February 6, 2026 7:35 am

सरकारी धन का खुला बंदरबांट, हैंडपंप मरम्मत के नाम पर हजारों रुपए का फर्जी भुगतान का आरोप

हैंडपंप मरम्मत के नाम पर हो रहा लगातार भुगतान, फिर भी खराब पड़े कई हैंडपंप

सोनभद्र। विकास खंड नगवां में हैंडपंप मरम्मत के नाम पर हर वर्ष हजारों रुपये का भुगतान किया जा रहा है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट नजर आ रही है। सरकारी धन के कथित बंदरबांट में पूरा तंत्र संलिप्त बताया जा रहा है। जीरो टॉलरेंस नीति को ठेंगा दिखाते हुए ग्राम प्रधानों और पंचायत सचिवों की मिलीभगत से प्रति हैंडपंप मरम्मत के नाम पर 18 से 20 हजार रुपये तक का भुगतान धड़ल्ले से किया जा रहा है। हैरानी की बात यह है कि ब्लॉक स्तरीय अधिकारी न तो इसकी वास्तविक स्थिति जानने की कोशिश करते हैं और न ही कभी स्थलीय निरीक्षण करते हैं। विकास खंड नगवां में कुछ ऐसे पंचायत सचिव भी हैं जो अपने क्षेत्र के गांवों में जाने के बजाय कार्यालय में बैठकर ही आदेश जारी करते हैं। ग्रामीणों के फोन तक उठाना उचित नहीं समझते, जिससे ग्रामीण परेशान और बेबस बने हुए हैं।ताजा मामला ग्राम पंचायत सिकरवार और सेमरिया का है, जहां कई हैंडपंप आज भी खराब पड़े हुए हैं। जिनके घरों के पास ये हैंडपंप लगे हैं, वे कई बार ग्राम प्रधान से शिकायत कर चुके हैं, लेकिन भ्रष्ट तंत्र के चलते उनकी आवाज अनसुनी कर दी जाती है। सूत्रों के अनुसार बिना किसी स्थान को स्पष्ट किए लगातार हैंडपंप मरम्मत के नाम पर भुगतान किया जा रहा है। यह तक नहीं दर्शाया जाता कि किस स्थान का हैंडपंप ठीक किया गया है, सिर्फ कागजों पर मरम्मत दिखाकर धनराशि निकाल ली जाती है। इतना ही नहीं, आरोप है कि राजनीतिक द्वेष के चलते ग्राम प्रधान द्वारा मरम्मत कार्य में भी भेदभाव किया जा रहा है, जिससे ग्रामीणों में गहरी नाराजगी है। ग्रामीणों का कहना है कि प्रधान सरकारी धन को निजी धन समझकर मनमाने ढंग से खर्च कर रहे हैं। इस पूरे मामले को लेकर एडीओ पंचायत नगवां से सेलफोन पर वार्ता करने पर उन्होंने कार्रवाई का भरोसा दिलाया है।

Pramod Gupta
Author: Pramod Gupta

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