जनहित संकल्प पार्टी की रैली में भीड़ जुटाने के लिए बांटे गए कथित प्रलोभन, जलपान-पानी तक का इंतजाम नहीं; किराया और खर्च देने का वादा भी हवा-हवाई
सोनभद्र। चुनावी रैलियों में भीड़ जुटाकर जनाधार का दम दिखाने की सियासी कवायद तो खूब होती है, लेकिन भीड़ जुटाने के बाद उनके हालात क्या होते हैं, इसकी बानगी बुधवार को शाहगंज थाना क्षेत्र के इमलीपुर में देखने को मिली। यहां जनहित संकल्प पार्टी की चुनावी रैली में हेलीकॉप्टर से राष्ट्रीय अध्यक्ष पहुंचे, मंच से भाषण भी हुआ और समर्थकों का उत्साह भी खूब दिखाया गया, लेकिन जैसे ही हेलीकॉप्टर ने उड़ान भरी, आयोजन की व्यवस्थाओं की हकीकत भी सामने आने लगी। जिन ग्रामीणों को बड़े-बड़े वादे और प्रलोभन देकर दूर-दराज से बुलाया गया था, वे पानी और भोजन के लिए परेशान नजर आए। रैली दोपहर एक बजे प्रस्तावित थी। सुबह से ही जनपद के विभिन्न क्षेत्रों के अलावा दूसरे जनपदों से भी लोगों का पहुंचना शुरू हो गया था। सैकड़ों की संख्या में बसों, ट्रैक्टरों, चार पहिया वाहनों और ऑटो के जरिए लोगों को सभा स्थल तक लाया गया। राष्ट्रीय अध्यक्ष के हेलीकॉप्टर से आने की खबर ने ग्रामीणों की उत्सुकता और बढ़ा दी। करीब दो बजे उनका हेलीकॉप्टर सभा स्थल के बगल में बनाए गए हेलीपैड पर उतरा। इसके बाद करीब साढ़े तीन बजे तक मंच से संबोधन चलता रहा। इस दौरान लोग पूरे उत्साह से नेताओं को सुनते रहे। लेकिन इसके बाद जैसे ही राष्ट्रीय अध्यक्ष का उड़नखटोला रवाना हुआ, रैली में आए लोगों की उम्मीदों पर भी मानो पानी फिर गया। सभा स्थल पर न तो पीने के पानी की पर्याप्त व्यवस्था नजर आई और न ही भोजन अथवा जलपान का कोई इंतजाम। जिन लोगों को बुलाते समय सुविधाओं के बड़े-बड़े आश्वासन दिए गए थे, वे भूख-प्यास से परेशान होकर अपनी व्यवस्था खुद करने को मजबूर हो गए।गढ़वा गांव से आए मुंशीलाल ने बताया कि उन्हें यह कहकर बुलाया गया था कि वहां जलपान सहित सभी व्यवस्थाएं रहेंगी। लेकिन इतनी दूर से आने के बाद पीने का पानी तक नहीं मिला। रैली समाप्त होते ही व्यवस्थापक भी नदारद हो गए। मीठापुर से पहुंचे बिहारी ने बताया कि वह सुबह आठ बजे घर से निकले थे। शाम चार बजे तक सभा स्थल पर बैठे रहे, लेकिन खाने-पीने की कोई व्यवस्था नहीं हुई। अंततः भूख-प्यास से परेशान होकर अपने पैसे से इंतजाम करना पड़ा। पनौली गांव के शिवम ने बताया कि वह अपने चार पहिया वाहन से कुछ लोगों को लेकर आए थे। उन्हें वाहन का किराया और अन्य खर्च देने का भरोसा दिया गया था, लेकिन कार्यक्रम समाप्त होते ही जिम्मेदार लोग गायब हो गए।
अब उन्हें भुगतान के लिए किससे संपर्क करना है, यह भी समझ नहीं आ रहा। तेजबली लाल ने भी नाराजगी जताते हुए कहा कि रैलियों में ग्रामीणों को तरह-तरह के प्रलोभन देकर बुलाया जाता है। काम निकल जाने के बाद उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं रहता। जानकारी के अनुसार सबसे चौंकाने वाला मामला प्रयागराज से आई महिलाओं का सामने आया। कुछ महिलाओं ने बताया कि उन्हें बस से यह कहकर लाया गया था कि विंध्यवासिनी देवी के दर्शन कराए जाएंगे, लेकिन यहां लाकर चुनावी रैली में बैठा दिया गया। कार्यक्रम समाप्त होने के बाद उन्हें कोई जिम्मेदार व्यक्ति दिखाई नहीं दिया। सवाल यह है कि भीड़ जुटाने की सियासत में ग्रामीणों की भूख-प्यास और सम्मान की जिम्मेदारी किसकी है? मंच पर जनहित और जनता के हितों की बड़ी-बड़ी बातें करना आसान है, लेकिन क्या जनता को बुलाने के बाद उसकी बुनियादी जरूरतों का ख्याल रखना भी जरूरी नहीं? हेलीकॉप्टर की लैंडिंग से लेकर उड़ान तक सब कुछ भव्य रहा, मगर जमीन पर बैठे आम लोगों के लिए पानी और भोजन तक का इंतजाम नहीं हो सका। सवाल सिर्फ अव्यवस्था का नहीं, बल्कि उन सीधे-साधे ग्रामीणों के भरोसे का भी है, जिन्हें कथित वादों और प्रलोभनों के सहारे सभा तक लाया गया। यदि आरोप सही हैं तो यह जनहित की रैली कम और भीड़ जुटाने के नाम पर जनता की उम्मीदों से खिलवाड़ ज्यादा नजर आता है।
Author: Pramod Gupta
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