November 30, 2025 8:14 am

ज्ञान बिक गए ,ध्यान बिक गए। कलम बिकी, सम्मान बिक गये।।

क्या मिलना , वैसे लोगो से ।

जिनके चंद रुपयों में, ईमान बिक गये।।

उनसे पूछिए , जिंदगी क्या है जनाब।
जिनके सब ,अरमान बिक गये।।

नग्न हो गई , जीवित लाशें।
मुर्दों के , परिधान बिक गए।।

चोरों को , दोष क्यों देना।
घर के जब पहरेदार बिक गए।।

सोच समझकर , मुंह से बोले ।
दीवारों के , कान बिक गए।।

तन भी बिका, मन भी बिका।
बिकने वाले , भरे बाजार बिक गए।।

हिंदी है माथे की बिंदी न जाने कहा खो गई।
अंग्रेजी पढ़ने के चक्कर मे संस्कारों को धो गई।।

हिंदी दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।

Pramod Gupta
Author: Pramod Gupta

Hello

Share this post:

खबरें और भी हैं...

लाइव क्रिकट स्कोर

कोरोना अपडेट

Weather Data Source: Wetter Indien 7 tage

राशिफल

error: Content is protected !!