October 26, 2026 11:32 pm

मेडिकल स्टोर की आड़ में चल रहा मौत का कारोबार झोलाछाप डॉक्टरों के भरोसे आदिवासियों की जिंदगी

सोनभद्र (बीजपुर) ऊर्जांचल के बीजपुर क्षेत्र में इन दिनों स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर अवैध उगाही और जानलेवा इलाज का खेल धड़ल्ले से चल रहा है। क्षेत्र के बीजपुर बाजार समेत डोडहर, नेमना, चेतवा, सिरसोती, जरहा, बकरिहवा, महुली, बकामोड़, पिंडारी जैसे ग्रामीण इलाकों में मेडिकल स्टोर की आड़ में झोलाछाप डॉक्टरों ने अपनी अवैध दुकानें सजा रखी हैं। दवा बेचने के लाइसेंस की आड़ में ये कथित डॉक्टर गरीब आदिवासी मरीजों के जीवन के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। बीजपुर बाजार में तो स्थिति बेहद चौंकाने वाली है सूत्रों के मुताबिक यहाँ एक बहुचर्चित मेडिकल स्टोर की आड़ में पूरा नर्सिंग होम संचालित किया जा रहा है। दिखावे के लिए ऊपर मेडिकल की दुकान है लेकिन नीचे तहखाने में कई बेड लगाकर अवैध अस्पताल चलाया जा रहा है। वहीं बाजार के ही एक अन्य मेडिकल स्टोर संचालक ने अपनी दुकान में पैथोलॉजी सेंटर तक खोल रखा है और खुद ही डॉक्टर बनकर मरीजों का इलाज कर रहा है हद तो तब हो गई जब इसी मेडिकल स्टोर में एक गृहणी महिला खुद को ‘स्त्री रोग विशेषज्ञ’ बताकर महिलाओं का इलाज करती पाई गई। लापरवाही की हदें केवल बाजार तक सीमित नहीं हैं। बीजपुर पुनर्वास के डोडहर मोड़ पर स्थित एक मेडिकल स्टोर संचालक ने तो नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए अपने घर को ही अस्पताल बना लिया है। यहाँ बिना किसी मानक और अनुमति के घर के अंदर एक्स-रे मशीन लगाकर मरीजों का एक्स-रे किया जा रहा है। इतना ही नहीं गंभीर हालत वाले मरीजों को रेफर करने की बजाय उन्हें घर के अंदर ही भर्ती कर इलाज किया जा रहा है जिससे कई बार स्थिति अनियंत्रित हो जाती है। ग्रामीण इलाकों में झोलाछाप डॉक्टरों का आतंक और भी भयावह है। यहाँ इलाज बीमारी देखकर नहीं बल्कि मरीज की जेब देखकर किया जाता है। ग्रामीणों का आरोप है कि ये डॉक्टर मरीजों से खुलेआम पूछते हैं कि 50 रुपये वाला इलाज कराना है या 100 वाला सस्ते इलाज के चक्कर में कई मरीज अपनी जान गंवा बैठते हैं। गलत इलाज के चलते कई आदिवासी मरीज असमय ही काल के गाल में समा चुके हैं लेकिन प्रशासन मौन है। स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसा नहीं है कि स्वास्थ्य विभाग को इसकी जानकारी नहीं है। शिकायतों के बाद विभाग की टीम आती जरूर है लेकिन कार्रवाई के नाम पर महज खानापूर्ति कर लौट जाती है। मिलीभगत के चलते इन झोलाछाप डॉक्टरों के हौसले बुलंद हैं और अवैध क्लीनिकों का यह धंधा फल-फूल रहा है। ​अब देखना यह है कि जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग इन ‘मौत के सौदागरों’ पर कब तक नकेल कस पाता है या फिर गरीब आदिवासी यूं ही इनके गलत इलाज का शिकार होते रहेंगे।

Pramod Gupta
Author: Pramod Gupta

Hello

Share this post:

खबरें और भी हैं...

लाइव क्रिकट स्कोर

कोरोना अपडेट

Weather Data Source: Wetter Indien 7 tage

राशिफल

error: Content is protected !!