सोनभद्र। बभनी (नरेश गुप्ता) उत्तर प्रदेश सरकार एक ओर परिषदीय विद्यालयों को ‘स्मार्ट’ बनाने और बच्चों को डिजिटल साक्षरता से जोड़ने के बड़े-बड़े दावे कर रही है, वहीं सोनभद्र के बभनी शिक्षा क्षेत्र से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जो इन दावों की पोल खोल रही है। उच्च प्राथमिक विद्यालय असनहर के बच्चे आज के इस आधुनिक युग में भी कंप्यूटर शिक्षा के लिए तरस रहे हैं।हैरानी की बात यह है कि विद्यालय में बाकायदा कंप्यूटर शिक्षक की तैनाती है, लेकिन बच्चे आज तक यह भी नहीं जान पाए कि उनका शिक्षक दिखता कैसा है। स्थानीय सूत्रों और अभिभावकों के अनुसार, संबंधित शिक्षक पिछले कई वर्षों से स्कूल जाने के बजाय बीआरसी (BRC) बभनी में डेरा डाले हुए हैं। आरोप है कि विभाग की मिलीभगत से यह शिक्षक स्कूल में बच्चों को कंप्यूटर सिखाने के बजाय बीआरसी पर आधार कार्ड बनाने के कार्य में लगे हैं। इतना ही नहीं, बीआरसी परिसर अब अवैध वसूली का अड्डा बन चुका है। ग्रामीणों का आरोप है कि आधार कार्ड के नाम पर लोगों से मोटी रकम वसूली जा रही है, जिससे क्षेत्र की जनता में भारी आक्रोश है।एक आक्रोषित अभिभावक ने कहा की हमारे बच्चे कंप्यूटर सीखना चाहते हैं, लेकिन उन्हें सिखाने वाला कोई नहीं है। शिक्षक बीआरसी पर आधार कार्ड बना रहे हैं और स्कूल में बच्चों का भविष्य बर्बाद हो रहा है।सबसे बड़ा सवाल खंड शिक्षा अधिकारी (BEO) की कार्यप्रणाली पर उठ रहा है। उनकी नाक के नीचे आधार केंद्र पर ‘लूटपाट’ जारी है और एक शिक्षक अपनी मूल जिम्मेदारी (शिक्षण) को छोड़कर अन्य कार्यों में लिप्त है, फिर भी प्रशासन मौन है। बीआरसी पर आधार की दो आईडी संचालित होने के बावजूद शिक्षक की वहां उपस्थिति समझ से परे है।डिजिटल युग में जहाँ बच्चों के हाथों में माउस और कीबोर्ड होना चाहिए था, वहां विभाग की लापरवाही ने उन्हें अंधकार में धकेल दिया है। अब देखना यह है कि क्या उच्च अधिकारी इस ‘सिस्टम की सेंधमारी’ को रोकते हैं या बच्चों का भविष्य ऐसे ही आधार के नाम पर अधर में लटका रहेगा।इस संबंध मे ज़ब खंड शिक्षा अधिकारी राकेश पाण्डेय से सम्पर्क करने की कोशिश की गयी तो वो फोन उठाना मुनासिब नहीं समझा।
Author: Pramod Gupta
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