February 21, 2026 5:25 am

पर्यावरण की मार झेल रहे बिल्ली-मारकुंडी के निवासी, प्रदूषण से जीना हुआ दुश्वार- प्रशासन मौन

सोनभद्र। बिल्ली-मारकुंडी क्षेत्र में बढ़ते प्रदूषण से स्थानीय निवासियों का जीवन लगातार प्रभावित होता जा रहा है। धूल, धुआं और आसपास की औद्योगिक गतिविधियों से निकलने वाले प्रदूषक तत्वों के कारण लोगों को गंभीर पर्यावरणीय संकट का सामना करना पड़ रहा है, जिससे आम जनजीवन दुश्वार हो गया है। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि क्षेत्र में वायु गुणवत्ता लगातार खराब हो रही है, जिससे बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं में सांस संबंधी बीमारियां, आंखों में जलन, एलर्जी और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। लोगों का कहना है कि सुबह-शाम धूल की मोटी परत और हवा में धुएं की गंध के कारण घरों से बाहर निकलना तक मुश्किल हो गया है। ग्रामीणों के अनुसार प्रशासन को आम जनता के स्वास्थ्य और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्रदूषण नियंत्रण के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए, लेकिन अब तक इस गंभीर समस्या पर जिला प्रशासन की ओर से कोई प्रभावी कार्रवाई नजर नहीं आई है। इससे क्षेत्रवासियों में रोष और चिंता दोनों बढ़ते जा रहे हैं। क्षेत्र के निवासियों ने मांग की है कि बिल्ली-मारकुंडी में प्रदूषण की तत्काल जांच कराई जाए, प्रदूषण फैलाने वाली संबंधित इकाइयों पर सख्त कार्रवाई की जाए तथा नियमित रूप से सड़कों पर पानी का छिड़काव कराया जाए। साथ ही हरित पट्टी (ग्रीन बेल्ट) विकसित करने, धूल नियंत्रण के उपाय लागू करने और समय-समय पर स्वास्थ्य शिविर आयोजित कराने की भी मांग की गई है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी और ठोस कदम नहीं उठाए गए तो स्थिति और अधिक गंभीर हो सकती है और इसका सीधा असर लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ेगा। अब देखना यह है कि जिला प्रशासन इस गंभीर पर्यावरणीय समस्या पर कब संज्ञान लेता है और बिल्ली-मारकुंडी के निवासियों को प्रदूषण से राहत दिलाने के लिए क्या ठोस पहल करता है।

Pramod Gupta
Author: Pramod Gupta

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