February 14, 2026 8:32 am

संस्कार भवन की बदहाली का जिम्मेदार कौन? सिर्फ नाम है आदर्श नगर पंचायत

सोनभद्र। चोपन के स्थित आदर्श नगर पंचायत में माँ काली मंदिर परिसर का संस्कार/सामुदायिक भवन पिछले लगभग 7 वर्षों से बंद पड़ा है। वर्ष 2017 से अनुपयोगी इस भवन की हालत लगातार जर्जर होती गई, लेकिन मरम्मत या पुनर्निर्माण को लेकर अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

जांच हुई, रिपोर्ट आई… कार्रवाई नहीं

स्थानीय नागरिकों की शिकायत जनसुनवाई पोर्टल तक पहुँची। पूर्व में दी गई आख्या के बाद हाल ही में (PWD) के जूनियर इंजीनियर ने स्थल निरीक्षण कर वर्तमान तकनीकी आख्या प्रस्तुत की।

चौंकाने वाली बात यह है कि—

  • पूर्व आख्या में भी भवन की खामियों को स्वीकार किया गया,
  • वर्तमान आख्या में भी तकनीकी दोषों की पुष्टि हुई,

इसके बावजूद अब तक न मरम्मत हुई, न जिम्मेदारी तय हुई।

बोर्ड बैठक में रखा जाएगा— कब तक?

नगर पंचायत की ओर से कहा गया कि मामला बोर्ड बैठक में प्रस्ताव के रूप में रखा जाएगा। जबकि 7–8 वर्षों में कई बोर्ड बैठकें हो चुकी हैं। सवाल उठता है कि आखिर हर बार यह मुद्दा टल क्यों जाता है?

सवालों के घेरे में प्रशासन

स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि 2012 के बाद लंबे समय तक नगर पंचायत में एक ही परिवार का प्रभाव रहा, फिर भी इस एकमात्र बहुउपयोगी भवन की सुध नहीं ली गई। नगर में सुंदरीकरण और अन्य कार्यों पर लाखों रुपये खर्च होने की चर्चाएं होती रही हैं, लेकिन सामाजिक आयोजनों के लिए जरूरी इस भवन की उपेक्षा प्रशासनिक प्राथमिकताओं पर प्रश्नचिह्न लगाती है।

मुख्य प्रश्न

  1. जब भवन 2017 से बंद है, तो अब तक मरम्मत या पुनर्निर्माण क्यों नहीं हुआ?
  2. दो-दो जांच रिपोर्ट के बाद भी कार्रवाई लंबित क्यों है?
  3. यदि निर्माण या रखरखाव में खामियां थीं, तो कार्यदायी संस्था पर क्या कार्रवाई हुई?
  4. क्या नगर पंचायत की आय इतने वर्षों में भी इसे उपयोग योग्य बनाने के लिए पर्याप्त नहीं थी?

जनहित प्रभावित

संस्कार भवन बंद होने से नगरवासियों को शादी-विवाह और अन्य सामाजिक कार्यक्रमों के लिए निजी भवनों या दूरस्थ स्थानों का सहारा लेना पड़ रहा है, जिससे आर्थिक बोझ बढ़ रहा है।

प्रशासन से अपेक्षा

नागरिकों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि—

  • पूर्व व वर्तमान आख्या को एक साथ संज्ञान में लिया जाए,
  • मरम्मत/पुनर्निर्माण की स्पष्ट समयसीमा तय की जाए,
  • जिम्मेदार अधिकारियों व कार्यदायी संस्था की जवाबदेही निर्धारित की जाए,
  • और भवन को शीघ्र जनता के लिए पुनः खोला जाए।

अब देखना यह है कि “आदर्श” कहलाने वाली नगर पंचायत वास्तव में आदर्श कार्यप्रणाली का परिचय कब देती है।

Pramod Gupta
Author: Pramod Gupta

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