाजपाइयों ने भी उदासीनता का परिचय दिया। जिसका परिणाम यह रहा कि कुँवर छोटे लाल खरवार ने शानदार जीत दर्ज़ की। कुँवर छोटे लाल की जीतके बाद रिंकी कोल ने जाति प्रमाणपत्र को लेकर शासन प्रशासन से लेकर हाईकोर्ट तक का दरवाज़ा खटखटाया। इसके लिए कोर्ट ने नोटिस भी जारी किया। दरअसल सारा माजरा खरवार जाति को लेकर है। जहाँ चंदौली जिले में खरवार जाति अनुसूचित जाति की श्रेणी में शामिल है। वहीं सोनभद्र जिले में खरवार अनुसूचित जनजाति की श्रेणी में शामिल है। कुँवर छोटे लाल खरवार पहली बार जब रॉबर्ट्सगंज लोकसभा सीट से सांसद निर्वाचित हुए तो उन्होंने अपने मूल जिला चंदौली से जारी जाति प्रमाणपत्र और अन्य डाकुमेंट लगाया था। क्योंकि वह मूलरूप से चंदौली जिले के रहने वाले हैं। सांसद रहते उन्होंने रॉबर्ट्सगंज के मुसही गाँव में अपना घर बना लिया। वहीं से वह लोकसभा रॉबर्ट्सगंज की जनता की समस्याओं का निराकरण करते रहे हैं। दूसरी बार जब वह लोकसभा सदस्य निर्वाचित हुए तो उनके ऊपर यह इल्ज़ाम लगा कि उन्होंने सोनभद्र में मतदाता सूची में अपना नाम और मूल पता दर्ज करा लिया है। नामांकन के दौरान ही इंद्रजीत नामक व्यक्ति ने कुँवर छोटेलाल खरवार के नामांकन को रद करने के लिए जिला निर्वाचन अधिकारी से शिकायत की। जब छोटेलाल खरवार चुनाव जीत गए तब इंद्रजीत ने हाईकोर्ट का दरवाज़ा खट खटाया। हाईकोर्ट में याचिका दायर करते हुए इंद्रजीत ने डीएम सोनभद्र और डीएम चंदौली को फर्जी जाति प्रमाणपत्र मामले में पछकार बनाया। इंद्रजीत की याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायाधीश विपिन चन्द्र दिच्छित एवं न्यायाधीश शेखर बी सर्राफ़ ने डीएम चंदौली को आदेशित करते हुए दस हफ्ते में फैसला लेने को कहा है। इस केस में इंद्रजीत की तरफ से जाने माने बैरिस्टर अभिषेक चौबे थे। जिन्होंने पुर ज़ोर तरीके से बेंच के सामने तथ्यों सहित इस मुद्दे को रखा। बैरिस्टर अभिषेक चौबे की दमदार तथ्यपरक दलील सुनने के बाद दो जजों की बेंच ने यह फैसला सुनाया। नामचीन बैरिस्टर अभिषेक चौबे पहले भी जनहित के मुद्दे पर जिले में हो रहे बेहताशा प्रदूषण और अवैध खनन पर एनजीटी और सुप्रीम कोर्ट में सफल पैरवी करते हुए दोषियों पर करोड़ों रुपये का जुर्माना लगवा चुके हैं। फ़िलहाल रॉबर्ट्सगंज के सांसद कुँवर छोटेलाल के जाति प्रमाणपत्र को लेकर गेंद डीएम चंदौली के पाले में है। अब डीएम चंदौली को इस पर फाइनल डिसीज़न लेना है। क्योंकि छोटेलाल खरवार का जाति प्रमाणपत्र चंदौली से जारी हुआ है। छोटेलाल खरवार चंदौली के मूल निवासी हैं। पहली बार जब वह सांसद बने तभी वह आकर सोनभद्र में बसे। देखा जाये तो छोटेलाल खरवार का जाति प्रमाणपत्र सही है। इस हिसाब से वह चुनाव लड़ने के योग्य भी हैं। फर्जी जाति प्रमाणपत्र का प्रकरण कहीं से उचित नहीं लगता। यह बात हो सकती है कि छोटेलाल खरवार ने सोनभद्र में मतदाता सूचि में अपना नाम और पता जो दर्ज कराया है, वह अनुचित कदम है। इस बिंदु पर कुँवर छोटेलाल खरवार के खिलाफ आपराधिक मुकदमें क़ायम हो सकते हैं। फिलहाल समय की शिला पर खड़ी जनता सोंच रही है कि सही फैसला होगा या शासन सत्ता के दबाव में सांसद कुँवर छोटेलाल खरवार को थर्ड अंपायर द्वारा हिट विकेट करार दिया जाएगा। खैर यह तो आने वाला समय ही बतायेगा कि सपा की एक सीट कम होगी या नहीं।

Author: Pramod Gupta
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