वतन के नाम पे निकली जो जवानी की लहर,
मैदान में चमक उठे जैसे सूरज की नज़र।
प्रयागराज (समर सैम) एशिया कप में भारत- पाकिस्तान का मुकाबला हमेशा से रोमांच और जज़्बातों का संगम रहा है। इस बार भारत ने पाकिस्तान को 6 विकेट से हराकर दूसरी ऐतिहासिक जीत दर्ज की और पूरे देश का सिर गर्व से ऊँचा कर दिया। यह जीत महज़ क्रिकेट की नहीं, बल्कि एक राष्ट्रीय भावना की जीत थी। हर गली–मुहल्ला, हर घर और हर दिल इस जीत की धड़कन से गूंज उठा। प्रयागराज का ठठेरी बाज़ार इस जश्न का सबसे बड़ा मंच बना। जीत की घोषणा होते ही पटाखों की गूंज ने आसमान को रंगीन कर दिया। लोग तिरंगे लहराते हुए नाचने लगे, ढोल–नगाड़ों की थाप पर युवाओं ने विजयगीत गाए। महिलाएँ घरों से निकलकर मिठाइयाँ बाँटने लगीं और बच्चों ने तिरंगा लिए गलियों में दौड़कर अपनी खुशी का इज़हार किया। नवरात्रि की पावन बेला में इस जीत को लोगों ने विजयदशमी का प्रतीक मान लिया। आम लोगों ने कहा, जैसे दशहरा पर रावण का दहन होता है, वैसे ही भारत ने पाकिस्तान के घमंड का दहन कर दिया। इस उपमा में भारतीय जनमानस की गहरी भावनाएँ झलकती हैं। वीडियो में दिखाई दे रहा था कि कैसे लोग पटाखे दागते हुए पाकिस्तान मुर्दाबाद और भारत ज़िंदाबाद के नारे लगा रहे थे। तेल लगाओ डाबर का, नाम मिटाओ बाबर का जैसे जुमले माहौल को और जोशीला बना रहे थे। यह नारे महज़ शब्द नहीं, बल्कि उस ऐतिहासिक प्रतिस्पर्धा का प्रतीक हैं जो दशकों से भारत- पाकिस्तान क्रिकेट में जीवित रही है। युवाओं ने इस जीत को नवरात्रि की विजयश्री बताया। उनका मानना था कि जैसे माँ दुर्गा असुरों का वध करती हैं, वैसे ही भारतीय खिलाड़ियों ने पाकिस्तान की ताक़त और घमंड का अंत कर दिया। दुकानदारों ने राहगीरों को जश्न में शामिल होने का न्योता दिया, मिठाइयाँ बाँटी और पूरा इलाका मानो किसी राष्ट्रीय पर्व में तब्दील हो गया। यह जीत केवल क्रिकेट तक सीमित नहीं रही। इसने साबित किया कि भारत जब मैदान में उतरता है, तो उसके पीछे 140 करोड़ दिलों की दुआएँ और जज़्बात खड़े होते हैं। प्रयागराज के लोग इस जीत के माध्यम से यह संदेश दे रहे थे कि राष्ट्र की असली ताक़त उसकी एकजुटता में है। भारत की यह दूसरी ऐतिहासिक जीत आने वाली पीढ़ियों के लिए भी प्रेरणा बनेगी। यह याद दिलाएगी कि कठिन से कठिन दुश्मन को भी टीमवर्क, आत्मविश्वास और देशप्रेम की भावना से हराया जा सकता है। आज प्रयागराज में जो ढोल बजे, जो पटाखे फूटे और जो नारों की गूंज उठी, वह सिर्फ़ एक मैच की जीत का जश्न नहीं था, बल्कि उस गौरव का उत्सव था जिसे हर भारतीय अपने दिल में महसूस कर रहा है।
जिसे देख तिरंगा लहराए तो दिल में शान हो,
ऐसी जीत हर बार मिले, यही अरमान हो।
Author: Pramod Gupta
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