October 10, 2026 6:50 am

कागजी सफाई: नमामि गंगे परियोजना में भ्रष्टाचार का बड़ा खेल,काम पूरा होने से 2 साल पहले ही ले लिए शपथ पत्र

​सोनभद्र। बीजपुर( विनोद गुप्त) नमामि गंगे हर घर जल नल योजना अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में पानी पहुंचाने के सरकारी दावों की जमीनी हकीकत तार-तार होती नजर आ रही है।बीजपुर और आसपास के क्षेत्रों में जलापूर्ति का कार्य करा रही कार्यदायी संस्था जीवीपीआर प्राइवेट लिमिटेड का एक बड़ा कारनामा सामने आया है।संस्था ने धरातल पर काम पूरा किए बिना ही करीब 2 साल पहले ही ग्राम प्रधानों और ग्राम विकास अधिकारियों से कार्य पूर्ति होने के शपथ पत्र लिखवा लिए।​मामला उजागर होने और जिलाधिकारी द्वारा इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए जांच टीम गठित करने के बाद से ही ग्राम प्रधानों और विभागीय अधिकारियों में हड़कंप मच गया है।​सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार इस पूरे खेल के पीछे कार्यदायी संस्था जीवीपीआर और ग्राम प्रधानों के बीच की गहरी साठगांठ है।ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि ग्राम प्रधानों ने अपने निजी फायदे के लिए ग्रामीणों के हक का सौदा कर दिया।​कंपनी ने कई ग्राम प्रधानों को योजना का लाभ देने के लिए ठेकेदारी बांटे।​कई प्रधानों की जेसीवी मशीन और गाड़ियां कंपनी के मोटी रकम पर लगवाई गईं।कुछ प्रधानों के परिवार लडकों को नौकरियां दी गईं।​ग्रामीणों का कहना है कि लूट खसोट योजना के तहत चंद सिक्कों की खातिर अपने निजी स्वार्थ में प्रधानों ने अपना जमीर बेचकर पूरे गांव को कंपनी के हवाले कर दिया।इसी अहसान के बदले कंपनी ने समय से पहले ही प्रधानों से कार्य शतप्रतिशत पूर्ण’ होने का शपथ पत्र लिखवाकर अपनी पीठ थपथपा ली और करोड़ों का भुगतान उठाने का रास्ता साफ कर लिया।​महाफर्जीवाड़े का सबसे हैरान करने वाला उदाहरण नेमना ग्राम पंचायत से सामने आया है।यहाँ के ग्राम प्रधान प्रितिधि और ग्राम विकास अधिकारी ने 16 अक्टूबर 2023 को ही कार्यदायी संस्था को यह शपथ पत्र सौंप दिया था कि गांव में पूरी तरह से पानी पहुंच चुका है और कार्य शत-प्रतिशत पूरा है।इसी तरह क्षेत्र के कई अन्य प्रधानों ने भी करीब 2 साल पहले ही जल्दबाजी में संस्था के पक्ष में क्लीन चिट जारी कर दी थी जबकि हकीकत में आज भी धरातल पर काम अधूरा पड़ा हुआ है।पाइपलाइन अधूरी हैं ग्रामीण बूंद-बूंद पानी को तरस रहे हैं।​जैसे ही जिलाधिकारी के सख्त आदेश के बाद जांच टीम गठित हुई जिम्मेदार अधिकारियों और प्रधानों के पैर तले जमीन खिसक गई है।कार्रवाई से बचने के लिए अब संबंधित ग्राम प्रधान और विभागीय अधिकारी तरह-तरह के जुगाड़ लगाने में जुट गए हैं।कागजी हेरफेर को छिपाने की कोशिशें तेज हो गई हैं।​ग्रामीणों का आरोप है कि जल जीवन मिशन के तहत पाइपलाइन बिछाने और हर घर तक सुचारू रूप से जलापूर्ति करने में भारी लापरवाही और भ्रष्टाचार किया गया है।कागजों में जो काम 2 साल पहले पूरा दिखाया जा चुका है उसकी जमीनी हकीकत आज भी अधूरी है।​अब जिलाधिकारी द्वारा गठित जांच टीम की रिपोर्ट पर पूरे क्षेत्र की निगाहें टिकी हैं।

Pramod Gupta
Author: Pramod Gupta

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