सोनभद्र। सावन के पावन माह में बाबा भोलेनाथ की भक्ति में डूबे श्रद्धालु अनेक प्रकार से अपनी श्रद्धा प्रकट कर रहे हैं, परंतु मेरठ जिले के रामराज निवासी 60 वर्षीय हरपाल भगत की यात्रा भक्ति, तपस्या और संकल्प की एक अनूठी मिसाल बन गई है। 6 फरवरी 2025 को हरिद्वार की हर की पौड़ी से जल लेकर चले हरपाल भगत अब तक लगभग 940 किलोमीटर की दूरी तय करते हुए 17 जुलाई को सोनभद्र पहुंचे हैं। उनका उद्देश्य है, पंचमुखी महादेव मंदिर में जलाभिषेक कर आगे नेपाल स्थित पशुपतिनाथ मंदिर तक की यात्रा पूरी करना।
घुटनों और हाथों के बल करते हैं यात्रा
हरपाल भगत इस संपूर्ण यात्रा को घुटनों और हाथों के बल चलकर पूरा कर रहे हैं। वह प्रतिदिन लगभग 4 से 7 किलोमीटर की दूरी तय करते हैं। उनके साथ एक छोटी ट्रॉली बंधी होती है, जिसमें दैनिक उपयोग की वस्तुएं, खाने का सामान, सोलर लाइट, छोटा पंखा आदि हैं। इस ट्रॉली को वह अपने पीठ से बांधकर खींचते हैं।
अब तक 940 किमी यात्रा, लक्ष्य 1800 किलोमीटर
381 दिनों की प्रस्तावित यात्रा में वह कुल तीन स्थानों पर जलाभिषेक करने जा रहे हैं
- संभाल्हेड़ा (मुज़फ्फरनगर) पहले ही जलाभिषेक कर चुके हैं
- पंचमुखी महादेव (सोनभद्र) 17 जुलाई को पहुंचे
- पशुपतिनाथ (नेपाल) 23 जुलाई को सोनभद्र से आगे यात्रा प्रारंभ करेंगे
कुल यात्रा दूरी लगभग 1800 किलोमीटर होगी।
आत्मनिर्भर व संयमी जीवनशैली
हरपाल रास्ते में स्वयं खाना बनाते हैं, जहां जगह मिले वहीं ठहरते हैं। उन्होंने ट्रॉली में सोलर पैनल लगाया है जिससे लाइट और पंखे का प्रबंध किया है। इस कठिन यात्रा के दौरान उन्हें कई स्थानों पर आम लोगों से सहयोग भी मिला है।
पहले भी कर चुके हैं कठिन यात्रा
हरपाल भगत इससे पूर्व भी 120 दिनों की कठिन यात्रा कर चुके हैं। इस बार की यात्रा और भी चुनौतीपूर्ण रही है। अब तक तीन बार दुर्घटनाग्रस्त हो चुके हैं, फिर भी उनका संकल्प डगमगाया नहीं। उनका कहना है, “रास्ते में रुकावटें और कष्ट आते हैं, लेकिन भोलेनाथ की कृपा से सब दूर हो जाते हैं।”
भक्ति से मिलती है शक्ति
परिवार से भरे पूरे हरपाल भगत के इस कठिन व्रत में उन्हें केवल एक ही ऊर्जा स्रोत प्रेरित करता है, भोलेनाथ की भक्ति। उनका कहना है कि वह यह यात्रा केवल भगवान को समर्पित करने के लिए कर रहे हैं।

Author: Pramod Gupta
Hello