लखनऊ (समर सैम) रेलवे के टेंडरों में फर्जीवाड़े का एक बड़ा मामला सामने आया है। सीबीआई की एंटी करप्शन ब्रांच ने लखनऊ और वाराणसी स्थित उत्तर रेलवे और पूर्वोत्तर रेलवे के मंडल कार्यालयों पर देर रात छापेमारी कर 10 से अधिक फर्जी एफडीआर (सावधि जमा रसीदें) बरामद की हैं। बताया जा रहा है कि टेंडर हासिल करने के लिए ठेकेदारों ने असली बैंक गारंटी की जगह नकली एफडीआर जमा की थीं। जांच अधिकारियों के अनुसार, छापेमारी के दौरान संदिग्ध दस्तावेज, फर्जी प्रमाणपत्र और फर्जी बैंक रसीदें भी मिली हैं। सीबीआई अधिकारियों का कहना है कि यह एक सुनियोजित धोखाधड़ी है, जिसमें कई ठेकेदार और संभवतः रेलवे के कुछ कर्मचारी भी शामिल हो सकते हैं। फिलहाल सभी जब्त दस्तावेजों की गहन जांच की जा रही है और आरोपियों की पहचान सुनिश्चित करने की कोशिश जारी है। रेलवे ठेकेदारों द्वारा टेंडरों की दौड़ में आगे निकलने के लिए इस तरह का फर्जीवाड़ा पहली बार सामने नहीं आया है, लेकिन इस बार मामले का पैमाना बड़ा बताया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, सीबीआई जल्द ही नकली गारंटी जमा करने वाले ठेकेदारों पर मुकदमा दर्ज करेगी। रेलवे प्रशासन ने भी इस मामले को गंभीरता से लेते हुए आंतरिक जांच शुरू कर दी है। रेलवे परियोजनाओं में हजारों करोड़ रुपये का बजट खर्च होता है। ऐसे में यदि ठेके फर्जी गारंटी के आधार पर दिए जाते हैं तो न केवल भ्रष्टाचार बढ़ेगा बल्कि निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर भी सवाल उठेगा। आम जनता को असुरक्षित और अधूरे प्रोजेक्ट्स का खामियाजा भुगतना पड़ सकता है। इस मामले ने रेलवे प्रशासन और ठेकेदारों की मिलीभगत पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
Author: Pramod Gupta
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