विनोद गुप्ता (बीजपुर)
एक सौ एक कहानियों का गुलदस्ता है “राम कहानी”
बीजपुर (सोनभद्र)/ गाजियाबाद श्रीराम जन्मभूमि अयोध्या में 22 जनवरी 2024 को बाल रूप प्रभु श्रीराम जी के प्राणप्रतिष्ठा को लेकर विश्व भर के हिन्दुस्तानियों में गजब का उत्साह है। ऐसी आस्था एवं विश्वास से युक्त उत्साह आज से पूर्व कभी देखने-सुनने को नहीं मिला और न ही भविष्य में पुन: ऐसी संभावना है। हिंदुस्तान का हर कोई आस्थावान अपनी-अपनी आस्था के अनुरूप इसमें अपना योगदान दे रहा है। पूरे देश भर में भजन, कीर्तन, सुंदर काण्ड, रामचरित मानस पाठ, श्रीराम जी की शोभायात्रा, मंदिरों एवं घरों की सजावट, दीपों की जगमगाहट, लाइटिंग डेकोरेशन, प्रसाद वितरण एवं भंडारा आदि तमाम प्रकार से अपनी खुशी एवं आस्था को प्रकट करने की तैयारियां कर ली गई हैं। मंदिरों एवं शोभायात्रा के लिए रथ, सजावट के फूल, पंडित जी आदि जितने भी संसाधन हैं सब कम पड़ गए हैं, केवल एक चीज की कमी नहीं है: वह है हौसला।
जैसा कि हम सभी जानते हैं कि हर कोई अपने-अपने तरीके से अपने विचारों की अभिव्यक्ति प्रकट कर रहा है। प्रभु श्रीराम जी से संबंधित तमाम प्रकार के गीत, कविताएं आदि के माध्यम से लोग अपनी आस्था को उजागर कर रहे हैं जिससे आम जनता भी आस्थामयी हो गई है। इसी आस्था से वशीभूत होकर मैंने रामायण की 101 छोटी-छोटी कहानियां लिखीं, कुल एक सौ एक कहानियां मात्र 102 पृष्ठ में समाहित हैं यानी एक पेज को कहानियां। इससे कहानियों को पढ़ना और समझना तथा अन्य लोगों को समझाना बिल्कुल ही आसान हो गया है। रामायण की गद्य रूप में लिखित कहानियां सहज ही स्मरणीय हैं। इस कहानी संग्रह का नाम है “राम कहानी” को हिंदी श्री पब्लिकेशन, भदोही से प्रकाशित है। यह “राम कहानी” हमारी चौदहवीं पुस्तक है जो हमारी आज की दिग्भ्रमित पीढ़ी को संस्कारवान बनाने के लिए नितांत आवश्यक है। ऐसी ही पुस्तकों की आवश्यकता आज हमारे समाज को है।
एक दिन सोसल मीडिया पर मैंने किसी भटके हुए आत्मा का एक भ्रमित प्रसंग पढ़ा जिसमें लिखा था कि लक्ष्मण जी द्वारा लक्ष्मण रेखा खींचकर सीता जी को कैद में रखने का प्रमाण है तथा इसे नारियों का अपमान बताया। वहां पर मैंने जवाब दिया कि लक्ष्मण जी की खींची हुई रेखा से सीता जी बाहर जा सकती थीं, सीता जी को बाहर जाने और वापस अंदर आने में कोई रोक नहीं थी। वह रेखा उन दुष्ट लोगों के लिए थी जो उस रेखा के अंदर आना चाहे तो न आ सके चाहे वह राक्षसों का राजा रावण हो, चाहे कोई जंगली जानवर या कोई और। लक्ष्मण रेखा के द्वारा सीता जी को सुरक्षा प्रदान करने के लिए बाहर से आने वाली दुष्ट आत्माओं पर रोक लगाई गई थी न कि सीता माता जी को बाहर जाने के लिए। इसी से पूरी रामायण को छोटी-छोटी कहानियों के माध्यम से जन-जन तक पहुंचाने का विचार मन में आया। इस पुस्तक के माध्यम से पाठकों को आसानी से समझ में आ जाएगा कि जिस सीता माता का अपहरण करके रावण लंका ले गया वो वास्तविक सीता माता नहीं थीं तथा जिस सीता माता की अग्नि परीक्षा ली गई, वे भी वास्तविक सीता माता जी की प्रतिमूर्ति मात्र थीं। इस पुस्तक के माध्यम से सबको सहज ही मालूम हो जाएगा कि प्रभु श्रीराम को चौदह वर्ष के लिए वनवास मांगने में माता कैकेई का स्वार्थ नहीं था, अपितु देवताओं के अनुरोध पर देवी सरस्वती ने मंथरा एवं कैकेई को देवताओं के नेक कार्य के लिए वैसा बोलने हेतु बुद्धिभ्रमित किया गया।
श्रीराम जी के प्राण प्रतिष्ठा के पूर्व दिसंबर 2023 के अंतिम दिन प्रकाशित मेरी यह पुस्तक प्राण प्रतिष्ठा के महायज्ञ में एक आहुति के समान है। इस पुस्तक “राम कहानी” की पहली प्रति उत्तर प्रदेश के माननीय मुख्य मंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी को प्रेषित की गई। मैं डॉ. मिथिलेश कुमार श्रीवास्तव ‘शिखर’ गाजियाबाद से इस महायज्ञ में एक आहुति प्रेषित कर रहा हूं। निश्चय ही हमारे हिंदुस्तान के लोग प्रभु श्रीराम की मर्यादा में आस्थामय होकर अपनी आने वाली पीढ़ी को संस्कारवान बनाने में कामयाब होंगे।

Author: Pramod Gupta
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