January 14, 2026 10:17 pm

जांच टीम से पहले ही ख़बरदार, सोनभद्र की खदानें ‘पाताल’ बन गईं- मशीनें गायब, नियमों की कब्र खोदने का खेल

सोनभद्र। जब बाहर से आई जांच टीम को सत्य नज़रों से देखने का मौका तक नहीं मिलता, तब सवाल उठता है- कौन है वह अंदर बैठा “खबरीलाल” जो कार्रवाई से पहले ही सबको सच बता देता है? ओबरा तहसील की बिल्ली चढ़ाई की खदानों में हालिया घटनाक्रम यह दिखाता है कि खनन माफियाओं और विभागीय चलबाज़ियों ने मिलकर पारदर्शिता की नीतियों को पूरी तरह बेनकाब कर दिया है। सूत्रों के अनुसार मेसर्स अजंता माइंस एंड मिनरल्स (ई-टेंडर) और राधे-राधे इंटरप्राइजेज के पट्टों पर टीम के आने की सूचना मिलते ही जेसीबी, टीपर और भारी उपकरण कुछ ही घंटों में गायब कर दिए गए। स्थानीय लोगों और कार्यवाही से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि औपचारिक जांच को दिखावे तक सीमित रखने के लिए अवैध खुदाई अस्थायी तौर पर रोकी जाती है, ताकि निरीक्षण के दौरान सब कुछ मानकनुमा नजर आए। मगर असलियत यही है कि पहाड़ियों के भीतर चल रहे खनन से वहां का नज़ारा अब “हरी-भरी पहाड़ियों” की जगह पाताल की तरफ़ बदल चुका है- गड्ढों में जमा पानी और गढ़े हुए अवशेषों ने इलाके को खतरनाक रूप दे दिया है। मेसर्स अजंता की आराजी संख्या 4949-ख (5.880 हेक्टेयर) और राधे-राधे की आराजी संख्या 5006 (3.400 हेक्टेयर) पर पहले भी मानक से अधिक खनन की शिकायतें दर्ज की जा चुकी हैं। बावजूद इसके, स्थानीय दबदबे और प्रभावशाली संबंधों के चलते प्रभावी कार्रवाई नहीं हो पाती। विभागीय नियमों की धज्जियाँ उड़ रही हैं और शासक-प्रशासन की बुनियाद हिलती नजर आ रही है- अधिकारियों की चुप्पी और भ्रष्टाचार ने जनता का भरोसा हिला दिया है। जांच टीमें अक्सर सिर्फ़ कोरम पूरा कर रिपोर्टिंग का औपचारिक पिता निभा कर लौट जाती हैं; परिणामतः जनता के सामने ज़ीरो-टॉलरेंस की सरकारी नीति केवल दिखावे की बनी रहती है। सवाल यही है- क्या इस बार कोई ठोस कदम उठेगा या यह भी कागज़ी खानापूर्ति बनकर रह जाएगा? आम जनता अब जान चुकी है कि आदेश क्या हैं और हकीकत क्या है; पाताल की खदानों से निकलता पानी सिर्फ़ भू-भौतिक नहीं, बल्कि व्यवस्था की गहरी दरारों का प्रतीक बन चुका है। आख़िर कौन है वह अंदर बैठा खबरीलाल- विभाग के भीतर कौन कर रहा है सूचना लीक? जब तक इस प्रकार की मिलीभगत और सूचना चैनलों पर अंकुश नहीं लगाया जाएगा, तब तक सोनभद्र के हरी-भरी पहाड़ों का अँधेरा पाताल में तब्दील होता रहेगा और जनता के मन में शासन-प्रशासन की विश्वसनीयता कहां तक टिकेगी, यह बड़ा प्रश्न बना रहेगा।

Pramod Gupta
Author: Pramod Gupta

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