सोनभद्र। बभनी (नरेश गुप्ता) जनसुनवाई पोर्टल (IGRS) पर दर्ज शिकायतों के निस्तारण को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि उनकी शिकायतों का निष्पक्ष निस्तारण नहीं हो रहा है तथा संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध की गई शिकायतों की जांच उन्हीं के अधीनस्थ कर्मचारियों से कराई जा रही है, जिससे न्याय मिलने की उम्मीद कमजोर पड़ती जा रही है। कमलेश, राजेश, बबिता गुप्ता समेत अन्य शिकायतकर्ताओं का कहना है कि जब किसी तहसीलदार या अन्य अधिकारी के कार्यों को लेकर शिकायत की जाती है, तो उसकी जांच उसी विभाग के अधीनस्थ कर्मचारियों अथवा संबंधित कार्यालय के कर्मियों से ही कराई जाती है। ऐसे में जांच की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। लोगों का मानना है कि उच्च अधिकारियों के विरुद्ध शिकायतों की जांच स्वतंत्र एजेंसी अथवा वरिष्ठ स्तर के अधिकारियों से कराई जानी चाहिए।इसी क्रम में बभनी क्षेत्र के ग्राम असनहर निवासी बबिता पत्नी नरेश कुमार ने आरोप लगाया कि उन्होंने विभिन्न मामलों में कई बार IGRS पोर्टल के माध्यम से शिकायत दर्ज कर न्याय की गुहार लगाई, लेकिन उनकी शिकायतों का संतोषजनक समाधान नहीं हुआ। उनका कहना है कि बिना वास्तविक जांच के रिपोर्ट लगाकर शिकायतों का निस्तारण दिखाया जा रहा है। शिकायतकर्ताओं का यह भी आरोप है कि कई मामलों में फीडबैक प्रक्रिया प्रभावी ढंग से नहीं हो पा रही है, जिससे शिकायतकर्ता अपनी आपत्ति अथवा असंतोष दर्ज नहीं करा पा रहे हैं। इससे लोगों का भरोसा शिकायत निवारण प्रणाली से कम होता दिखाई दे रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि निस्तारित शिकायतों की समीक्षा के लिए स्वतंत्र समिति अथवा उच्च स्तरीय जांच कमेटी गठित की जाए, तो वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है और शिकायतकर्ताओं को न्याय मिलने की संभावना बढ़ेगी।हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों का पक्ष सामने आना अभी बाकी है। प्रशासन की ओर से प्रतिक्रिया मिलने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
Author: Pramod Gupta
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