September 1, 2025 3:50 am

भाकपा, माकपा व माले ने संयुक्त रूप से फिलिस्तीन के समर्थन में और इजराइल द्वारा जारी जनसंहार के खिलाफ राष्ट्रीय एकजुटता दिखाते हुए कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन कर सौंपा ज्ञापन।

सोनभद्र, सोमवार को भाकपा, माकपा और माले ने संयुक्त रूप से फिलिस्तीन के समर्थन में और इजराइल द्वारा जारी नरसंहार के विरोध में व भारत द्वारा इजराइल को हथियार देने के विरोध में कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन किया और राष्ट्रपति को संबोधित पत्र एडीएम को सौंपा।

जहां कम्युनिस्ट नेताओं ने कहा कि भारत के वामपंथी व जनवादी दल फिलिस्तीन और इजराइल के बीच जारी युद्ध और उसके दिनों- दिन होते जाने पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हैं और तत्काल इस जनसंहार पर रोक लगाने की मांग करते हैं और कहा कि विस्तार में गए बगैर केवल इतना कहना पर्याप्त है कि इजराइल, संयुक्त राष्ट्र संघ में पास प्रस्तावों चाहे स्वतंत्र फिलिस्तीनी राष्ट्र के निर्माण और फिलिस्तीनियों के ऊपर हो रहे हमले को तुरंत रोक देने का हो, निरंतर अवहेलना कर रहा है। ज्ञातव्य है कि इजराइल की तमाम सैन्य कार्रवाई का पूरा समर्थन अमेरिका और पश्चिमी देश कर रहे है। जबकि वहां के युवक- युवतियां, बुद्धिजीवी और आम नागरिक इस युद्ध के विरूद्ध बड़े संवाद और प्रदर्शन का आयोजन कर रहे हैं। लेकिन पश्चिम देशों का शासक वर्ग तेल खदानों और ऊर्जा के स्रोतों पर कब्जा करके मुनाफा कमाने के लिए पूरे पश्चिम एशिया को युद्ध में ढकेल रहा है। फिलिस्तीन से उठी लड़ाई लेबनान, यमन होते हुए ईरान के दरवाजे पर दस्तक दे रही है। इस पर तत्काल रोक लगनी चाहिए यही संयुक्त राष्ट्र संघ के प्रस्तावों की मंशा है और विश्व जनमत भी यही चाहता है। वामपंथी नेताओं ने कहा कि यह दुखद है कि केन्द्र में मोदी की अगुवाई में चल रही एनडीए सरकार अपनी गलत राजनीतिक रणनीति की समझ और कारपोरेट घरानों के मुनाफे के लिए अपनी जनता के हितों के विरूद्ध खड़ी होकर छुपकर और खुले तौर पर इजराइली सैन्यवाद और जनसंहार का समर्थन कर रही है। यह नोट किया जाना चाहिए कि अगर पश्चिम एशिया में युद्ध लम्बा खिंचेगा तो आम नागरिकों की जिदंगी महंगाई व बेकारी से और त्रस्त हो जायेगी।
कम्युनिस्ट नेताओं ने कहा देश हित में हम भारत सरकार से मांग करते है कि वह संयुक्त राष्ट्र संघ में इजराइल के खिलाफ आए प्रस्ताव से पीछे न हटे जैसा कि पिछले 18 सितम्बर 2024 को इजराइल के खिलाफ आए प्रस्ताव से वह पीछे हटी थी। युद्ध के लिए भारतीय भूमि का उपयोग तथा इजराइल के लिए हथियारों की सप्लाई पर तत्काल रोक लगाए। भारत अपनी अजमाई विदेश नीति के अनुरूप कार्य करें और पश्चिम एशिया में शांति बहाल हो इसके लिए कूटनीतिक व राजनीतिक प्रयास चलाए।

भाकपा, माकपा और माले के द्वारा संयुक्त रूप से राष्ट्रपति को संबोधित पत्र को एडीएम (नमामि गंगे) ने मौके पर पंहुच कर लिया।
इस अवसर भाकपा के जिला सचिव कामरेड आर के शर्मा, माकपा के जिला मंत्री कामरेड नन्द लाल आर्या, माले के बाबूलाल भारती, भाकपा के पूर्व जिला सचिव कामरेड रामरक्षा, कामरेड अमर नाथ सूर्य, कामरेड, बसावन गुप्ता, हनुमान प्रसाद, पुरषोत्तम, विरेन्द्र गोंड, सूरज वंसल , बाबूलाल चेरो, सुनील सोनी, गौरी शंकर व विरेन्द्र सिंह गोंड़ आदि मौजूद रहे।

Pramod Gupta
Author: Pramod Gupta

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