October 24, 2026 4:34 pm

अवैध अस्पतालों पर उठे सवाल, सील होने के बाद दोबारा कैसे खुल रहे केंद्र?

पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष डॉ. धर्मवीर तिवारी ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल, सीएमओ और नोडल अधिकारी की भूमिका की जांच की मांग

सोनभद्र। जनपद में अवैध अस्पतालों के संचालन और इलाज के दौरान मरीजों की मौत के मामलों को लेकर स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। बिना वैध पंजीकरण के संचालित होने वाले अस्पतालों पर कार्रवाई, सील किए गए अस्पतालों के दोबारा खुलने और अवैध पैथोलॉजी व डायग्नोस्टिक सेंटरों के संचालन को लेकर पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष डॉ. धर्मवीर तिवारी ने गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने पूरे मामले को मुख्यमंत्री के समक्ष उठाने और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। डॉ. धर्मवीर तिवारी ने कहा कि जनपद में गरीब मरीजों का कथित तौर पर दलालों के माध्यम से निजी अस्पतालों तक पहुंचना और वहां इलाज के दौरान जान गंवाने की घटनाएं बेहद चिंताजनक हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ मामलों में आशा कार्यकर्ताओं की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। उनका कहना है कि मरीजों को निजी अस्पतालों में भेजने के बदले कथित रूप से आर्थिक लाभ लेने और स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार लोगों की मिलीभगत से अवैध अस्पतालों के संचालन की शिकायतों की गंभीरता से जांच होनी चाहिए।

नोडल अधिकारी की जिम्मेदारी पर उठाए सवाल

पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष ने कहा कि अवैध अस्पतालों पर निगरानी रखने और उनके खिलाफ कार्रवाई करने की जिम्मेदारी संबंधित अधिकारियों की है, लेकिन आरोप है कि कार्रवाई अक्सर किसी बड़ी घटना के बाद ही दिखाई देती है। उन्होंने सवाल उठाया कि स्वास्थ्य विभाग जिले में संचालित अवैध अस्पतालों और पैथोलॉजी केंद्रों की सूची सार्वजनिक क्यों नहीं करता, ताकि आम जनता को वैध और अवैध संस्थानों की जानकारी मिल सके। डॉ. तिवारी ने आरोप लगाया कि कुछ अस्पताल निजी मकानों में भी संचालित हो रहे हैं। ऐसे में उनके पंजीकरण, निर्धारित मानकों के अनुपालन और संचालन की अनुमति की जांच आवश्यक है।

रॉबर्ट्सगंज, घोरावल और दुद्धी में संचालन का दावा

डॉ. धर्मवीर तिवारी ने दावा किया कि रॉबर्ट्सगंज क्षेत्र में करीब 23, घोरावल में 19 और दुद्धी में 14 अस्पताल अवैध रूप से संचालित हो रहे हैं। उन्होंने इन आंकड़ों की आधिकारिक जांच कराकर वास्तविक स्थिति सार्वजनिक करने की मांग की। उन्होंने अवैध पैथोलॉजी और डायग्नोस्टिक सेंटरों के संचालन पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि सोनभद्र मुख्यालय पर रेडियोलॉजिस्ट की उपलब्धता सात बताई जा रही है, जबकि डायग्नोस्टिक सेंटरों के लाइसेंस की संख्या 16 होने का दावा किया गया है। ऐसे में संबंधित केंद्रों के पंजीकरण, विशेषज्ञों की उपलब्धता और लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया की जांच कराई जानी चाहिए।

सील अस्पताल दोबारा खुलने पर जवाबदेही की मांग

डॉ. तिवारी ने कहा कि कथित तौर पर कई मामलों में घटना के बाद अस्पताल सील कर दिए जाते हैं, लेकिन कुछ समय बाद उनके दोबारा संचालित होने की शिकायतें सामने आती हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि किसी अस्पताल में अनियमितताएं मिलने पर उसे सील किया जाता है, तो फिर वह दोबारा किस आधार पर खुलता है? ऐसे मामलों में संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। उन्होंने जिलाधिकारी से मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने तथा मुख्य चिकित्सा अधिकारी और संबंधित नोडल अधिकारी की भूमिका की विशेष जांच कराने की मांग की। साथ ही कहा कि स्वास्थ्य विभाग को जिले में संचालित अस्पतालों, पैथोलॉजी और डायग्नोस्टिक सेंटरों की सत्यापित सूची सार्वजनिक करनी चाहिए और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करनी चाहिए।

मुख्यमंत्री को सौंपेंगे पत्रक

पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष ने कहा कि गरीब मरीजों के साथ कथित शोषण और अवैध अस्पतालों के संचालन का मुद्दा वह जल्द ही मुख्यमंत्री के समक्ष उठाएंगे। इसके लिए मुख्यमंत्री को पत्रक सौंपकर पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच और दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की जाएगी। अब सवाल यह है कि स्वास्थ्य विभाग जिले में संचालित अस्पतालों और जांच केंद्रों की वास्तविक स्थिति सार्वजनिक करने के लिए क्या कदम उठाता है। साथ ही सील किए गए अस्पतालों के दोबारा खुलने की शिकायतों और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की जांच कब तक पूरी होती है। इन सवालों पर विभाग का आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद ही पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

Pramod Gupta
Author: Pramod Gupta

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