– ट्रक ऑनर्स एसोसिएशन के शकुनि चाल में पिस रहे खनन अधिकारी
सोनभद्र (समर सैम) पासर से ट्रक मालिक बने मोटर मालिकों ने ज्येष्ठ खान अधिकारी सोनभद्र को ही पासर बना दिया। बाकायदा फर्जी शिकायती पत्र आलाधिकारियों को प्रेषित कर ज्येष्ठ खान अधिकारी पर बिना परमिट ओवरलोड ट्रकों को पास कराने का लगाया गंभीर आरोप। हालांकि जिन लोगों के नाम से लिखित शिकायत की गई है उन्होंने इस शिकायती पत्र को फर्जी बताते हुए सफाई दी है कि हम लोगों ने इस तरह की कोई भी शिकायत खनिज विभाग और ज्येष्ठ खान अधिकारी के विरुद्ध नहीं कि है। हम लोगों से ईर्ष्या रखने वाले मोटर एसोसिएशन के पदाधिकारी की ये कार गुजारी है। ज्येष्ठ खान अधिकारी की नज़रों में नीचा दिखाने के लिए उसने यह शातिर चाल को अंजाम देते हुए हम लोगों के नाम से फर्जी इल्ज़ाम लगाया है।
ट्रक ऑनर्स एसोसिएशन सोनभद्र में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप लगाया जा रहा है। यही नहीं बहुत से ट्रक मालिकों के द्वारा एसोसिएशन के अध्यक्ष को अध्यक्ष मानने से ही इंकार कर दिया गया। जनपद सोनभद्र अपने खनन के लिए सम्पूर्ण पूर्वांचल में विख्यात है। ऐसे में खनन सेक्टर और खनिज विभाग जनपद की बोन मैरो है। यही वजह है कि खनन सेक्टर हमेशा से चर्चा में बना रहता है। खनन के बदौलत सड़क पर धूल फाँकने वाले न जाने कितने लोग दर्जनों ट्रकों के मालिक बन बैठे। खैर जनपद में खनिज विषय हमेशा से सुर्खियों में बना रहता है। ट्रक एसोसिएशन के अध्यक्ष को ट्रक खरीदने में तकरीबन दो लाख रुपये की छूट मिलती है। वहीं आरटीओ की इंट्री से भी अध्यक्ष की ट्रकों को छूट मिलती है। इस तरह से बेरोकटोक अध्यक्ष की ट्रकें सड़क पर फर्राटा भरती है। ऐसे में सुविधा भोगी अध्यक्ष बनाम कुछ अदर्स ट्रक मालिकों के बीच नूरा कुश्ती चलती रहती है। ऐसे में ट्रक मालिकों में से किसी ने कुछ ट्रक मालिकों के नाम से जिला खनिज अधिकारी सोनभद्र की शिकायत आलाधिकारियों से कर दी। फर्जी लिखित शिकायती पत्र में बाकायदा ज्येष्ठ खान अधिकारी पर गंभीर आरोप लगाये गए हैं। तहरीर में कहा गया है कि ज्येष्ठ खान अधिकारी बिना परमिट के ओवरलोड वाहन पास कराते हैं। अब ज्येष्ठ खान अधिकारी की भूमिका पासर की हो गई है। मोटर मालिकों के आपसी खींच तान में अधिकारियों को बलि का बकरा बनाया जा रहा है। ये सारी क़वायद एक दूसरे को नीचा दिखाने की है। लेकिन इस नूराकुश्ती में ज्येष्ठ खान अधिकारी को लपेटना कहीं से उचित नहीं लगता। दिलचस्प बात यह है कि शिकायती पत्र की तिथि में ज्येष्ठ खान अधिकारी लगातार चौबिस घण्टे ड्यूटी पर सघन वाहन चेकिंग अभियान में लगे थे। कुछ वाहनों को सीज भी किया। यह सब करते हुए तमाम अराजगतत्वों द्वारा कारों से उनके इर्दगिर्द चक्कर लगाकर डरवाने का भी प्रयास किया गया। परन्तु ज्येष्ठ खान अधिकारी बिना डरे अपने फ़र्ज़ को अंजाम देते रहे। इतना सब कुछ होने के बाद भी पुलिस से उचित मदद नहीं मिल पाती। रात्रि में खनिज से लदे वाहनों की जांच के लिए जाते समय एक पुलिस कर्मी ने खान अधिकारी से कहा कि वहां न जायें वरना उनके ऊपर कुछ लोग पत्थरों से हमला कर सकते हैं। पुलिस का काम है कि कानून का इकबाल बुलन्द करे। न कि अधिकारियों का मोरल डाउन करे। पुलिस को दल बल के साथ अधिकारियों को भय मुक्त कार्य करने की राह हमवार करनी चाहिए। पुलिस की उदासीनता अवैध खनिज परिवहन को बढ़ावा दे रही है। इतना सब कुछ होने के बाद भी लगातार तीन दिनों से ज्येष्ठ खान अधिकारी सड़क पर अवैध खनिज परिवहन को रोकने के लिए बैडमिंटन की चिड़िया की तरह इधर से उधर भागते रहे। इसके बाद भी अधिकारी गंभीर इल्ज़ाम की जद में आ गए। मोटर मालिकों के आपसी जूतमपैजार में फर्जी शिकायती पत्र आलाधिकारियों को प्रेषित करते हुए अधिकारी को पासर बना दिया गया।
Author: Pramod Gupta
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