October 10, 2026 1:29 am

डीएम के आदेश की उड़ी धज्जियां, सेंट पॉल स्कूल पर मनमानी का आरोप

– फीस वृद्धि का विरोध करने पर बच्चों को स्कूल से निकाला, अभिभावकों में आक्रोश

सोनभद्र। रामगढ़ कोल्हूआ स्थित सेंट पॉल स्कूल प्रबंधन पर अभिभावकों ने मनमानी फीस वृद्धि, प्रशासनिक आदेशों की अवहेलना एवं छात्रों के उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए हैं। मामले को लेकर अभिभावकों में भारी आक्रोश व्याप्त है।अभिभावकों का आरोप है कि विद्यालय द्वारा पिछले चार वर्षों से लगातार फीस में बेतहाशा वृद्धि की जा रही है। कई मदों में शुल्क कई गुना तक बढ़ा दिया गया है, जिससे अभिभावकों पर आर्थिक बोझ बढ़ गया है। जब अभिभावकों ने इसकी शिकायत संबंधित अधिकारियों से की, तो विद्यालय प्रशासन ने कथित रूप से अप्रैल माह से बच्चों को विद्यालय आने से रोक दिया। अभिभावकों का कहना है कि फीस वृद्धि का विरोध करने पर विद्यालय प्रबंधन ने यह कहकर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया कि उनका विद्यालय खण्ड शिक्षा अधिकारी, चतरा के अधीन नहीं आता और वे उनके आदेश मानने के लिए बाध्य नहीं हैं। आरोप है कि शिकायत करने वाले अभिभावकों से यह भी कहा गया कि “जहां जाना है जाइए, हमारा कुछ नहीं होगा।” विद्यालय पर शैक्षणिक सामग्री को लेकर भी मनमानी का आरोप लगा है। अभिभावकों के अनुसार, कॉपी, किताब, टाई, बेल्ट, डायरी समेत अन्य सामग्री केवल विद्यालय द्वारा निर्धारित दुकान से ही खरीदने का दबाव बनाया जा रहा है। इससे अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है तथा शासनादेशों की अनदेखी हो रही है। अभिभावकों ने आरोप लगाया कि जिलाधिकारी सोनभद्र के निर्देशों की भी खुलेआम अवहेलना की जा रही है। वहीं जिला विद्यालय निरीक्षक से शिकायत करने पर भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। अभिभावकों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि जिला शुल्क नियामक समिति द्वारा फीस वृद्धि की जांच कराई जाए तथा वर्ष 2018 के फीस नियामक अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाए। साथ ही शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के तहत बच्चों को तत्काल विद्यालय में प्रवेश दिलाने, किताब-ड्रेस खरीदने की बाध्यता समाप्त करने तथा दोषी विद्यालय प्रबंधन के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की गई है। इस संबंध में विद्यालय के प्रिंसिपल से पक्ष जानने का प्रयास किया गया, लेकिन मोबाइल संपर्क नहीं हो पाने के कारण उनका पक्ष प्राप्त नहीं हो सका। मामले को लेकर अभिभावकों में रोष व्याप्त है। उनका कहना है कि यदि शिक्षा संस्थान ही मनमानी करेंगे और जिम्मेदार अधिकारी मौन रहेंगे, तो आम जनता न्याय की उम्मीद किससे करे। अब सबकी निगाहें जिला प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं।

Pramod Gupta
Author: Pramod Gupta

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