November 30, 2025 8:31 am

आवेदन के 13 दिन बाद जारी किया गया लाइसेंस बना चर्चा का विषय, उठ रहा सवाल

P9 भारत न्यूज़

– सूत्रों का आरोप , सुविधा शुल्क दीजिए, ड्राइविंग लाइसेंस लीजिए की तर्ज पर चल रहा खेल

– प्रति माह लाखो की हो रही अवैध वसूली, उच्च स्तरीय जांच से खुल सकता है मामला

– बीते 7 मार्च के एक आवेदन को आज तक क्यों रखा गया है पेंडिंग, हो जांच

सोनभद्र। फर्जी रिलीज आर्डर मामले में तत्कालीन एआरटीओ सहित अन्य पर हुई कार्यवाही के बाद भी उप संभागीय परिवहन अधिकारी कार्यालय में किस तरह भ्रष्टाचार हाबी है, इसका खुलासा करने के लिए आवेदन के करीब 13 दिन बाद जारी किया गया डाइविंग लाइसेंस पर्याप्त है। भरोसेमंद सूत्रों ने बताया कि सुविधा शुल्क दीजिए , ड्राइविंग लाइसेश लीजिए की तर्ज पर एआरटीओ कार्यालय सोनभद्र से सारे नियम कानून को ताख पर रखकर ड्राइविंग लाइसेंस जारी किया जा रहा है। एसे में जो व्यक्ति सुविधा शुल्क नही देता है, उसके आवेदन को 10_15 दिनों तक पेंडिंग में रखा जाता है। बाद सुविधा शुल्क मिलने पर उक्त आवेदन को संबंधित अधिकारी द्वारा पास कर दिया जाता है।
सूत्रों ने ऐसा ही एक मामला P9 भारत न्यूज के संज्ञान में लाया है। सूत्रों द्वारा दिए गए कागजाद के अनुसान, बीते 18 मार्च को कार्यालय अपना लाइसेंस बनवाने पहुंचा एक व्यक्ति आनलाइन फीस कटाने के बाद कार्यालय के अंदर बने कक्ष में फोटो खिचाया। लेकिन उक्त आवेदन पत्र को पास कराने के एवज में कार्यालय में बेधड़क घूम रहे दलालों को सुविधा शुल्क मौके पर नही दे सका। लिहाजा उसके आवेदन को संबंधित अधिकारी द्वारा रोक दिया गया। करीब 13 दिन बाद सुविधा शुल्क 1500 रुपए मिलने पर 30 मार्च को उक्त आवेदन को संबंधित अधिकारी द्वारा पास कर दिया गया। वही सुविधा शुल्क न मिलने की वजह से बीते 7 मार्च के एक आवेदन को आज तक पेंडिंग रखा गया है।
एसे में सवाल उठता लाजमी है कि बीते 18 मार्च के आवेदन को किन कारणों से करीब 13 दिनों तक संबंधित अधिकारी द्वारा पास नही किया गया। कहा जा रहा है कि यदि मामले की जिला प्रशासन स्तर पर उच्च स्तरीय जांच करा दी जाय तो फर्जी रिलीज आर्डर की तरह ही लाइसेश जारी करने के नाम पर संबंधितों द्वारा प्रतिमाह की जा रही लाखो की अवैध वसूली से पर्दा उठने के साथ ही भ्रष्टाचार में लिप्त अधिकारियो का चेहरा बेनकाब हो सकता है। उधर इस बाबत कार्यालय के सम्भागी निरीक्षक (प्राविधिक) आलोक कुमार यादव से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन वे अपने कार्यालय में मौजूद नही मिले। लिहाजा उनका पक्ष नही लिया जा सका। वही मामले को लेकर आरटीओ मिर्जापुर के सेलफोन पर काल किया गया, लेकिन नेटवर्क में न होने के कारण काल नही लगा। लिहाजा आरटीओ मिर्जापुर का भी पक्ष नही लिया जा सका।

Pramod Gupta
Author: Pramod Gupta

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