– इन्द्रदेव के कोपभाजन से चिंतित है आम जनमानस, आसमान की ओर लगा रहे टकटकी
सोनभद्र। शाहगंज (ज्ञानदास कनौजिया) इन्द्रदेव के कोपभाजन का शिकार सिर्फ अन्नदाता ही नही’ जलाशय भी हो रहे हैं। जिस महीने में ताल- पोखरे पानी से लबालब होने चाहिए, उस महीने में वह सुखे पड़े हैं। पानी भी है तो नाममात्र का। इससे सभी की चिंतायें बढ़ने लगी है। लोग आसमान में उमड़ते – घुमड़ते काले-कजरारे बादलों की ओर निहार रहे हैं। मगर उन्हें निराशा ही हाथ लग रही है ।उनकी चिंताएं तो और उस समय बढ़ जा रही है जब गर्मी की भांति आसमान में सूर्यदेव दिखने लग जा रहे हैं। बताते चलें कि सावन का महीना भी सप्ताह भर हो गया। किन्तु अभी तक मेघ ऐसी बारिश नहीं किये जिससे धान की रोपाई पूरी तरह हो सके। यहीं नहीं ताल – पोखरे भी इस माह में सूखे पड़े हैं। इसमें पानी भी नहीं के बराबर है।जो थोड़ा- बहुत है भी वह सूखता जा रहा है। इस वर्ष अधिक मास की बात की जाए तो यह महीना सावन नहीं, बल्कि भादो माना जाएगा। लेकिन अभी तक इस इलाके में मूसलाधार बरसात नहीं हुई। जिस कारण प्राकृतिक पहाड़ी नाले पर आश्रित घोरावल ब्लाक के ग्राम पंचायत ढुटेर का आदर्श तालाब आज भी पानी के अभाव में सूखा पडा हुआ है। मानसून के शुरुआती दौर में हुई मामूली बरसात से इसमें जो कुछ पानी भरा भी था वह भी सूखता चला जा रहा है। ठीक यही हाल क्षेत्र के खजुरी और डोहरी गाँव के पोखरे की है। यह तालाब शाहगंज राजवाहा के पानी पर निर्भर है। नहर खुली, पानी भी आया, मगर उक्त तालाब में पानी नहीं गया। नतीजन गाँव का यह मुख्य तालाब आज भी पानी की कमी से सूखे का दंश झेलने को मजबूर है। ताल-पोखरों में पानी नहीं होने की वजह से पशु-पक्षियों को भी अपनी प्यास बुझाने के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है। ढुटेर गाँव के बुजुर्ग बच्चालाल मौर्य, रामगती दुबे, भुवनेश्वर, तपेश्वर आदि कहते हैं कि इन्द्र भगवान कभी-कभी रूठ जाते हैं। अबके समय में काफी गलीमत है। पहले की स्थिति अधिक खराब थी। किसानों को अक्सर सूखे नहीं अकाल का सामना करना पड़ता था। पीने के पानी के लिए परेशानी उठानी पड़ती थी। हालांकि सावन के महीने में झमाझम पानी नहीं बरसना किसी को अच्छा नहीं लग रहा है। पानी के अभाव में धान की रोपाई भी बाधित है। कठिन परिश्रम कर वहीं’ किसान धान ही रोपाई कर रहे है जिनके पास सिंचाई का निजी साधन है। वर्षा ऋतु में भी तमाम गाँवों के सिवान धान की खेती के बिना विरान पड़े हैं। संबंधित किसानों के चेहर पर मायूसी नजर आ रही है।
अच्छी बरसात नहीं हुई तो खिसकेगा जलस्तर
अगर अच्छी यानी झमाझम पानी नहीं बरसा तो जलस्तर नीचे की ओर खिसक सकता है। जिसके चलते पेयजल का भी संकट उत्पन्न हो सकता है। आम जनजीवन को अपनी प्यास बुझाने के लिए परेशान होना पड़ सकता है। जलाशयों में पानी नदारद होने के कारण पशु-पक्षियों को भी मुश्किले उठाती पड़ेगी। कुल मिलाकर बरसात (मौसम) का यदि हालात इसी तरह रहा तो भविष्य में पानी के लिए त्राहि -त्राहि मच सकता है ।
Author: Pramod Gupta
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