– IPS नीतू और अधिवक्ता की वायरल हॉट टॉक- कानून की धज्जियाँ और पुलिस का अपराधीकरण।
प्रयागराज (समर सैम) हाल ही में वायरल हुई वीडियो में IPS नीतू और एक अधिवक्ता के बीच हुई बातचीत ने न केवल सोशल मीडिया पर हलचल मचा दी है, बल्कि यह सवाल भी खड़ा कर दिया है कि क्या हमारे कानून और न्याय व्यवस्था के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। वीडियो में दोनों के बीच तीखी बहस और हॉट टॉक का दृश्य ऐसा था, जिसे देखकर यह लगने लगा कि पुलिस और वकील दोनों ही कानून को हाथ में लेने से गुरेज नहीं कर रहे। पुलिसकर्मियों द्वारा IPS नीतू के समर्थन में अभियान चलाना इस बात का संकेत है कि कानून और प्रशासन के भीतर सत्ता और दबाव के खेल की गहरी परतें मौजूद हैं। जब पुलिस अधिकारी अपने अधिकारियों के लिए सोशल मीडिया पर मुहिम चला सकते हैं, तो यह साफ़ इशारा है कि पेशेवर कर्तव्य और व्यक्तिगत समर्थन के बीच की रेखा धुंधली होती जा रही है। यह केवल व्यक्तिगत झगड़े का मामला नहीं है, बल्कि समाज में कानून और न्याय की भावना पर असर डालने वाला गंभीर विषय बन गया है। वहीं अधिवक्ताओं का भी कानून को अपने तरीके से लागू करने का रवैया चिंता का विषय है। कोर्ट और न्यायालय कानून की अंतिम शरणस्थली होते हैं, लेकिन अगर वकील और पुलिस दोनों ही कानून को नजरअंदाज कर अपने अधिकार या स्थिति का इस्तेमाल कर रहे हैं, तो इसका परिणाम कानून की अवमानना और आम जनता के लिए असुरक्षा के रूप में सामने आता है। विशेष रूप से यह मामला तब और संवेदनशील बन जाता है, जब यह उत्तर प्रदेश सरकार के शासनकाल में सामने आया है। योगी आदित्यनाथ सरकार में पुलिस की भूमिका पर लगातार सवाल उठते रहे हैं। पुलिस अपराध और भ्रष्टाचार के मामलों में सक्रिय रूप से कार्रवाई कर रही है, लेकिन अगर यही पुलिस अपने अधिकार और शक्ति का इस्तेमाल व्यक्तिगत विवादों या पदोन्नति, सम्मान और दबाव के लिए करने लगे, तो इसे अपराधीकरण कहा जा सकता है। IPS नीतू के लिए सोशल मीडिया पर पुलिसकर्मियों द्वारा मुहिम चलाना यह दिखाता है कि पुलिस अधिकारी अब केवल कानून के प्रवर्तनकर्ता नहीं रहे, बल्कि राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव के माध्यम से अपनी शक्ति का प्रदर्शन कर रहे हैं। यह समाज में कानून की निर्भीकता और निष्पक्षता पर सवाल उठाता है। वहीं, वकील समुदाय का भी ऐसी बहस में शामिल होना यह संकेत देता है कि न्याय और कानून के प्रति उनकी प्रतिबद्धता कहीं कमजोर पड़ गई है। समाज में कानून का सम्मान तभी बनता है जब पुलिस और वकील दोनों अपने पेशेवर कर्तव्यों का पालन निष्पक्षता और जिम्मेदारी के साथ करें। यदि किसी भी स्तर पर यह संतुलन बिगड़ता है, तो जनता में कानून और न्याय व्यवस्था के प्रति अविश्वास पैदा होता है। इस वायरल वीडियो ने सिर्फ व्यक्तिगत विवाद को उजागर नहीं किया, बल्कि यह संकेत दिया कि सत्ता, दबाव और व्यक्तिगत लाभ की राजनीति कानून को किन किन तरीकों से प्रभावित कर रही है। अंततः यह जरूरी है कि यूपी सरकार और योगी आदित्यनाथ प्रशासन इस मामले की गंभीरता को समझे। पुलिस और वकील दोनों को यह संदेश देना होगा कि कानून का उल्लंघन या शक्ति का दुरुपयोग सहन नहीं किया जाएगा। सामाजिक और कानूनी व्यवस्था के लिए यह अत्यंत आवश्यक है कि कानून के प्रवर्तन और न्यायपालिका दोनों निष्पक्ष और सम्मानजनक तरीके से काम करें। अगर ऐसा नहीं हुआ, तो यह केवल IPS नीतू और वकील की व्यक्तिगत बहस का मुद्दा नहीं रहेगा, बल्कि पूरे समाज में कानून के प्रति अविश्वास और पुलिस के अपराधीकरण की चिंता का विषय बन जाएगा।
Author: Pramod Gupta
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