सोनभद्र:सूबे की आकांक्षी जिला के आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र में स्वास्थ्य विभाग की नकेल कसती कम खुलती ज्यादा दिख रही है।ताजा मामला दुद्धी कस्बे का है जहां विगत एक सप्ताह में एडिशनल सीएमओ में दो बार अस्पतालों का निरीक्षण किया इस दौरान ओटी शील किए ,अस्पताल संचालक को चेतावनी दी,कुछ संचालकों पर विधिक कार्यवाही करने की बात कही लेकिन इन के बावजूद भी सप्ताह में दूसरी बार आए एसीएमओ गुलाब शंकर यादव ने एक राधा रानी नाम से चल रहे बगैर पंजीयन के अस्पताल में आधा दर्जन मरीज भर्ती मिले,हद तो हुई जब जांच के दौरान उसमें तीन मरीज आपरेशन किए हुए पाए गए।जिसके दो डिलेवरी केस शामिल थे।आखिर स्वास्थ विभाग क्षेत्र में ऐसा कारनामा क्यों करा रही है जिससे शासन की छवि धूमिल हो रही है।गैर पंजीकृत एक दर्जन से अधिक अस्पताल जहां छोलछाप डॉक्टर मरीजों का खून चूस रहे है,कभी कभी जान भी ले ले रहे है इन अस्पतालों पर बुलडोजर क्यों नहीं चल रहा।क्षेत्र के संभ्रांत लोगों ने जिलाधिकारी से अनुरोध किया है कि दुद्धी कस्बे में संचालित अस्पतालों/डायग्नोस्टिक सेंटर और पैथोलॉजी सहित उन डॉक्टरों की भी जांच हो जिनके नाम पर अस्पताल संचालित हो रहे है।एडिशनल ने केवल दो उन पैथोलॉजी सेंटर को शील किया जिसमें एक गुमटी में संचालित था दूसरे की फेंचाइजी बल्ड कलेक्शन सेंटर था उनके अलावा भी कई पैथोलॉजी सेंटर थे जिनकी जांच आज उन्होंने नहीं किया।पूछने पर बताया कि शेड्यूल बिजी है हर जगह जाना संभव नहीं है लेकिन उनको संचालकों के हमदर्दों से गुफ्तगू का समय था।विगत कुछ वर्षों से जांच के नाम पर खानापूर्ति की ही देन है कि कोई भी अस्पताल खोल कर बैठ जा रहा है और आदिवासी जनता को बहला फुसलाकर ईलाज के नाम पर शोषण कर रहा है।योगी सरकार में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर विगत सरकारों से बहुत अच्छी व्यवस्था हो गई है , यहां डॉक्टर है लैब है दवाइयां है लेकिन संबंधित विभाग के अफसर /डॉक्टर योजनाओं का लाभ ठीक से न दिलाकर सरकार की छवि धूलिया करने और फर्जी अस्पताल चलवाने की ठान लिए है।

शनिवार को एसीएमओ ने कहा था उन चिकित्सकों पर मुकदमा दर्ज होगा जो बिना नाम के अस्पताल चला रहे है,लेकिन अभी तक एड्रेस वेरिफाई ही कर रहे है।









