सोनभद्र। रॉबर्ट्सगंज नगर का धर्मशाला चौक फ्लाईओवर इन दिनों विकास की एक अनोखी मिसाल पेश कर रहा है-ऐसी मिसाल, जिसे देखकर लगता है कि योजनाएँ यहाँ बनती ज़रूर हैं, पर निभाई नहीं जातीं। कुछ समय पूर्व फ्लाईओवर के नीचे सुंदरीकरण का कार्य बड़े उत्साह के साथ कराया गया। रेलिंग लगी, गमलों में पौधे सजे, “आई लव सोनभद्र” का आकर्षक सेल्फी बोर्ड स्थापित हुआ। लोगों ने तस्वीरें खिंचवाईं, सोशल मीडिया पर पोस्ट डालीं और लगा कि अब शहर सचमुच “स्मार्ट” होने की दिशा में कदम बढ़ा चुका है। लेकिन यह खूबसूरत सपना शायद केवल उद्घाटन दिवस तक ही सीमित था। कुछ ही दिनों में सेल्फी बोर्ड ने अपनी मुस्कान खो दी, गमले धराशायी हो गए और पौधों ने पानी के अभाव में लोकतांत्रिक तरीके से सूखने का निर्णय ले लिया। अब वह स्थान सुंदरीकरण कम और प्रयोगात्मक कला प्रदर्शनी अधिक प्रतीत होता है-शीर्षक है, “बिना रखरखाव का विकास”।
नगर पालिका परिषद की कार्यशैली भी कम रोचक नहीं है। जिन मार्गों से बड़े अधिकारी या जनप्रतिनिधि गुजरते हैं, वहाँ हरियाली भी हरी रहती है और रंग भी ताज़ा दिखते हैं। लेकिन जहाँ आम जनता रोज़ घंटों खड़ी होकर वाहन की प्रतीक्षा करती है, वहाँ शायद विकास की फाइल भी प्रतीक्षा में ही खड़ी रह जाती है। स्वाभाविक प्रश्न उठता है- यदि पौधों को पानी देने की व्यवस्था नहीं थी, तो उन्हें रोपा ही क्यों गया? यदि देखरेख की योजना नहीं थी, तो सुंदरीकरण किसके लिए था? क्या यह केवल फोटो खिंचवाने का प्रोजेक्ट था? स्थानीय नागरिकों की अपेक्षा बस इतनी है कि धर्मशाला चौक को फिर से “सेल्फी प्वाइंट” नहीं, बल्कि सचमुच का स्वच्छ और सुव्यवस्थित सार्वजनिक स्थल बनाया जाए। वरना आने वाले समय में शायद यहाँ एक और बोर्ड लगाना पड़े- आई लव योजनाएँ, बशर्ते वे टिकें भी।
Author: Pramod Gupta
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