(अरविंद गुप्ता)
रामगढ सोनभद्र पन्नुगंज गांव स्थित कांन्हा पैलेस में चल रही सात दिवसीय श्रीमद भागवत कथा के तीसरे दिन बुधवार को कथा सुनकर श्रोता भावुक हो गए कथा आचार्य पंडित आशुतोष जी महाराज ने प्रसंग को सुनाते हुए बताया कि अयोध्या के राजा दशरथ गुरु वशिष्ट के परामर्श से प्रभु राम के तिलक की तैयारी में जुटे थे वहां महाराज दशरथ को मुर्छित हुए देख वे माता कैकेई से मूर्छित होने का कारण पूछते हैं कैकेयी बताती है कि हे राम महाराज से उनके द्वारा दिये गए वरदान को मैंने मांगा महराज इस बात को बर्दाश्त नहीं कर सके और मूर्छित होकर जमीन पर गिर पड़े राम पिता के पास गए और कहा कि पिता जी आपके आदेशानुसार मैं आपके पास आया हूं। मुझे क्या आज्ञा है। इतना सुनते ही महाराज पुनः मूर्छित हो गए गुरू वशिष्ठ के आश्रम में जाकर उनसे वन जाने की आज्ञा लेकर रथ पर बैठकर वन जाने लगे। राम के वन जाने का समाचार सुनकर पूरे अयोध्यावासी राजमहल की ओर दौड़ पडे, रास्ते में श्रीराम लक्ष्मण सीता का रथ आते देखकर सभी नर नारी रथ के सामने खडे. होकर आंखों में आंसू लिए अपने प्रिय राजा से वन न जाने के लिए आग्रह करने लगे। राम ने सबको समझाबुझा कर शांत किया और सारथी से रथ हांकने का आदेश दिया। थोड़े समय बाद श्रीराम अपने भ्राता लक्ष्मण और भार्या सीता श्रीराम वन गमन की कथा सुन भावुक हुए आंखें,श्रीमद भागवत कथा के दौरान कथा समिति के अध्यक्ष रोहित अग्रवाल, राधेश्याम अग्रवाल, राकेश अग्रवाल, सोनू अग्रवाल, हरिश चंद्र अग्रवाल समेत क्षेत्रीय माताएं बहने मौजूद रहे









