November 30, 2025 1:34 pm

राजेश मिश्रा की चौथी बार बनाया गया लेखपाल तैनाती पर उठे सवाल |

– 2002 से 2024 कार्य काल जारी राजस्व निरीक्षक बिल्ली मारकुंडी, बोले कोई विशेष कारण नहीं – एसडीएम ।

– बिल्ली मारकुण्डी खनन क्षेत्र हुई तैनाती को लेकर लोगों तरह-तरह की चर्चा। में में

सोनभद्र। जिले के कुछ लेखपाल ऐसे हैं जिनकी खनन क्षेत्र से बाहर के हल्कों में नहीं जाना चाहते हैं। वह शासन व सत्ता तक किसी भी शर्त पर अपनी पकड़ बना कर जिले के खनन क्षेत्र के हल्का में अपनी तैनाती करा लेते हैं। सूबे में सरकार भले ही किसी की हो वह जिले का पत्थर खनन का हब माने जाने वाले बिल्ली मारकुंडी में अपनी तैनाती करा लेते हैं। इसे लेकर लोगों में तरह-तरह की चर्चाएं अब शुरू हो गई हैं। बिल्ली मारकण्डी खनन क्षेत्र में लेखपाल

राजेश मिश्रा की चौथी बार बनाया गया लेखपाल फिर चौथी बार पिछले 6 फरवरी को उप जिलाधिकारी के आदेश पर राजेश मिश्रा को बिल्ली मारकुण्डी का लेखपाल बना दिया गया है। लोगों ने जिलाधिकारी से इस पूरे प्रकरण पर हस्तक्षेप करना चाहिए कि इस जिले के अन्य लेखपालों को किन परिस्थितियों में खनन क्षेत्र में कार्य करने का मौका नहीं दिया जा रहा है। उधर इस बाबत जब ओबरा के एस. डीएम से संपर्क करने का प्रयास किया गया तो वार्ता नहीं हो सकी लिहाजा उनका पक्ष नहीं लिया जा सका। चौथी बार तैनाती ने लोगों को एक बार फिर से चौंका कर रख दिया है। लोगों का कहना है कि सपा व बसपा के बाद जीरो टालरेंस का दावा करने वाली भाजपा सरकार में भी जिस तरह से खनन क्षेत्र में अपनी कथित बादशाहत के लिए पहचाने जाने वाले लेखपालों को तैनाती मिलनी शुरू हो गई है उसने जिम्मेदारों की मंशा पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। बताते चलें कि ओबरा तहसील के बिल्ली मारकुण्डी ग्राम पर लेखपाल की तैनाती को लेकर एक बार फिर से अफसर मेहरबान हो गए है। सूबे में चाहे बसपा सरकार रही हो या फिर सपा की और अब भाजपा सरकार में भी लेखपाल राजेश कुमार मिश्र की तैनाती होना अपने आप में सवाल पैदा कर रही है। वर्ष 2002 से अब तक लेखपाल राजेश कुमार मिश्र को चौथी बार बिल्ली मारकुण्डी क्षेत्र का लेखपाल बना दिया गया है।

लंबे समय तक जमे रहे लेखपाल

इसे लेकर खनन कारोबारियों में इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। मिली जानकारी के मुताबिक अगस्त 2002 तक दिनेश कुमार दूबे बिल्ली मारकुंडी के लेखपाल रहे। सितंबर 2002 से दिसंबर 2009 तक राजेश कुमार मिश्न को उक्त खनन क्षेत्र के गांव का बस्ता मिल गया। दिसंबर 2009 से सितंबर 2010 तक राजकुमार मिश्र बिल्ली मारकुंडी के लेखपाल रहे। अक्टूबर 2010 से मई 2011 तक पुनः राजेश कुमार मिश्र को इस अहम गांव का बस्ता थमा दिया गया। जून 2011 से मार्च 2012 तक श्रीराम इस गांव के लेखपाल रहे। मार्च 2012 में कुछ दिनों के लिए अरुणोदय पांडेय को अतिरिक्त चार्ज में इस गांव का लेखपाल बनाया गया लेकिन किन्ही कारणवश उन्हें हटा कर राजेश कुमार मिश्र को मार्च 2012 में पुनः बिल्ली मारकुंडी का लेखपाल बना दिया गया था जो मई 2017 तक तैनात रहे। इसके बाद जून 2017 से सुरेंद्र नाथ मिश्रा जून 2019 तक तैनात रहे। जुलाई 2019 से जून 2022 तक ओम प्रकाश चतुर्वेदी को बस्ता दिया गया। जुलाई 2022 से फरवरी 2024 तक अरुणोदय पांडेय को लेखपाल बनाया गया।

Pramod Gupta
Author: Pramod Gupta

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