August 31, 2025 4:41 pm

काकोरी नायकों के शहीदी दिवस को भाकपा ने सांझी शहादत सांझी विरासत के रूप में मनाया

सोनभद्र। भाकपा जिला सचिव आरके शर्मा ने कहा कि क्रांतिकारियों की साझी शहादत साझी विरासत को बचाए रखने के लिए युवाओं को आगे आना होगा।
बृहस्पतिवार को काकोरी काण्ड के नायकों के शहीदी दिवस पर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने जिला क्षेत्रीय कार्यालय पटवध पर इंकलाबी नारों के साथ सांझी शहादत और सांझी विरासत के रूप में मनाया। साथी ही लोगों को जागरूक करने के लिए गोष्ठी भी आयोजित की गई।
जहां उपस्थिति लोगों ने अमर शहीदों को नमन और श्रद्धा सुमन अर्पित किया। संगोष्ठी को संबोधित करते हुए पार्टी के जिला सचिव आर के शर्मा ने कहा कि आज से 97 वर्ष पहले अंग्रेजी हुकूमत ने हमारे देश के इन चार वीरों रामप्रसाद बिस्मिल, अशफ़ाक उल्ला खां, ठाकुर रोशन सिंह और राजेन्द्र नाथ लाहिड़ी को सन् 1927 में 17 से 19 दिसम्बर के बीच काकोरी केस में फांसी के तख्ते पर चढ़ा दिया था। इन वीरो ने हंसते हसंते फांसी के फंदे को चूम कर अपनी शहादत दे दी। उस दौर में इन क्रांतिकारियों ने धर्म और सम्प्रदाय को ताक पर रखकर जिस देश की आजादी में अपना बलिदान दिया। आज़ उसी देश में धर्म और सम्प्रदाय की राजनीति चल रही है जो दूर्भाग्यपूर्ण है। वर्तमान सत्ता पर काबिज लोग इन क्रांतिकारियों की उस सोच, उस विचारधारा, सांझी शहादत, सांझी विरासत को भूलकर देश में धर्म और उन्माद की राजनीति करते हुए इस देश की विरासत को बेचने पर भी अमादा हैं। भाजपा सरकार सार्वजनिक क्षेत्रों को कार्पोरेट घरानों को सौंपतीं जा रही है। जिसको रोकने के लिए देश के युवाओं को आगे आना होगा और क्रांतिकारियों के विरासत को आगे बढ़ाते हुए देश की विरासत को भी बचाने के लिए काम करना होगा।
आइये इस मौके पर हम इन शहीदों को सच्ची श्रद्धांजलि देते हुए अपने देश की साझी शहादत और साझी विरासत की रक्षा का संकल्प ले। इस पावन पवित्र बलिदान के मौके पर क्रांतिवीरों को हमारा सलाम।
उपस्थित अन्य वक्ताओं ने शहीदों के इतिहास पर जिक्र करते हुए कहा कि स्वतंत्रता संग्राम आंदोलन में हमारे देश के क्रांतिकारी साथियों ने अलग अलग तरीके से देश को स्वतंत्र करने के लिए अपनी शहादत दी। पंडित राम प्रसाद बिस्मिल द्वारा एवं उनके साथियों के विचार विमर्श के बाद एक क्रांतिकारी कदम उठाने के लिए योजनाबद्ध तरीके से धन संग्रह की योजना बनाई। सुझाव आया क्यों ना अंग्रेजी खजाने जो रेल के माध्यम से ले जाया जाता है उसको लूट लिया जाए योजना के अनुसार काकोरी स्टेशन से ज्योहि गाड़ी कुछ आगे बढ़ी निश्चित स्थान पर चेन पुलिंग की गई। गार्ड के डब्बे के पास कुछ साथी पहुंचे और उसको धमकाते हुए गाड़ी रोकने को मजबूर किया। राम प्रसाद बिस्मिल और अशफाक उल्ला खान संदूक को तोड़ने लगे। संदूक तोड़ने में समय लग रहा था। लेकिन राम प्रसाद बिस्मिल ने हथौड़ा अपने हाथ में लिया और उसे तोड़ दिया। एक चादर में पैसा उलटकर गाड़ी से उतर गए। यह कार्यक्रम मात्र आधा घंटा में संपन्न हो गया। बड़े ही सावधानी के साथ लोग लखनऊ शहर में जा छिपे। अगले दिन अखबार में इस कांड की मुख्य खबर बनी। सरकारी मिशनरी ने इस कांड को गंभीरता से लिया। जांच के बाद निशानदेही के रूप में एक चादर जो शाहजहांपुर की थी मौके पर मिली। जांच पड़ताल के बाद वह चादर हिंदुस्तान रिपब्लिकन संगठन की पाई गई। जिसके कारण काकोरी कांड का खुलासा हुआ। राम प्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खान, राजेंद्र नाथ लहरी एवं ठाकुर रोशन सिंह अन्य चार साथी पकड़े गए। जिसमें पंडित रोशन सिंह को गोरखपुर, अशफ़ाक़ उल्ला खान को फैजाबाद और राजेंद्र नाथ लहरी को नियत तिथि के दो दिन पहले गोंडा एवं ठाकुर रोशन सिंह को फांसी की सजा दे दी गई। अन्य चार लोगों को आजीवन कारावास हुई। एक आदमी नाबालिक था जिसको 14 वर्ष की सजा हुई। इस तरह काकोरी कांड के इन अमर शहीदों की कुर्बानी नींव की ईंट बनी जो अंत में लाखों लोगों की कुर्बानियों के बाद देश आजाद हुआ। लेकिन जिस तरह आज देश चल रहा है पुनः आर्थिक सामाजिक रूप से आने वाले समय में लड़ने के लिए तैयार रहना होगा।
इस अवसर पर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के जिला सह सचिव कामरेड देव कुमार विश्वकर्मा, पूर्व जिला सचिव कामरेड राम रक्षा, कामरेड राजेन्द्र प्रसाद, कामरेड प्रेम चंद्र गुप्ता, तारकेश्वर गुप्ता, बाबूलाल, राम सुरत बैगा, राम जी बैगा, बुद्धि राम खरवार, हृदय नारायण गुप्ता, मोहम्मद मुस्तफा, कमला प्रसाद, जगरनाथ व देव शाह आदि मौजूद रहे।
कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ कामरेड कन्हैया लाल ने और संचालन कामरेड अमरनाथ सूर्य जी ने किया।

Pramod Gupta
Author: Pramod Gupta

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