कुंडा (समर सैम) विजयादशमी के पर्व पर जहाँ देशभर में शक्ति की पूजा की परंपरा निभाई जाती है, वहीं उत्तर प्रदेश की राजनीति में इस बार शस्त्र पूजन ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। कुंडा के विधायक और चर्चित बाहुबली नेता रघुराज प्रताप सिंह उर्फ़ राजा भैया ने अपने बेंती महल में भव्य शस्त्र पूजन कार्यक्रम आयोजित किया, जिसमें 200 से अधिक हथियारों का सार्वजनिक प्रदर्शन किया गया। यद्यपि शस्त्र पूजा भारतीय परंपरा का हिस्सा है, लेकिन सवाल यह है कि क्या लोकतांत्रिक व्यवस्था में किसी जनप्रतिनिधि द्वारा खुलेआम हथियारों के जखीरे का प्रदर्शन केवल धार्मिक कर्मकांड है या शक्ति प्रदर्शन? इस बहस को और तीखा तब कर दिया, जब राजा भैया की पत्नी भानवी सिंह ने स्वयं उन पर अवैध हथियारों का जखीरा रखने का गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने फोटो, वीडियो और लिखित आरोप सार्वजनिक किए, जो सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हुए। इन आरोपों और अब वायरल हो रहे शस्त्र पूजन के दृश्यों ने कानून-व्यवस्था और शासन की कार्यशैली पर कई प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं। भानवी सिंह का दावा है कि महल में छिपाकर रखे गए कई असलहे गैर-कानूनी हैं। सामान्य परिस्थितियों में ऐसा आरोप किसी आम नागरिक पर लगे तो पुलिस तत्काल छानबीन करती। लेकिन उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार अब तक चुप्पी साधे हुए है। न कोई आधिकारिक बयान, न कोई जांच की घोषणा। सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यूपी की सरकार में कुछ खास लोगों पर कानून लागू नहीं होता? क्या बाहुबल और राजनीति का गठजोड़ कानून से ऊपर है? यदि राजा भैया निर्दोष हैं तो शासन-प्रशासन को स्पष्ट जांच कर आरोपों का खंडन करना चाहिए, ताकि अफवाहों और आशंकाओं पर विराम लगे। और यदि आरोपों में सच्चाई है तो कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। लोकतंत्र में कानून सबके लिए बराबर होता है- चाहे वह आम नागरिक हो या प्रभावशाली नेता। योगी सरकार को यह सिद्ध करना होगा कि उसकी कानून के राज की नीति केवल नारेबाज़ी नहीं है, बल्कि वास्तविकता है। वरना यह चुप्पी ही आने वाले समय में सरकार की छवि पर बड़ा दाग बन सकती है।
Author: Pramod Gupta
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