वाराणसी-शक्तिनगर मार्ग पर रास्ते में छोड़ी गई गिट्टी-बालू की कथित खरीद-बिक्री को लेकर उठे गंभीर सवाल, एसीपी टोल से जुड़े कुछ लोगों की भूमिका पर भी संदेह; प्रशासन की चुप्पी पर उठ रही उंगलियां
सोनभद्र। मारकुंडी घाटी में गिट्टी-बालू के कथित कारोबार को लेकर अब गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। वाराणसी-शक्तिनगर मार्ग पर खराब होने वाले ट्रकों से खाली की गई अथवा खनिज विभाग की कार्रवाई के डर से रास्ते में छोड़ी गई गिट्टी-बालू आखिर कहां जा रही है? आरोप है कि इस खनिज सामग्री पर एसीपी टोल से जुड़े कुछ लोगों द्वारा कथित तौर पर कब्जा कर उसकी खरीद-बिक्री की जा रही है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि रास्ते में छोड़ी गई इस खनिज सामग्री का मालिक कौन है? इसे किसके आदेश पर उठाया जा रहा है और इसका इस्तेमाल कहां किया जा रहा है? यदि खनिज सामग्री का व्यावसायिक इस्तेमाल या बिक्री हो रही है तो क्या इसके लिए कोई वैध अनुमति और अभिलेख मौजूद हैं? मामला केवल गिट्टी-बालू की खरीद-बिक्री तक सीमित नहीं है, बल्कि खनिज संपदा की निगरानी और सरकारी राजस्व से भी जुड़ा है। ऐसे में संबंधित विभागों की जिम्मेदारी बनती है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
जिला प्रशासन से उठे सवाल
- खराब ट्रकों से उतारी गई गिट्टी-बालू आखिर किसके कब्जे में जाती है?
- रास्ते में छोड़ी गई खनिज सामग्री को उठाने और बेचने का अधिकार किसके पास है?
- एसीपी टोल से जुड़े लोगों की कथित भूमिका की जांच कौन करेगा?
- खनिज सामग्री के परिवहन और बिक्री का कोई वैध रिकॉर्ड है या नहीं?
- इस पूरे मामले में खनिज विभाग और स्थानीय प्रशासन की निगरानी व्यवस्था कितनी प्रभावी है?
अब देखना यह है कि जिला प्रशासन, खनिज विभाग और संबंधित अधिकारी इस मामले को गंभीरता से लेते हैं या मारकुंडी घाटी में उठ रहे इन सवालों को भी अनसुना कर दिया जाएगा। प्रशासन को मौके की जांच कराकर खनिज सामग्री के स्रोत, कब्जे, परिवहन और बिक्री की पूरी कड़ी उजागर करनी चाहिए तथा अनियमितता मिलने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित पक्षों का जवाब सामने आना बाकी है।
Author: Pramod Gupta
Hello









