October 21, 2026 8:08 am

रॉबर्ट्सगंज मंडी अग्निकांड: 30-40 किसानों की फसल राख, 14 दुकानें जलीं; पूर्व विधायक ने उठाए सुरक्षा पर सवाल

अविनाश कुशवाहा बोले—जिला मुख्यालय की सबसे बड़ी मंडी सुरक्षित नहीं तो बाकी जगहों का क्या हाल? सीसीटीवी फुटेज की जांच, दोषियों पर कठोर कार्रवाई और प्रभावित किसानों-व्यापारियों को तत्काल मुआवजे की मांग

भाजपा ने भी संभाला पीड़ितों का पक्ष, पूर्व जिलाध्यक्ष डॉ. धर्मवीर तिवारी ने प्रभारी मंत्री से की बात; डीएम के जरिए क्षतिपूर्ति दिलाने का आश्वासन

सोनभद्र। रॉबर्ट्सगंज स्थित नवीन मंडी समिति में लगी भीषण आग ने किसानों और व्यापारियों की मेहनत पर पानी फेर दिया। देर रात करीब 11 बजे लगी आग में लगभग 14 दुकानें जलकर राख होने की जानकारी सामने आई है। पूर्व विधायक अविनाश कुशवाहा के मुताबिक, करीब 30 से 40 किसानों की फसल आग की भेंट चढ़ गई। आलू, लहसुन और विभिन्न प्रकार की साग-सब्जियों के साथ व्यापारियों का अन्य सामान तथा कुछ नकदी भी जलने से भारी नुकसान हुआ है। इस अग्निकांड ने न केवल प्रभावित परिवारों की आजीविका पर संकट खड़ा किया है, बल्कि जिला मुख्यालय की प्रमुख मंडी में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना के बाद किसानों और व्यापारियों के नुकसान की भरपाई, आग लगने के कारणों की जांच और जिम्मेदारी तय करने की मांग तेज हो गई है। पूर्व विधायक अविनाश कुशवाहा ने इसे प्रशासनिक चूक बताते हुए मंडी परिसर के सीसीटीवी फुटेज की जांच कराने और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की। वहीं, भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष डॉ. धर्मवीर तिवारी ने भी प्रभावित व्यापारियों को राहत दिलाने के लिए मंडी सचिव से वार्ता की और प्रभारी मंत्री डॉ. हंसराज विश्वकर्मा को घटना से अवगत कराया। मंत्री ने जिलाधिकारी से बात कर पीड़ितों को नियमानुसार मुआवजा और आवश्यक सहायता दिलाने के निर्देश दिए हैं।

मंडी की सुरक्षा पर बड़ा सवाल: सीसीटीवी, गार्ड और कोतवाली की नजदीकी के बावजूद कैसे लगी आग?

पूर्व विधायक अविनाश कुशवाहा ने मंडी अग्निकांड पर सवाल उठाते हुए कहा कि जिला मुख्यालय की सबसे बड़ी मंडी में यदि सुरक्षा व्यवस्था की यह स्थिति है तो अन्य स्थानों की सुरक्षा का अंदाजा लगाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि मंडी परिसर में निगरानी के लिए सीसीटीवी कैमरे लगे हैं, सुरक्षा गार्ड की व्यवस्था है और कोतवाली भी 500 मीटर से कम दूरी पर स्थित है। इसके बावजूद इतनी बड़ी आग लगने की घटना कई सवाल खड़े करती है। उन्होंने मांग की कि घटना के समय के सीसीटीवी फुटेज की बारीकी से जांच की जाए, ताकि आग लगने की परिस्थितियों का पता चल सके। यदि जांच में किसी व्यक्ति की संलिप्तता, लापरवाही या मिलीभगत सामने आती है तो उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए। हालांकि, आग जानबूझकर लगाए जाने या किसी मिलीभगत की अभी पुष्टि नहीं हुई है। इसका खुलासा जांच के बाद ही हो सकेगा। पूर्व विधायक ने कहा कि प्रभावित किसानों और व्यापारियों का नुकसान केवल सामान तक सीमित नहीं है। उनकी मेहनत, पूंजी और परिवार की आजीविका भी इससे प्रभावित हुई है। ऐसे में सरकार को तत्काल सर्वे कराकर उचित क्षतिपूर्ति उपलब्ध करानी चाहिए।

आलू, लहसुन और साग-सब्जियां राख, किसानों के सामने रोजी-रोटी का संकट

अग्निकांड में किसानों की उपज और व्यापारियों के फल-सब्जी कारोबार को भारी नुकसान पहुंचने की बात सामने आई है। अविनाश कुशवाहा के अनुसार, लगभग 30 से 40 किसानों की फसल आग से प्रभावित हुई है। आलू, लहसुन और विभिन्न प्रकार की साग-सब्जियों के साथ दुकानों में रखा अन्य सामान भी जल गया। कुछ व्यापारियों की नकदी के नुकसान की बात भी उन्होंने कही। किसानों के लिए फसल केवल उपज नहीं, बल्कि पूरे मौसम की मेहनत और परिवार की आर्थिक उम्मीद होती है। वहीं, छोटे व्यापारियों की दुकान ही उनकी रोजी-रोटी का मुख्य साधन है। ऐसे में आग से हुए नुकसान की सही गणना कराना बेहद जरूरी है, ताकि वास्तविक रूप से प्रभावित लोगों की पहचान हो सके और उन्हें नियमानुसार राहत मिल सके। पूर्व विधायक ने मंडी सचिव से मुलाकात कर प्रभावित किसानों और व्यापारियों को अधिकतम संभव मुआवजा दिलाने की मांग की। उनके मुताबिक, मंडी सचिव ने जल्द कार्रवाई करने का आश्वासन दिया है।

