– बरेली जुम्मे की नमाज़ को शांतिपूर्वक संपन्न कराने के लिए कड़े इंतज़ाम।
– 1200 से अधिक जवान, 10 कंपनी PAC और अर्धसैनिक बल तैनात
बरेली (समर सैम) बरेली में जुम्मे की नमाज़ को शांति और सौहार्दपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए प्रशासन ने इस बार बेहद कड़े इंतज़ाम किए हैं। हाल के दिनों में कुछ जगहों पर तनावपूर्ण हालात देखने को मिले थे, ऐसे में ज़िला प्रशासन और पुलिस ने किसी भी अप्रिय स्थिति से बचने के लिए व्यापक रणनीति अपनाई है। शहर के अलग-अलग हिस्सों में 1200 से अधिक पुलिस जवानों के साथ-साथ 10 कंपनी पीएसी और अर्धसैनिक बल तैनात किए गए हैं। यह संख्या अपने आप में बताती है कि प्रशासन इस बार किसी भी लापरवाही या ढिलाई के मूड में नहीं है। डीआईजी अजय साहनी, एसपी अनुराग आर्य, एसपी सिटी पारीक और अंशिका वर्मा खुद मैदान में उतरकर निगरानी कर रहे हैं। यह सक्रियता इस बात का संदेश देती है कि ऊपरी स्तर से लेकर जमीनी स्तर तक पुलिस और प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है। यही नहीं, मस्जिदों के आसपास सुरक्षा का विशेष घेरा बनाया गया है और पुलिस बल को रणनीतिक स्थानों पर तैनात किया गया है। जगह-जगह बैरिकेडिंग, चेकिंग और पैदल गश्त के जरिए सुरक्षा कवच को और मजबूत किया गया है।इस बार एक खास बात यह भी देखने को मिली कि फ्लैग मार्च लगातार आयोजित किए जा रहे हैं। इसका दोहरा असर पड़ता है — एक ओर यह आम जनता में सुरक्षा की भावना जगाता है, वहीं शरारती तत्वों को यह स्पष्ट संदेश देता है कि कानून-व्यवस्था से खिलवाड़ करने की किसी भी कोशिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सम्पादकीय दृष्टिकोण से देखें तो यह इंतज़ाम केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखने का प्रयास नहीं है, बल्कि सामाजिक सद्भाव को भी बनाए रखने की ज़िम्मेदारी का हिस्सा है। धार्मिक आयोजनों के दौरान प्रशासन की सतर्कता आवश्यक होती है ताकि आस्था का माहौल बिगाड़ने की कोशिश करने वालों को कोई मौका न मिले। बरेली प्रशासन ने समय रहते कठोर और संतुलित कदम उठाकर यह साबित किया है कि शांति सर्वोपरि है।यह भी ध्यान देने योग्य है कि पुलिस की सक्रियता तभी प्रभावी साबित होगी जब नागरिक समाज भी सहयोग करेगा। मस्जिदों के इमामों, स्थानीय समाजसेवियों और युवाओं की ज़िम्मेदारी है कि वे शांति का संदेश दें और अफवाहों से दूर रहें। आखिरकार, सुरक्षा बल केवल व्यवस्था संभाल सकते हैं, लेकिन आपसी विश्वास और भाईचारा जनता ही कायम रख सकती है। कुल मिलाकर, बरेली का यह कदम एक मिसाल है कि प्रशासनिक सतर्कता और जनसहयोग मिलकर हर चुनौती को आसानी से पार कर सकते हैं। जुम्मे की नमाज़ शांति से संपन्न हो, यही सभी की अपेक्षा और प्राथमिकता होनी चाहिए।
Author: Pramod Gupta
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