कौशाम्बी। कौशांबी जिले में मानवता को शर्मसार करने वाली घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं। अभी कुछ ही दिन पहले बाइक पर शव ले जाने की तस्वीरें और वीडियो ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया था। यह मामला पूरी तरह शांत भी नहीं हो पाया था कि अब नगर पालिका परिषद भरवारी क्षेत्र से एक और शर्मनाक तस्वीर सामने आई है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रही फोटो और वीडियो में स्पष्ट देखा जा सकता है कि एक शव को कूड़ा ढोने वाली नगरपालिका की गाड़ी में रखकर श्मशान घाट ले जाया जा रहा है। यह दृश्य न सिर्फ अमानवीयता की पराकाष्ठा को दर्शाता है, बल्कि प्रशासन और जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही को भी उजागर करता है। स्थानीय लोगों के अनुसार, नगर पालिका परिषद भरवारी के कर्मियों द्वारा मृतक का शव उठाकर सीधा कूड़ा ढोने वाली गाड़ी में डाल दिया गया और फिर उसी वाहन से श्मशान ले जाया गया। लोगों का कहना है कि गरीब और बेसहारा होने की वजह से शव को अंतिम संस्कार के लिए ले जाने के साधन उपलब्ध नहीं कराए गए। इस दौरान मौके पर मौजूद लोगों ने इस अमानवीय दृश्य को अपने मोबाइल कैमरे में कैद कर सोशल मीडिया पर डाल दिया। देखते ही देखते यह तस्वीरें तेजी से वायरल हो गईं और जिलेभर में हड़कंप मच गया। जैसे ही मामला वायरल हुआ, प्रशासनिक महकमे में खलबली मच गई। अधिकारियों ने मामले की जानकारी उच्चाधिकारियों तक पहुंचाई और आनन-फानन में जांच बैठा दी गई। नगर पालिका प्रशासन ने सफाई में कहा कि संबंधित कर्मचारी की बड़ी लापरवाही है और उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। लेकिन सवाल यह है कि जब प्रदेश सरकार द्वारा शव वाहन (Hearse Van) तक की व्यवस्था की गई है, तो फिर आमजन को ऐसी अमानवीय स्थिति का सामना क्यों करना पड़ रहा है? यह घटना साफ तौर पर दिखाती है कि तंत्र की नाकामी और लापरवाही किस हद तक लोगों की गरिमा को ठेस पहुंचा रही है। इंसान की मौत के बाद उसका अंतिम संस्कार आदर और सम्मान के साथ किया जाना चाहिए, लेकिन कौशांबी में शव को कूड़े की गाड़ी में ढोना मानवीय संवेदनाओं के साथ क्रूर मज़ाक है। स्थानीय लोगों ने आक्रोश जताते हुए कहा कि प्रशासन सिर्फ आश्वासन देता है, लेकिन जमीनी स्तर पर व्यवस्था दुरुस्त नहीं है।जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों ने भी इस घटना पर नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि यह घटना न केवल मानवता को शर्मसार करने वाली है बल्कि शासन-प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है। गरीब और असहाय वर्ग के लोग अक्सर ऐसी परिस्थितियों का शिकार होते हैं। यदि प्रशासनिक अधिकारी और जिम्मेदार संस्थाएं समय रहते जरूरी इंतजाम करें तो ऐसी घटनाओं को रोका जा सकता है। प्रदेश सरकार बार-बार गरीबों और असहाय लोगों के लिए योजनाएं और सुविधाएं मुहैया कराने का दावा करती है, लेकिन कौशांबी की यह घटना उन दावों की पोल खोलती नजर आती है। सवाल यह है कि क्या जिम्मेदार अधिकारी और कर्मचारी इस घटना से सबक लेकर भविष्य में ऐसी शर्मनाक स्थिति की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम उठाएंगे, या फिर यह मामला भी महज एक जांच और आश्वासन तक सीमित रह जाएगा। यह घटना एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करती है कि प्रशासनिक व्यवस्था में मानवीय संवेदनाओं का स्थान कहां खो गया है। जरूरत है कि शासन-प्रशासन इस अमानवीय व्यवहार पर कठोर कार्रवाई करे और ऐसी व्यवस्था बनाए कि मृतक का अंतिम संस्कार सम्मानपूर्वक और गरिमा के साथ हो सके।
Author: Pramod Gupta
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