विंढमगंज /सोनभद्र (संतोष मिश्रा) श्री राजा बरियार शाह रामलीला समिति महुली के तत्वाधान में रामलीला के दूसरे दिन मंगलवार को भगवान गणेश जी की आरती कर लीला का शुभारंभ किया गया। श्रीराम को किस कारण जन्म लेना पड़ा ? इसका उत्तर रामायण में श्री राम के मुख से ही सुनिए। श्रीराम कहते हैं- पूर्वं
मयानूनमभिष्सितानि पापानिकर्माण्यसकृतकृतानि।
तेषां मयाद्यापतितो विपाको दुखेन दुखं यदहं विशामि ।।
अर्थात् निश्चय ही मैंने पूर्व जन्म में बड़ पाप किए थे जिनका मुझे यह फल प्राप्त हुआ है। और आज भी एक दुःख के बाद मुझको दूसरा दुःख मिल रहा है।
यहां कुछ लोग यह कहते हैं कि श्रीराम को वनवास होना, सीता हरण,रावणवध आदि सभी ईश्वर की लीलाएं थी । जो श्री राम ने रची थी । क्योंकि वे ईश्वर ही थे। उनको दुःख या पाप नहीं हुआ था।
लेकिन वेद में ईश्वर को “अपापविद्धं” लिखा है। जिसका अर्थ है कि ईश्वर कभी पाप में आबद्ध नहीं होता है । फिर श्री राम ने ईश्वर होते हुए पाप कैसे किए ? अतः वे ईश्वर नहीं ठहरे । और यदि कहो कि श्री राम ने लीला वश झूठ बोल दिया कि यह उनके पिछले जन्मों के पापों का फल है तो भी वे ईश्वर नहीं हो सकते। क्योंकि ईश्वर ने स्वयं वेद में झठ बोलना पाप कहा है और उसके लिए सर्वाधिक दण्ड है। इस प्रकार दोनों स्थितियों में वे ईश्वर सिद्ध नहीं होते।
न पाप करने वाला ईश्वर हो सकता है।
न झूठ बोलने वाला ईश्वर हो सकता है।
आत्मा को तो कर्मफल के कारण शरीर में आना ही पड़ता है। इसीलिए श्री राम को भी आना पड़ा।

Author: Pramod Gupta
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