छोटे दुकानदारों का भी दर्द: बुलडोजर कार्रवाई के बाद रोजी-रोटी का संकट

मंडी अग्निकांड के बीच पूर्व विधायक अविनाश कुशवाहा ने रॉबर्ट्सगंज मुख्य बाजार में ठेला और गोमती लगाकर फल-सब्जी बेचने वाले छोटे दुकानदारों का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि अतिक्रमण के चलते पुलिस और तहसील प्रशासन की ओर से कई बार इन दुकानदारों को हटने की चेतावनी दी गई थी। इसके बाद दुकानदारों को मंडी समिति में दुकान लगाने का मौखिक आश्वासन दिए जाने की बात कही गई, जिसके आधार पर वे अपनी आजीविका चला रहे थे। पूर्व विधायक के अनुसार, दो दिन पहले बुलडोजर से हटाए जाने के दौरान इन छोटे दुकानदारों की दुकानदारी भी नष्ट हो गई। उन्होंने दावा किया कि त्योहार के कारोबारी सीजन में ये दुकानदार करीब नौ दिनों से बेरोजगारी और आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। उन्होंने मांग की कि प्रभावित छोटे दुकानदारों को भी पूर्व की तरह दुकान लगाने की अनुमति देने पर विचार किया जाए, ताकि वे सम्मानपूर्वक अपनी आजीविका चला सकें। इस मामले में प्रशासनिक कार्रवाई और दुकानदारों के दावों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।

भाजपा ने भी उठाया पीड़ित व्यापारियों का मुद्दा, प्रभारी मंत्री ने डीएम से की बात

नवीन मंडी अग्निकांड के बाद भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष डॉ. धर्मवीर तिवारी, अरविंद पांडेय, मनीष अग्रहरि और योगेश सिंह मौके पर पहुंचे थे। उनके अनुसार, घटना की जानकारी मिलने पर उन्होंने अग्निशमन विभाग को बुलाने और आग बुझाने के प्रयासों में सहयोग किया। इसके बाद डॉ. धर्मवीर तिवारी ने मंडी समिति पहुंचकर मंडी सचिव से वार्ता की और प्रभारी मंत्री डॉ. हंसराज विश्वकर्मा को घटना की जानकारी दी। मंत्री ने तत्काल जिलाधिकारी से बातचीत कर पीड़ित व्यापारियों को नियमानुसार मुआवजा एवं अन्य आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। डॉ. धर्मवीर तिवारी ने कहा कि इस कठिन समय में भाजपा और सरकार प्रभावित व्यापारियों के साथ खड़ी है। उन्होंने मंडी सचिव से नुकसान का तत्काल सर्वे कराकर रिपोर्ट जिलाधिकारी को भेजने के लिए कहा, ताकि पीड़ितों को अधिकतम संभव क्षतिपूर्ति दिलाने की प्रक्रिया आगे बढ़ सके। उन्होंने कहा कि फल-सब्जी के कारोबार के व्यस्त मौसम में व्यापारियों को हुई क्षति बेहद पीड़ादायक है। प्रभावित कारोबारियों को जल्द राहत दिलाने और उन्हें दोबारा अपना व्यवसाय शुरू करने में सहयोग देने का प्रयास किया जाएगा। इस दौरान शिवकुमार सोनकर, भोला सोनकर, सतीश सोनकर, अनिल सोनकर सहित अन्य लोग मौजूद रहे।

अब जांच, सर्वे और मुआवजे पर टिकी निगाहें

नवीन मंडी अग्निकांड के बाद अब तीन प्रमुख सवाल सामने हैं—आग किन परिस्थितियों में लगी, सुरक्षा व्यवस्था में कोई चूक हुई या नहीं और प्रभावित किसानों एवं व्यापारियों को राहत कब मिलेगी? प्रभावित लोगों की मांग है कि सीसीटीवी फुटेज की जांच जल्द पूरी की जाए, आग के वास्तविक कारणों का पता लगाया जाए और नुकसान का निष्पक्ष आकलन कराया जाए। साथ ही, जिन किसानों और व्यापारियों की फसल, सामान या नकदी का नुकसान हुआ है, उनकी शिकायतों को दर्ज कर नियमानुसार क्षतिपूर्ति दिलाने की प्रक्रिया में तेजी लाई जाए। मंडी अग्निकांड अब केवल आग से हुए नुकसान का मामला नहीं रह गया है। यह सुरक्षा व्यवस्था, जवाबदेही और छोटे कारोबारियों की आजीविका से जुड़ा महत्वपूर्ण सवाल बन गया है। प्रशासनिक जांच में यदि कोई लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदारी तय करना और भविष्य में ऐसी घटना रोकने के लिए सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करना जरूरी होगा। फिलहाल पीड़ित किसानों और व्यापारियों को आश्वासनों के साथ-साथ ठोस कार्रवाई और राहत का इंतजार है।

Pramod Gupta
Author: Pramod Gupta

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