सोनभद्र (दुद्धी) धर्म, आस्था और भारतीय संस्कृति की जीवंत परंपरा को संजोए दुद्धी की ऐतिहासिक श्रीरामलीला का सोमवार की रात्रि विधिवत शुभारंभ हुआ। मुकुट पूजन के उपरांत कार्यक्रम के मुख्य अतिथि नगर पंचायत अध्यक्ष कमलेश मोहन, विशिष्ट अतिथि उपजिलाधिकारी अशोक गुप्ता एवं पुलिस उपाधीक्षक विनय प्रभाकर साहनी ने संयुक्त रूप से श्रीरामायण एवं श्री हनुमान जी का विधि-विधान से पूजन-अर्चन कर श्रीरामलीला मंचन का भव्य उद्घाटन किया। पूजन के दौरान पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा और श्रद्धालुओं के बीच ‘जय श्रीराम’ के उद्घोष से रामलीला परिसर गूंज उठा। इस अवसर पर मुख्य अतिथि नगर पंचायत अध्यक्ष कमलेश मोहन ने कहा कि दुद्धी की श्रीरामलीला केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि धर्म, संस्कार, मर्यादा और भारतीय जीवन मूल्यों की पाठशाला है। भगवान श्रीराम का जीवन हमें सत्य, त्याग, तपस्या, कर्तव्य और मर्यादा के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि लगभग डेढ़ सौ वर्षों से अधिक समय से चली आ रही यह परंपरा क्षेत्र की धार्मिक एवं सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उपजिलाधिकारी अशोक गुप्ता ने कहा कि श्रीरामलीला के मंचन के माध्यम से नई पीढ़ी को हमारी समृद्ध धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत से जुड़ने का अवसर मिलता है। श्रीराम का चरित्र हमें बताता है कि परिस्थितियां कितनी भी कठिन क्यों न हों, मनुष्य को सत्य और धर्म का मार्ग नहीं छोड़ना चाहिए।यहां प्रशासनिक परिसर में आध्यात्मिक मंचन खुद के अनुकरणीय है। पुलिस उपाधीक्षक विनय प्रभाकर साहनी ने कहा कि रामायण में मानव जीवन के प्रत्येक रिश्ते और दायित्व के लिए प्रेरणा छिपी हुई है। भगवान श्रीराम का माता-पिता के प्रति समर्पण, भाइयों के प्रति प्रेम, प्रजा के प्रति दायित्व, मित्रता में विश्वास और विपरीत परिस्थितियों में धैर्य आज भी समाज के लिए अनुकरणीय है।क्षेत्र के लोग प्रतिदिन रामलीला देखे और जीवन के बदलाव लाए।
रामलीला नहीं, संस्कारों का जीवंत मंच
दुद्धी की ऐतिहासिक रामलीला को लेकर आयोजकों ने बताया कि यह परंपरा 150 वर्षों से अधिक समय से क्षेत्र में श्रद्धा और आस्था के साथ चली आ रही है। पीढ़ियां बदलती रहीं, लेकिन प्रभु श्रीराम की कथा और उनके आदर्शों के प्रति लोगों की आस्था निरंतर बनी रही।रामलीला के प्रत्येक प्रसंग में जीवन के लिए कोई न कोई संदेश निहित है। श्रीराम का वनगमन त्याग और आज्ञापालन की सीख देता है, भरत का चरित्र भाई के प्रति प्रेम और त्याग का प्रतीक है, लक्ष्मण की सेवा समर्पण का संदेश देती है, माता सीता धैर्य एवं नारी शक्ति की प्रेरणा हैं और हनुमान जी भक्ति, सेवा एवं समर्पण के सर्वोच्च प्रतीक हैं।भगवान श्रीराम का 14 वर्षों का वनवास यह संदेश देता है कि जीवन में कठिन परिस्थितियां आएं तो मनुष्य को धैर्य, संयम और विश्वास के साथ अपने कर्तव्य का निर्वहन करना चाहिए। यही कारण है कि रामलीला के पात्र केवल मंच पर अभिनय करने वाले पात्र नहीं, बल्कि भारतीय समाज के नैतिक और आध्यात्मिक आदर्शों के प्रतीक हैं।
अतिथियों एवं संरक्षण मंडल का हुआ सम्मान
रामलीला समिति के अध्यक्ष कन्हैयालाल अग्रहरि एवं महामंत्री सुरेंद्र गुप्ता ने मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथियों तथा संरक्षण मंडल के सदस्यों को अंगवस्त्र एवं श्रीरामायण भेंट कर सम्मानित किया। समिति के पदाधिकारियों ने रामलीला के सफल आयोजन में सहयोग करने वाले सभी लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया। इस दौरान देवनारायण जायसवाल, नंदलाल अग्रहरि, डॉ. लवकुश, राजेंद्र श्रीवास्तव (एडवोकेट), चंद्रिका प्रसाद आढ़ती, रविंद्र जायसवाल, दिनेश आढ़ती सहित रामलीला समिति के पदाधिकारी, सदस्य एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु व दर्शक मौजूद रहे।
Author: Pramod Gupta
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