दुद्धी:सोनभद्र /नवजात की मौत और उसके शव की खोजबीन का मामला रविवार सुबह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में इतना बढ़ गया कि हॉस्पिटल प्रशासन को पुलिस बुलानी पड़ गई। पीड़ित फूलवंती के ससुराल और मायके के आपसी मतभेद का खामियाजा उसके नवजात शिशु को भुगतना पड़ा, अस्पताल परिसर में दोनों पक्षों की भारी भीड़ जुट गई, और जमकर आरोप-प्रत्यारोप एक दूसरे पर चला रहा । मामला इतना बढ़ गया कि डायल 112 की टीम को मौके पर बुलाना पड़ा। पुलिस ने दोनों पक्षों को समझाकर थाने ले जाकर पूछताछ कर पुलिस आगे की कार्रवाई में जुट गई।मामले की जानकारी देते हुए पीड़ित प्रसूता महिला फुलवंती (29), पत्नी रंगबहादुर निवासी बीडर ने बताया कि उसे शुक्रवार की रात 8:35 बजे सीएचसी दुद्धी में भर्ती कराया गया था, जहां सामान्य प्रसव के दौरान एक स्वस्थ एक बच्ची का जन्म हुआ। जिसका वजन 3 किलो 600 ग्राम था, और डॉक्टरों के मुताबिक वह बिल्कुल स्वस्थ थी। लेकिन फुलवंती का आरोप है कि डिलीवरी के बाद न तो पति आया, न ही ससुराल का कोई सदस्य हाल-चाल लेने पहुंचा।फुलवंती का आरोप है कि जब उसने अपने पति को बच्ची के जन्म की सूचना दी, तो उसने बेरुखी से जवाब दिया – “तुम मर रही हो तो मरो, हमें मत बताया करो” – और फिर मोबाइल स्विच ऑफ कर दिया। दूसरे दिन केवल सास अस्पताल आई, लेकिन परिवार का कोई अन्य सदस्य नहीं आया। प्रसूता महिला का कहना है कि शनिवार को नवजात की अचानक तबीयत बिगड़ गई और उसकी मौत हो गई। मायके पक्ष की मदद से नवजात जन्मे बच्ची का अंतिम संस्कार कर दिया गया।लेकिन रविवार दोपहर जैसे ही ससुराल पक्ष को मौत की जानकारी मिली, वे बड़ी संख्या में अस्पताल पहुंचे और दावा करने लगे कि बच्ची उनकी है – “हमें बच्ची चाहिए, चाहे जिंदा हो या मरी हुई, वो हमारी है।” इस दौरान माहौल तनावपूर्ण हो गया और अस्पताल परिसर में दोनों पक्ष आमने-सामने हो गए। देखते ही देखते भीड़ जुट गई और अस्पताल में अफरा-तफरी मच गई।मौके पर पहुंची डायल 112 की टीम ने मामले को संभाला और दोनों पक्षों को थाने ले गई। ससुराल पक्ष का आरोप है कि लड़की होने के कारण मायके वालों ने नवजात की हत्या कर दी और शव को गायब कर दिया। उनका कहना है कि पहले से ही फुलवंती के चार बेटियां और एक बेटा है, और दो बच्चों की मौत भी हो चुकी है ऐसे में एक और लड़की को लेकर विवाद हुआ और बच्ची को मार दिया गया।वहीं, फुलवंती का कहना है कि बच्ची की हालत अचानक खराब हुई थी और उसे दफनाया गया। ससुराल वाले पहले आए नहीं, अब मौत के बाद अधिकार जता रहे हैं।
इस मामले में चिकित्सा अधीक्षक डॉ. शाह आलम अंसारी ने बताया कि बच्ची स्वस्थ पैदा हुई थी और मां को दे दी गई थी। अस्पताल प्रशासन को उसकी मौत की जानकारी नहीं दी गई, न ही किसी नर्स या डॉक्टर को बताया गया। अब मौत कैसे हुई, यह जांच का विषय है।
इस संबंध में प्रभारी निरिक्षक मनोज कुमार सिंह ने बताया कि एक परिवार के द्वारा शिकायत की गई कि उसके नवजात जन्मे बच्चों को मरा हुआ बता कर कहीं दफना दिया गया है जिसकी सूचना हम लोगों को नहीं हुई है हमें नवजात बच्चे का दिखा दिया जाए जिससे हमें संतुष्टि हो सके,लौवा नदी सिद्धेश्वर मंदिर के आगे दफन हुए शव की खोजबीन की गई लेकिन शव प्राप्त नहीं हुआ इसके बाद पुलिस ने प्रसूता की माता व सास के द्वारा अस्पताल से ले जाए गए बच्चे की खोज में पूछताछ कर रही है वही प्रसूता महिला को इलाज के लिए अस्पताल में भी भर्ती कराकर स्वास्थ्य विभाग द्वारा देखरेख की जा रही है।
